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कानपुर नगर निगम के 650 करोड़ के ठेका घोटाले पर बड़ा एक्शन, सिंडिकेट के 3 ठेकेदार गिरफ्तार और मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा की तलाश तेजअपराध
26 अग॰ 2026, 11:51 pm (17 दिन पहले)· 1

कानपुर नगर निगम के 650 करोड़ के ठेका घोटाले पर बड़ा एक्शन, सिंडिकेट के 3 ठेकेदार गिरफ्तार और मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा की तलाश तेज

कानपुर नगर निगम में फर्जी फर्मों के जरिए टेंडर मैनेज करने वाले माफिया सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है, जबकि 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के भुगतान रोक दिए गए हैं।

कानपुर नगर निगम के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर जारी भ्रष्टाचार और टेंडर माफिया के वर्चस्व के खिलाफ शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर निगम के छोटे-बड़े ठेकों को अपने हिसाब से मैनेज करने वाले एक संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य सूत्रधार गोविंद शर्मा फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत इस मामले की परतें खोली जा रही हैं।

कानपुर नगर निगम में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़

कानपुर नगर निगम के विकास कार्यों और निर्माण टेंडरों पर पिछले काफी समय से एक खास सिंडिकेट का कब्जा बना हुआ था। इस गिरोह में करीब 10 से 12 छोटे और बड़े ठेकेदार शामिल थे, जो आपस में साठगांठ करके टेंडर प्रक्रिया को नियंत्रित करते थे। यह सिंडिकेट तय करता था कि किस ठेकेदार को कौन सा काम मिलेगा और उसकी लागत कितनी रखी जाएगी। स्थानीय स्तर पर इस गिरोह का इतना खौफ था कि कोई अन्य ठेकेदार इनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। नगर निगम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद नगर आयुक्त ने मामले की विभागीय जांच शुरू कराई, जिसमें इस माफिया सिंडिकेट के अस्तित्व की पुष्टि हुई।

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फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन और 7 से 15 फीसदी कमीशनखोरी

जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि सिंडिकेट का मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराकर ठेके हासिल करता था। कई ऐसी कागजी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कराया गया था, जिनके पास सड़क निर्माण या अन्य सिविल वर्क्स के लिए जरूरी प्लांट, मशीनरी या बुनियादी संसाधन तक मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद इन फर्जी फर्मों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल कराकर ठेके आवंटित कराए जाते थे। इस पूरी सांठगांठ के जरिए 7 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक अवैध कमीशन वसूला जाता था। गिरोह में संदीप जैन और रज्जन बाजपेई जैसे कई ठेकेदार सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

कड़ा एक्शन: 100 करोड़ से अधिक के भुगतान रुके, 10 से ज्यादा फर्में ब्लैकलिस्ट

मामले में अनियमितताएं उजागर होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। फर्जीवाड़े में शामिल 10 से ज्यादा ठेकेदारी फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही सिंडिकेट से जुड़ी कंपनियों के 100 करोड़ रुपये से अधिक के लंबित भुगतानों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फरार गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।

एसआईटी की एंट्री और 650 करोड़ रुपये के टेंडरों की विस्तृत जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) कानपुर पहुंच चुकी है और जांच की कमान संभाल ली है। वर्तमान में नगर निगम के कुल 650 करोड़ रुपये की लागत वाले 275 टेंडरों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि टेंडर आवंटन में नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के इस सख्त रुख से साफ है कि सरकारी टेंडरों में माफियागीरी करने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

सवाल-जवाब

कानपुर नगर निगम टेंडर घोटाले में मुख्य आरोपी कौन है?
इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार गोविंद शर्मा है, जो फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराकर टेंडर मैनेज करता था और फिलहाल फरार है।
पुलिस ने मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने सिंडिकेट में शामिल तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है और 10 से ज्यादा कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
जांच टीम कितने करोड़ के टेंडरों की जांच कर रही है?
विशेष जांच टीम (SIT) कानपुर नगर निगम के 650 करोड़ रुपये की लागत वाले 275 टेंडरों की जांच कर रही है।
टेंडर माफिया सिंडिकेट कितना कमीशन वसूलता था?
यह सिंडिकेट फर्जी कंपनियों के जरिए टेंडर हासिल करके 7 से 15 प्रतिशत तक अवैध कमीशनखोरी करता था।
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