सुप्रीम कोर्ट ने भारत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका के खिलाफ की गई टिप्पणियों के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने उद्धव गुट वाली शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों से पूछा है कि उनके बयानों और टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें किस तरह एक सोचे-समझे जाल में फंसाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई
यह पूरी कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन यानी SCBA की ओर से दायर की गई एक आपराधिक अवमानना याचिका के आधार पर आगे बढ़ी है। अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अपनी बात रखी और कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस प्रकार की हरकतें करते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि इससे न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा सकता है। इस दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और मामले की गंभीरता को देखते हुए जवाब तलब किया।
वरिष्ठ वकीलों और पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने अदालत को बताया कि इस तरह की याचिका दायर करना उनके लिए भी काफी पीड़ादायक अनुभव रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस मामले में आरोपितों में एक पक्ष संसद के सम्मानित सदस्य हैं तो दूसरा पक्ष एक जिम्मेदार पत्रकार से जुड़ा है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह भी सुझाव दिया कि दोनों की व्यक्तिगत उपस्थिति इस मामले में अनिवार्य होनी चाहिए, क्योंकि यदि इस तरह की घटनाओं को अभी नजरअंदाज कर दिया गया तो भविष्य में दूसरे लोगों को भी इस प्रकार की बयानबाजी के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
व्यक्तिगत उपस्थिति से फिलहाल छूट
अदालत ने नोटिस जारी करते हुए संजय राउत और निखिल वागले को यह बताने को कहा है कि उन पर अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह भी साफ किया गया कि फिलहाल दोनों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गई है। मामले की सुनवाई के सिलसिले में मुख्य न्यायाधीश ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की स्थिति यह हो गई है कि लोग खुद इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्हें किस प्रकार एक सुनियोजित जाल में फंसाया जा रहा है।
किस बयान पर मचा है विवाद
संजय राउत द्वारा दिए गए बयानों को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े कुछ विशेष मुद्दों पर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से मिलने से सीजेआई के इनकार किए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के करीब 80 जजों को लंदन में राजनीतिक नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते हुए देखा गया था, जिसके बाद से यह मामला तूल पकड़ता चला गया।



















