बैंकिंग क्षेत्र में बिना परीक्षा और इंटरव्यू के नौकरी दिलाने का झांसा देकर भारी-भरकम रकम वसूलने वाले एक संगठित गिरोह पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कड़ा शिकंजा कसा है। इस गैरकानूनी नेटवर्क में शामिल चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग का एक इंस्पेक्टर भी शामिल है। यह रैकेट अभ्यर्थियों से एकमुश्त रकम लेकर उन्हें बैंक में पक्की नौकरी की पूरी गारंटी देता था और चयन प्रक्रिया में उनकी जगह नकली परीक्षार्थी मैदान में उतारता था।
चार राज्यों में फैला था नेटवर्क, स्पेशल टास्क ब्रांच ने की छापेमारी
जांच एजेंसी की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह की सक्रियता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। इस गिरोह के तार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गहराई तक फैले हुए थे। सीबीआई की स्पेशल टास्क ब्रांच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन चारों राज्यों में संदिग्धों के कई ठिकानों पर एक साथ योजनाबद्ध छापेमारी की। सघन तलाशी अभियान के दौरान चार आरोपियों को हिरासत में लेकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
आईबीपीएस की शिकायत पर मुंबई ब्रांच में दर्ज हुआ था केस
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब बैंकिंग परीक्षाओं का आयोजन करने वाली संस्था, इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन (आईबीपीएस) को इस अनुचित गतिविधि की भनक लगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईबीपीएस ने तुरंत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर सीबीआई की मुंबई ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामले की विस्तृत छानबीन का जिम्मा केंद्रीय एजेंसी की स्पेशल टास्क ब्रांच को सौंपा गया, जिसने जांच की दिशा तय करते हुए आरोपियों की धरपकड़ शुरू की।
असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा और इंटरव्यू में बैठते थे साल्वर
पड़ताल के दौरान सामने आया कि यह सिंडिकेट बैंकिंग भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में मूल उम्मीदवारों की जगह डमी अभ्यर्थियों यानी साल्वर को बैठाता था। गिरोह के सदस्य लिखित परीक्षा से लेकर साक्षात्कार तक के चरणों में खुद शामिल होते थे, जिससे क्लाइंट बने उम्मीदवार को बिना किसी मशक्कत के चयन का भरोसा दिया जाता था। केंद्रीय एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के अनुचित हथकंडों से उन योग्य और परिश्रमी उम्मीदवारों के अवसरों को भारी नुकसान पहुंचा, जो अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर बैंकिंग सेवा में आने का प्रयास कर रहे थे।
जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी, अन्य कड़ियों की तलाश
जांच एजेंसी ने रेखांकित किया है कि इस संगठित मामले में अनुसंधान की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इस बात की गहन पड़ताल की जा रही है कि इस व्यापक रैकेट में और कौन-कौन से लोग पर्दे के पीछे से जुड़े हुए थे तथा उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या थी। आने वाले दिनों में रैकेट से जुड़े अन्य लोगों, एजेंटों और अनुचित लाभ लेने वाले उम्मीदवारों की पहचान कर उन पर भी विधिक कार्रवाई किए जाने की संभावना है।


















