मैदान के बाहर विवादों से घिरे होने और हाल ही में राष्ट्रीय दल से बाहर किए जाने के कड़वे अनुभवों के बाद अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने घरेलू क्रिकेट की लाल गेंद प्रतियोगिता में शानदार वापसी की है. 2026-27 के कायद-ए-आजम ट्रॉफी गोल्ड सीजन के शुरुआती मुकाबले में ही रिजवान ने एबटाबाद की पिच पर अपने संयम और आक्रामकता का बेजोड़ नमूना पेश करते हुए दोहरा शतक जड़ दिया. यह पारी सिर्फ रनों की गिनती भर नहीं है, बल्कि उस गहरे मानसिक दबाव का मुंहतोड़ जवाब भी है जिससे वह बीते कई महीनों से लगातार जूझ रहे थे.
राष्ट्रीय टीम से बाहर होने का दर्द और इंग्लैंड सीरीज का झटका
मोहम्मद रिजवान के लिए पिछले कुछ महीने पेशेवर और निजी दोनों मोर्चों पर काफी उथल-पुथल भरे रहे हैं. कुछ महीने पहले जब इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही थी, तब वह पाकिस्तानी टीम का हिस्सा थे. उस दौरान लंबे समय से उनके बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे और तकनीकी कमजोरियों को लेकर लगातार बातें हो रही थीं. इसके बाद चयनकर्ताओं ने कड़ा फैसला लेते हुए उन्हें सीरीज के बीच से ही पाकिस्तानी स्क्वाड से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. किसी भी सीनियर खिलाड़ी के लिए घरेलू सरजमीं पर चल रही अहम टेस्ट सीरीज के बीच में से बाहर होना एक बहुत बड़ा आघात माना जाता है, जिससे उनकी जगह पर सवाल उठने लगे थे.
साइबर क्राइम एजेंसी की जांच और जब्त हुआ मोबाइल फोन
टीम से निकाले जाने की निराशा अभी थमी भी नहीं थी कि रिजवान के सामने कानूनी और प्रशासनिक मुश्किलें खड़ी हो गईं. पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NCCIA ने उनके खिलाफ जांच का शिकंजा कस दिया. ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े गंभीर मामलों की पड़ताल के सिलसिले में जांच अधिकारियों ने उनका फोन तक जब्त कर लिया था. इतने बड़े स्तर पर खेलने वाले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की ईमानदारी और खेल भावना पर उठे इन तीखे सवालों ने उन्हें मानसिक तौर पर झकझोर दिया था. क्रिकेट के मैदान से दूर पुलिसिया और साइबर जांच के पचड़ों में घिरना किसी भी एथलीट के पेशेवर करियर और एकाग्रता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.
एबटाबाद के मैदान पर पहले दिन से रिजवान का जलवा
तमाम दबावों, बोर्ड के साथ खिंचे रिश्तों और जांच की प्रक्रियाओं को पीछे छोड़ते हुए 34 वर्षीय मोहम्मद रिजवान 3 नवंबर को एबटाबाद में पेशावर रीजन ब्लूज की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरे. पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए रिजवान ने शुरुआत से ही सकारात्मक रुख अपनाया और विरोधी गेंदबाजों को हावी होने का कोई मौका नहीं दिया. मैच के पहले दिन का खेल खत्म होने तक उन्होंने केवल 142 गेंदों में 21 दर्शनीय चौकों की मदद से नाबाद 111 रन बना डाले थे. पहले ही दिन शतक पूरा करके उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दे दिया था कि उनके अंदर क्रिकेट की भूख अभी बाकी है और वह मुश्किल हालात के आगे झुकने वाले नहीं हैं.
मैराथन पारी और 391 गेंदों में दोहरा शतक
अगले दिन खेल शुरू होने पर रिजवान ने अपनी लय को और मजबूत किया. उन्होंने केवल क्रीज पर टिकने भर का इरादा नहीं दिखाया, बल्कि ढीली गेंदों को लगातार सीमा रेखा के पार भेजते रहे. अपनी इस लंबी पारी के दौरान उन्होंने कुल 391 गेंदों का सामना करते हुए अपना शानदार दोहरा शतक पूरा किया. इस मैराथन पारी में उनके बल्ले से 35 चौके और एक बड़ा छक्का निकला. क्रीज पर बिताए गए लंबे समय और शॉट चयन से साफ दिखा कि वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना स्वाभाविक प्रभुत्व दोबारा हासिल करने के लिए कितने संकल्पित थे.
नजाब खान का साथ और पेशावर रीजन ब्लूज का 503 रन का विशाल स्कोर
इस मुकाबले में पेशावर रीजन ब्लूज की तरफ से सिर्फ रिजवान का बल्ला ही नहीं गरजा, बल्कि चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे नजाब खान ने भी बेहतरीन सूझबूझ का परिचय दिया. नजाब खान ने रिजवान के साथ मिलकर विपक्षी टीम के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह थका दिया और खुद भी एक उम्दा शतक जमाया. इन दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई मजबूत साझेदारी के दम पर पेशावर रीजन ब्लूज ने मुकाबले के दूसरे दिन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव तक 115 ओवरों में 4 विकेट खोकर 503 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर लिया. इस विशाल स्कोर ने मैच पर उनकी टीम की पकड़ बेहद मजबूत कर दी.
वापसी की राह और चयनकर्ताओं के सामने नया सवाल
इंग्लैंड दौरे से बीच में निकाले जाने और उसके तुरंत बाद NCCIA की जांच के दायरे में आने जैसी घटनाएं किसी भी अनुभवी खिलाड़ी का आत्मविश्वास तोड़ने के लिए पर्याप्त होती हैं. इसके बावजूद रिजवान ने हार मानने की जगह घरेलू लाल गेंद क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दोहरा शतक जड़कर यह साबित कर दिया कि उनका खेल अभी खत्म नहीं हुआ है. क्रिकेट हलकों में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बड़ी पारी उनकी फॉर्म की निरंतरता को बनाए रखेगी. कायद-ए-आजम ट्रॉफी के आगे आने वाले मैचों में उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि क्या वह पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह दोबारा हासिल कर पाते हैं या नहीं.



















