पारंपरिक रोजगार और खेती की लीक से हटकर कुछ अलग करने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए तेलंगाना से एक दिलचस्प और अनूठी कहानी सामने आई है। नागरकर्नूल जिले में रहने वाले एक उत्साही युवक ने पारंपरिक नौकरियों की तलाश करने के बजाय अनोखे व्यवसाय का रास्ता चुना है। उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से उन्नत नस्ल की गधियाँ लाकर एक आधुनिक डेयरी स्थापित की है, जो आज अच्छी खासी कमाई का जरिया बन चुकी है। समाज में आमतौर पर उपेक्षित माने जाने वाले इन मवेशियों को अब ग्रामीण आर्थिकी का एक मजबूत आधार माना जाने लगा है, जिससे इस युवा की सफलता ने सबको चौंका दिया है।
लगभग 50 गधियों के साथ शुरू किया गया अनोखा काम
इस आधुनिक फार्म की शुरुआत अखिल नामक युवक ने की है, जिन्होंने शुरुआती तौर पर बाहर के राज्यों से करीब 50 से अधिक गधियों को अपनी यूनिट में शामिल किया। सामान्य डेयरी फार्म्स की तुलना में यह सेटअप काफी अलग है क्योंकि गाय या भैंस की तरह गधी का दूध भारी मात्रा में नहीं मिलता। एक गधी से रोजाना केवल 500 मिलीलीटर से 1 लीटर तक ही दूध मिल पाता है। यही वजह है कि सीमित उत्पादन और उच्च मांग के कारण बाजार में इस खास दूध के दाम बहुत ऊंचे हैं और यह आसानी से ₹5,000 से ₹7,000 प्रति लीटर के भाव में बिक जाता है।
लाखों रुपये की मासिक कमाई और खर्च का गणित
नागरकर्नूल के इस फार्म से रोजाना औसतन 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन किया जाता है। इतने कम उत्पादन के बावजूद इसकी ऊंची कीमत के कारण कुल कारोबार हर महीने काफी बड़ा हो जाता है। फार्म को चलाने में आने वाला खर्च जैसे चारे का प्रबंध, उचित देखभाल, पशु चिकित्सा और कर्मचारियों का वेतन आदि सब घटाने के बाद भी संचालक को हर महीने ₹2 लाख से ₹3 लाख तक की शुद्ध बचत आसानी से हो जाती है। इस प्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद यह यूनिट बेहतरीन मुनाफा कमा रही है।
कॉस्मेटिक्स और औषधियों में क्यों है इतनी भारी मांग
गधी के दूध की कीमत इतनी अधिक होने के पीछे इसके वैज्ञानिक कारण और औषधीय उपयोगिता जुड़ी हुई है। जानकारों के अनुसार, इस दूध के पोषक तत्व मानव शिशु को मिलने वाले मातृ दुग्ध के काफी करीब माने जाते हैं। इसमें एंटी-एजिंग गुण और कई आवश्यक विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जिनका उपयोग देश-विदेश की बड़ी सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां महंगे स्किनकेयर उत्पाद, साबुन और लोशन बनाने के लिए करती हैं। इसके अलावा बाल चिकित्सा, श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के उपचार और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत करने वाली आयुर्वेदिक तथा एलोपैथिक दवाओं में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।



















