महाराष्ट्र के लोनावला में पारिवारिक जायदाद के झगड़े ने एक खौफनाक रूप ले लिया, जहां 83 वर्षीय दादा ने अपने ही 33 वर्षीय पोते की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान पेशे से वकील अभय मराठे के तौर पर हुई है। शुरुआत में परिजनों ने इस पूरी वारदात को राइफल से दुर्घटनावश चली गोली बताकर मामले को दबाने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस की विस्तृत पड़ताल ने इस झूठी कहानी की परतें खोल दीं। शव पर मिले घावों की स्थिति और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है।
ससून अस्पताल में पोस्टमार्टम और पुलिस को हुआ पहला संदेह
वारदात के बाद अभय के शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए पुणे के ससून अस्पताल ले जाया गया था। वहां जब पुलिस अधिकारियों ने परिजनों के बयान दर्ज किए, तो उनकी बातों में कई विसंगतियां नजर आईं। परिजनों का दावा था कि राइफल साफ करते या संभालते समय गलती से ट्रिगर दब गया था। हालांकि पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि यदि गोली दुर्घटनावश चलती, तो उसका कोण और सीने पर लगने का ढंग बिल्कुल अलग होता। खुद से गोली लगने या किसी हादसे में सीने पर बनने वाले घाव और अभय के शरीर पर मिले निशान में स्पष्ट अंतर था, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।
होटल के काउंटर पर मिले खून के धब्बे और छींटे
संदेह पुख्ता होते ही क्राइम ब्रांच की जांच टीम उस होटल में पहुंची, जहां यह वारदात हुई थी। होटल के काउंटर के पास की दीवार पर पुलिस को खून का एक बड़ा धब्बा मिला। इसके अलावा जमीन से लगभग पांच फीट की ऊंचाई पर भी खून के छींटे मौजूद थे। इन निशानों की स्थिति ने साफ कर दिया कि अभय को सीधे खड़े रखकर गोली मारी गई थी और यह किसी भी सूरत में साधारण दुर्घटना नहीं हो सकती। इसके बाद होटल के मैनेजर और वहां काम करने वाले कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ की गई, जिससे पूरे विवाद की असलियत सामने आ गई।
जमीन बेचने को लेकर चल रहा था पुराना पारिवारिक तनाव
पुलिस जांच में सामने आया कि अभय मराठे और उनके 83 वर्षीय दादा मोटीराम मराठे के बीच एक संपत्ति को बेचने को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। अभय उस जायदाद को बेचना चाहते थे, जबकि बुजुर्ग मोटीराम इस बिक्री का लगातार कड़ा विरोध कर रहे थे। सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे इसी मुद्दे को लेकर होटल में दोनों के बीच एक बार फिर तीखी बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर अभय अपने दादा की ओर आगे बढ़े, तभी तैश में आकर मोटीराम ने अपनी लाइसेंसी राइफल उठाई और सीधे अभय पर फायर झोंक दिया। सीने में गोली लगते ही अभय ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
सबूत मिटाने और सीसीटीवी हटाने के आरोप में चार रिश्तेदार गिरफ्तार
अभय की मौत होते ही परिजनों ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इसे दुर्घटना साबित करने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया। इस दौरान अभय की बहन, चाचा, चाची और चचेरे भाई तुरंत होटल पहुंचे। वे शव को उठाकर होटल के एक कमरे में ले गए ताकि बाहरी लोगों को कुछ पता न चले। इसके साथ ही होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) को भी वहां से हटा दिया गया। परिजनों पर होटल कर्मचारियों को मुंह बंद रखने की धमकी देने का भी आरोप लगा। इन सब हरकतों के बाद ही अभय के माता-पिता को घटना की सूचना दी गई।
वारदात के साक्ष्य नष्ट करने और सच छिपाने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में ले लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में अभय की बहन राजश्री पवार, 54 वर्षीय चाचा हिरामन मराठे, चाची कविता मराठे और 32 वर्षीय चचेरा भाई मनोज मराठे शामिल हैं। पुलिस अब इस बात की छानबीन कर रही है कि फुटेज को कहां छिपाया गया। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि मोटीराम मराठे के पास 1970 में शिकार के उद्देश्य से ली गई दो लाइसेंसी राइफलें थीं। पुलिस अब यह तकनीकी जांच कर रही है कि हत्या में किस राइफल का इस्तेमाल हुआ और वारदात के बाद हथियार को कहां रखा गया था।



















