असम के शिवसागर जिले में पुलिस हिरासत के दौरान हुई हिंसक झड़प और गोलीबारी में घनकांत गोगोई की मौत हो गई है. घनकांत गोगोई गुवाहाटी के एक होटल में पांच लोगों की गोली मारकर हत्या करने के सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी था. यह घटना उस वक्त घटी जब पुलिस टीम उसे वर्ष 2024 में दर्ज बैंक धोखाधड़ी के एक अन्य पुराने मामले की तफ्तीश के सिलसिले में गुवाहाटी से शिवसागर ले जा रही थी. पुलिस के अनुसार, रास्ते में वाहन रुकवाकर उतरते ही उसने पुलिस अधिकारी का सरकारी हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया और अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया.
शिवसागर के फूलपानिचिगा में वाहन से उतरते ही हुई झड़प
यह मुठभेड़ शिवसागर जिले के फूलपानिचिगा इलाके में घटित हुई. पुलिस अधीक्षक पापोरी चेतिया के विवरण के अनुसार, गोगोई को गुवाहाटी सेंट्रल जेल से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शिवसागर लाया जा रहा था. रास्ते में गोगोई ने पुलिसकर्मियों से वाहन को थोड़ी देर के लिए किनारे रोकने का अनुरोध किया ताकि वह नीचे उतर सके. जैसे ही गाड़ी रुकी और वह बाहर आया, उसने अचानक सब-इंस्पेक्टर देबाशीष शर्मा पर हमला कर दिया और उनकी सर्विस पिस्टल छीनने का प्रयास किया. देबाशीष शर्मा उस बैंक धोखाधड़ी मामले के मुख्य जांच अधिकारी भी थे.
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गोगोई पूर्व में प्रशिक्षित निशानेबाज रह चुका था. हथियार छीनने की इसी छीना-झपटी के दौरान अचानक दो से तीन चक्र गोलियां चलीं. इनमें से दो गोलियां सीधे पुलिस की गाड़ी में जाकर लगीं, जबकि एक गोली सब-इंस्पेक्टर देबाशीष शर्मा के सीधे दाहिने पैर में जा धंसी. मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने और अपने घायल साथी की जान बचाने के लिए फौरन जवाबी फायरिंग की. इस गोलीबारी में गोगोई को गोलियां लगीं और वह वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ा. पुलिस बल उसे तत्काल नजदीकी चिकित्सालय लेकर रवाना हुआ, लेकिन रास्ते में ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घायल सब-इंस्पेक्टर की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है.
बोरा सर्विस स्थित होटल विलास इन में 26 अक्टूबर को हुआ था नरसंहार
घनकांत गोगोई पर 26 अक्टूबर की रात गुवाहाटी के बोरा सर्विस क्षेत्र में स्थित होटल विलास इन परिसर में पांच व्यक्तियों को गोलियों से भूनने का संगीन आरोप था. रात लगभग नौ बजे हुई इस भयानक वारदात की जड़ में होटल की लीज और संपत्ति का गहरा विवाद था. गोगोई ने यह वाणिज्यिक संपत्ति भराली परिवार से लीज पर ले रखी थी. दोनों पक्षों के बीच 10 सितंबर 2025 को पांच वर्षों के लिए बाकायदा एक अनुबंध हुआ था, जिसके तहत हर महीने लगभग 1.8 लाख रुपए का किराया तय किया गया था. हालांकि, लीज पर लेने के बाद होटल के नवीनीकरण और निर्माण कार्यों के खर्च को लेकर दोनों पक्षों में गहरा मनमुटाव पैदा हो गया था.
इसी वित्तीय और संपत्ति विवाद के समाधान के लिए 26 अक्टूबर की रात दोनों पक्षों ने बातचीत की एक बैठक आयोजित की थी. बातचीत शुरू होने से पहले ही कहासुनी हो गई और देखते ही देखते माहौल बेहद हिंसक हो गया. गोगोई ने कथित रूप से वहां मौजूद छह लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं. इस भीषण हमले में भूदेव भराली, हेलेना भराली, देबर्षि कश्यप, रिनिका कश्यप और नारायण दास की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि भराली परिवार का वाहन चालक सत्येंद्र पाठक गंभीर रूप से घायल हो गया था. इस खूनी वारदात के बाद पूरे राज्य में भारी आक्रोश फैल गया था.
बैंक धोखाधड़ी मामले में रिमांड और न्यायालय का घटनाक्रम
होटल हत्याकांड को अंजाम देने के बाद पुलिस ने त्वरित घेराबंदी कर गोगोई को गिरफ्तार कर लिया था. जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 2 नवंबर को पुलिस दल अपराध के पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए उसे वारदात वाले होटल विलास इन भी लेकर गया था. इसके बाद 3 नवंबर को गुवाहाटी की एक अदालत में उसे पेश किया गया, जहां जांच एजेंसी ने उसकी सात दिनों की अतिरिक्त पुलिस कस्टडी की मांग रखी. हालांकि अदालत ने अतिरिक्त पुलिस रिमांड की याचिका खारिज करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया था.
न्यायिक हिरासत में जाने के तत्काल बाद शिवसागर पुलिस ने वर्ष 2024 में दर्ज एक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में उसकी कस्टडी हासिल की. यह मामला पंजाब नेशनल बैंक की शिवसागर शाखा के तत्कालीन प्रबंधक देबब्रत बरगोहाईं की औपचारिक शिकायत पर दर्ज किया गया था. गोगोई पर आरोप था कि उसने बैंक से कार ऋण लिया था लेकिन उसकी मासिक किस्तों का भुगतान नहीं किया. शिकायत में यह भी दर्ज था कि बकाए की मांग करने पर उसने बैंक प्रबंधक को गंभीर धमकियां भी दी थीं. इसी मामले में पूछताछ के लिए उसे शिवसागर लाया जा रहा था. मुठभेड़ के बाद घटनास्थल को सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में लगी है, जबकि उच्चाधिकारी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं.



















