हरियाणा के गुरुग्राम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हित के लिए आवंटित की गई जमीनों पर अवैध निर्माण और अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों का गंभीर जाल फैल चुका है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में सामने आया है कि पांच प्रमुख डीएलएफ कॉलोनियों में जरूरतमंदों के लिए आरक्षित प्लॉटों पर नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया गया है। इन आवासीय भूखंडों पर सात-सात मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जबकि कई जगहों पर जिम, क्लीनिक और दुकानें खोलकर नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार, इन पांचों कॉलोनियों की कुल 5,099 संपत्तियों में से लगभग 43 प्रतिशत संपत्तियों को नियमों के उल्लंघन अथवा अवैध व्यावसायिक उपयोग के तौर पर चिन्हित किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर महज 102 संपत्तियों पर ही वास्तविक कार्रवाई अमल में लाई जा सकी है।
नोटिस और बहाली आदेशों की स्थिति
नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की तरफ से पेश किए गए आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होता है कि नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कागजी प्रक्रिया बड़े पैमाने पर शुरू की गई है। पांचों चिन्हित डीएलएफ कॉलोनियों में कुल 4,330 संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस थमाए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 4,810 संपत्तियों के संदर्भ में बहाली आदेश जारी किए जा चुके हैं, ताकि अवैध बदलावों को खत्म कर मूल स्वरूप वापस लाया जा सके। यह पूरा मामला शीर्ष अदालत की निगरानी में भी पहुंचा है। मूल रूप से 15 दिसंबर 2025 से तैयार की गई एक रिपोर्ट को 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इस हलफनामे में 7 सितंबर 2026 तक की अद्यतन स्थिति दर्ज की गई है, जिसमें जमीनी हकीकत से जुड़े कई चौंकाने वाले बिंदु दर्ज हैं।
फेज-3 और यू ब्लॉक में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां
अदालत में पेश रिकॉर्ड के मुताबिक, कॉलोनियों के यू ब्लॉक में सबसे ज्यादा अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां अवैध निर्माण, स्वीकृत नक्शे से अधिक अनधिकृत मंजिलों का निर्माण और रिहायशी भूखंडों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की तुलना करें तो डीएलएफ फेज-3 में उल्लंघनों की कुल संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। अन्य चरणों में भी ईडब्ल्यूएस श्रेणी के भूखंडों का भारी दुरुपयोग देखा गया है। उदाहरण के लिए, डीएलएफ फेज-5 में चिन्हित 204 संपत्तियों में से 128 संपत्तियां, यानी करीब 62.75 प्रतिशत प्लॉट, वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवंटित किए गए थे। इसी तरह फेज-4 के भीतर 356 संपत्तियों में उल्लंघन पाए गए, जिनमें से 158 संपत्तियां अथवा 44.38 प्रतिशत भूखंड इसी आरक्षित वर्ग के थे। वहीं डीएलएफ फेज-1 में चिन्हित 464 संपत्तियों के दायरे में उल्लंघन के करीब 19 मामले दर्ज किए गए हैं।
35 लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों का विस्तृत सर्वेक्षण
गुरुग्राम के समग्र नगरीय परिदृश्य को देखें तो अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान कुल 35 लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में सघन सर्वेक्षण अभियान चलाया गया था। लगभग 8,309.8 एकड़ क्षेत्र में फैली इन कॉलोनियों में कुल 65,127 स्वीकृत प्लॉट शामिल हैं। इस व्यापक जांच में प्रथम दृष्टया करीब 8,248 संपत्तियों में भवन निर्माण योजना के स्पष्ट उल्लंघन अथवा बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग के मामले पाए गए। 7 सितंबर 2026 तक सामने आई स्थिति के अनुसार, चिन्हित 8,248 संपत्तियों में से 6,465 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि 4,810 संपत्तियों के विरुद्ध बहाली आदेश दिए गए थे। हालांकि भौतिक स्तर पर सीलिंग या तोड़फोड़ की कार्रवाई केवल 128 संपत्तियों पर ही देखने को मिली है, जबकि 120 संपत्तियों को उनके मूल स्वीकृत प्रारूप में बहाल कराया गया है।
विभाग की आगामी कार्ययोजना और प्रक्रिया
जमीनी कार्रवाई की गति को लेकर विभाग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का कहना है कि पूरी कार्रवाई चरणबद्ध और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है ताकि विधिक अड़चनों से बचा जा सके। विभाग के अनुसार, केवल किसी संपत्ति की पहचान हो जाने को ही अंतिम रूप से नियम उल्लंघन का निर्धारण नहीं माना जाता है। तय प्रक्रिया के तहत पहले नोटिस जारी किए जाते हैं, जिसके बाद संपत्ति मालिकों के जवाब मांगे जाते हैं। निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिए जाने के बाद ही नियमों के तहत अंतिम आदेश पारित किए जाएंगे और उसी आधार पर भौतिक कार्रवाई आगे बढ़ेगी।























