आधुनिक क्रिकेट के दौर में जब टी20 प्रारूप की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, तब भी पचास ओवरों के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का ऐतिहासिक महत्व अपनी जगह कायम है। एक समय ऐसा था जब टेस्ट और वनडे मैचों का रोमांच प्रशंसकों के सिर चढ़कर बोलता था और कप्तानों की रणनीतिक सूझबूझ टीम को शिखर तक पहुंचाती थी। खेल के इतिहास में कई महान कप्तानों ने अपनी टीमों का शानदार नेतृत्व किया, लेकिन कुल जीत के आंकड़ों के आधार पर पांच ऐसे रणनीतिकार रहे हैं जिन्होंने मैदान पर जीत के नए प्रतिमान स्थापित किए। इस विशिष्ट सूची में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा स्पष्ट दिखाई देता है, जबकि भारत की ओर से एकमात्र कप्तान अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं।
रिकी पोंटिंग के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया का स्वर्णिम दौर
एकदिवसीय क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक मैच जीतने का कीर्तिमान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम दर्ज है। साल 2002 से 2012 के लंबे दशक के दौरान पोंटिंग ने कुल 230 एकदिवसीय मुकाबलों में ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया। उनकी आक्रामक और परिणामोन्मुख कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 165 एकदिवसीय मुकाबलों में शानदार जीत अपने नाम की, जबकि टीम को केवल 51 मैचों में पराजय झेलनी पड़ी और 14 मुकाबले बिना किसी नतीजे या बराबरी पर समाप्त हुए। पोंटिंग का जीत प्रतिशत 76 से अधिक रहा, जो इस प्रारूप में किसी भी नियमित कप्तान के लिए असाधारण माना जाता है। उनके इसी प्रभावी दौर में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 2003 और 2007 का एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप लगातार दो बार जीतकर अपना वर्चस्व सिद्ध किया था।
महेंद्र सिंह धोनी की शांत और ऐतिहासिक कप्तानी
इस सूची में दूसरे पायदान पर भारतीय क्रिकेट के सफलतम कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का नाम आता है। धोनी ने साल 2007 से लेकर 2018 के बीच कुल 200 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभाली। उनके शांत दृष्टिकोण और मैच के अंतिम पलों में सटीक फैसलों की बदौलत भारत ने 110 मैचों में यादगार जीत दर्ज की, जबकि 74 मैचों में टीम को हार का सामना करना पड़ा। धोनी के नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान यह रही कि उन्होंने भारत को बड़े आईसीसी टूर्नामेंटों में जीत दिलाई, जिसमें 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 2011 का एकदिवसीय विश्व कप खिताब और साल 2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की प्रतिष्ठित जीत शामिल है।
एलन बॉर्डर का जुझारू नेतृत्व और न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को कठिन दौर से उबारने वाले एलन बॉर्डर इस सूची में तीसरे स्थान पर काबिज हैं। उन्होंने साल 1985 से 1994 के दौरान 178 एकदिवसीय मैचों में अपनी टीम का नेतृत्व किया और 107 मैचों में जीत हासिल की, जबकि 67 मैचों में हार मिली और 4 मैच बेनतीजा रहे। बॉर्डर की कप्तानी का सबसे बड़ा मील का पत्थर 1987 का विश्व कप जीतना रहा। चौथे स्थान पर साउथ अफ्रीका के हेंसी क्रोनिए हैं, जिन्होंने 1994 से 2000 के बीच 138 वनडे मुकाबलों में टीम की कप्तानी करते हुए 99 मैचों में जीत दर्ज की और केवल 35 मुकाबलों में हार झेली। वहीं पांचवें पायदान पर न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग का नाम आता है, जिन्होंने 1997 से 2007 के दौरान 218 एकदिवसीय मुकाबलों में कीवी टीम का नेतृत्व करते हुए 98 मैचों में जीत दिलाई, जबकि 106 मैचों में उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा।



















