गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब के सेवन से जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 13 तक पहुंच गई है। रविवार सुबह अस्पताल में भर्ती चार गंभीर मरीजों में से दो और लोगों ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद यह दुखद आंकड़ा 13 हो गया। इस पूरे मामले में कुल 67 लोगों ने जहरीले रसायन मेथनॉल मिली शराब का सेवन किया था, जिनमें से दो मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। ड्राई स्टेट गुजरात में नकली शराब का यह अवैध कारोबार प्रसिद्ध ब्रांडों की बोतलों में भरकर चलाया जा रहा था।
अस्पतालों की स्थिति और प्रभावितों की जांच
प्रशासन द्वारा जारी विवरण के अनुसार शनिवार को तीन लोगों की मौत दर्ज की गई थी, जिनमें भावनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती 36 वर्षीय हार्दिक किलजी और 54 वर्षीय अविनाश परमार शामिल थे। इसके अलावा संजय डोडिया नाम के व्यक्ति की सूरत के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। रविवार सुबह दो और लोगों की सांसें थम जाने से कुल मृतकों की संख्या 13 पर पहुंची। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमों ने इस हादसे के बाद तुरंत राहत अभियान शुरू किया था।
सामूहिक जहरीली शराब कांड के प्रभाव को देखते हुए पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया था। अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराए गए 28 लोगों का सफल इलाज किया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने उन 24 अन्य लोगों की भी पहचान कर उनका पता लगाया जिन्होंने उस विषैली शराब का सेवन किया था। इन सभी 24 व्यक्तियों को चिकित्सा जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया। वर्तमान में केवल दो ही मरीज अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में हैं, जिनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
ब्रांडेड बोतलों में मेथनॉल का घातक जहर
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि पीड़ितों ने जिस अवैध शराब का सेवन किया था, उसमें अत्यधिक विषैला पदार्थ मेथनॉल मिलाया गया था। मेथनॉल मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है और इसके सेवन से शरीर के आंतरिक अंग तेजी से काम करना बंद कर देते हैं। इस अवैध धंधे में शामिल अपराधियों ने लोगों को धोखा देने के लिए एक खास तरीका अपनाया था। वे जहरीले मिश्रण को भारत में निर्मित लोकप्रिय विदेशी शराब (आईएमएफएल) के नामी ब्रांडों की बोतलों में पैक करके बेच रहे थे।
उल्लेखनीय है कि गुजरात राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री, परिवहन और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है और राज्य की पहचान एक शराबबंदी वाले राज्य के रूप में रही है। इसके बावजूद लोकप्रिय ब्रांड की बोतलों का इस्तेमाल करके शराब प्रेमियों को यह घातक मिश्रण परोसा गया, जिससे दर्जनों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। घटना की सूचना सामने आने के बाद से ही कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े हर एक व्यक्ति की धरपकड़ में लगी हुई हैं।
वरतेज थाने में दर्ज केस और पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद भावनगर के वरतेज पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। इस प्राथमिकी में कुल 21 लोगों को आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। पुलिस कार्रवाई करते हुए अब तक नामजद 21 आरोपियों में से 13 लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर चुकी है। पुलिस ने X पर साझा की गई जानकारी के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और गुजरात मद्य निषेध अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इन पर गैर-इरादतन हत्या, शराब में जहरीले पदार्थों की मिलावट करने और जहर देने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को गिरफ्तार आरोपियों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस हिरासत के दौरान जांच अधिकारी अवैध आपूर्ति श्रृंखला के मुख्य स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेष जांच इकाई राज्य निगरानी प्रकोष्ठ को सौंपी गई कमान
मामले की संवेदनशीलता और व्यापक असर को देखते हुए पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) को सौंप दिया गया है। स्टेट मॉनिटरिंग सेल गुजरात पुलिस की एक अत्यंत विशिष्ट इकाई है, जिसका मुख्य कार्य पूरे राज्य भर में गैर-कानूनी शराब के व्यापार, अवैध गतिविधियों और जुए के नेटवर्क पर पैनी नजर रखना और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है। एसएमसी की टीम अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही है कि भारी मात्रा में मेथनॉल कहां से लाया गया था और इस जहरीली शराब को किन-किन इलाकों में सप्लाई किया गया था।



















