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कानपुर नगर निगम में करोड़ों के फर्जीवाड़े पर एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ के ठेके निरस्त और 7 फर्मों पर लगा बैनअपराध
28 अग॰ 2026, 7:19 am (49 दिन पहले)· 1

कानपुर नगर निगम में करोड़ों के फर्जीवाड़े पर एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ के ठेके निरस्त और 7 फर्मों पर लगा बैन

कानपुर नगर निगम में 100 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद 7 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। एसआईटी की जांच के बीच नगर निगम अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में हुए बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद प्रशासनिक हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुई उच्च स्तरीय जांच में ठेकेदारी व्यवस्था के सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही धांधली में शामिल 7 संदिग्ध फर्मों को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया गया है। पुलिस ने मामले में अलग-अलग धाराओं में 6 मुकदमे दर्ज किए हैं और 2 ठेकेदारों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। वहीं, इस पूरे नेटवर्क का कथित सरगना गोविंद शर्मा फिलहाल पुलिस गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में कई जगह दबिश दी जा रही है।

सिंडिकेट का खेल और कम दर पर टेंडर हथियाने की साजिश

जांच एजेंसी द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल में टेंडर हासिल करने के संगठित और चौंकाने वाले तरीकों का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच के अनुसार नगर निगम में ठेकेदारों का एक मजबूत सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था। यह सिंडिकेट आपस में ही यह तय कर लेता था कि किस विकास कार्य का टेंडर कौन सी फर्म डालेगी और किसे काम सौंपा जाएगा। प्रतियोगिता को पूरी तरह खत्म करने के लिए कई मामलों में निर्धारित दर से लगभग 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर भरवाए जाते थे, जिससे अपनी पसंदीदा फर्म को ठेका दिलाना आसान हो जाता था।

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इसके अलावा, सिंडिकेट के सदस्य अन्य बाहरी और नए ठेकेदारों पर दबाव बनाते थे ताकि वे टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ही न ले सकें। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि निष्पक्षता का दिखावा करने के लिए लकी ड्रॉ आयोजित किए जाते थे, लेकिन असल में पूरी प्रक्रिया को पहले से ही मैनेज कर लिया जाता था। हालांकि, विशेष जांच टीम (एसआईटी) का कहना है कि इन सभी आरोपों की अंतिम और विधिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।

100 करोड़ के विकास कार्य ठप, भुगतान और पंजीकरण पर लगी रोक

सिंडिकेट के खुलासे के बाद नगर निगम प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये के लंबित और स्वीकृत टेंडर रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही, विवादित फर्मों और विकास कार्यों से जुड़े करोड़ों रुपये के भुगतानों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। फर्जीवाड़े को रोकने के मकसद से नगर निगम ने नई फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को दोहराने से रोकने के लिए अब पारदर्शी ऑनलाइन ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू करने की योजना तैयार की जा रही है।

पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल प्रमुख फर्मों के मालिकों और संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नामजद की गई फर्मों में दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज शामिल हैं। विशेष रूप से जगदंबा इंटरप्राइजेज की आपराधिक संलिप्तता को देखते हुए उसके खिलाफ 2 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर एसआईटी का कसता शिकंजा

विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच का दायरा केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि नगर निगम के विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। एसआईटी ने नगर निगम प्रशासन से टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय भुगतान, फर्मों के पंजीकरण और स्वीकृत विकास परियोजनाओं से संबंधित सभी मूल दस्तावेज और फाइलें तलब की हैं। जांच टीम अधिकारियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि जब लंबे समय से टेंडर प्रक्रिया में इतनी बड़ी गड़बड़ी चल रही थी, तो जिम्मेदार अफसरों ने इस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया।

एसआईटी की प्रभारी और अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि संबंधित फर्मों की सभी फाइलें हासिल कर ली गई हैं और उनका तकनीकी व वित्तीय अध्ययन जारी है। प्राथमिक जांच में एक फर्म के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। डॉ. अर्चना सिंह ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

मुख्य आरोपी गोविंद शर्मा की तलाश और बड़े गठजोड़ के खुलासे की उम्मीद

पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, आगरा निवासी गोविंद शर्मा इस पूरे टेंडर सिंडिकेट का मुख्य सरगना है। उसकी फर्म के जरिए नगर निगम की कई बड़ी और बहुमूल्य परियोजनाओं के काम हासिल किए गए थे। पुलिस ने इस सिलसिले में 2 ठेकेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि गोविंद शर्मा फरार चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी से इस सिंडिकेट के पीछे छिपे कई अन्य प्रभावशाली चेहरों और विभागीय अधिकारियों की साठगांठ का पर्दाफाश होगा।

वर्तमान में एसआईटी की जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि यह टेंडर घोटाला किस स्तर तक फैला हुआ था, किन-किन लोगों ने अनुचित लाभ पहुंचाया और नगर निगम के किन कर्मचारियों की इसमें सीधी संलिप्तता थी। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे बहुचर्चित टेंडर घोटाले की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

सवाल-जवाब

कानपुर नगर निगम टेंडर घोटाले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
जांच के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर रद्द किए गए हैं, 7 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, 6 एफआईआर दर्ज हुई हैं और 2 ठेकेदारों को गिरफ्तार किया गया है।
टेंडर सिंडिकेट का मुख्य सरगना कौन है?
पुलिस के अनुसार आगरा निवासी गोविंद शर्मा इस सिंडिकेट का मुख्य सरगना है, जो फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है।
किन-किन फर्मों के खिलाफ पुलिस मुकदमे दर्ज किए गए हैं?
पुलिस ने दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं।
क्या नगर निगम के अधिकारियों की भी जांच की जा रही है?
हां, एसआईटी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है और टेंडर, भुगतान तथा पंजीकरण से जुड़ी फाइलें तलब की गई हैं।
नगर निगम भविष्य में टेंडर धांधली रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
नगर निगम ने नई फर्मों के पंजीकरण पर रोक लगा दी है और भविष्य के सभी कामों के लिए पारदर्शी ऑनलाइन ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है।
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