केरल के इतिहास में सबसे रहस्यमय माने जाने वाले 42 साल पुराने हत्या और बीमा धोखाधड़ी मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वर्ष 1984 में 8 लाख रुपये के जीवन बीमा की राशि हड़पने के उद्देश्य से अंजाम दी गई हत्या के बाद से गायब मुख्य संदिग्ध सुकुमार कुरुप के अभी भी जीवित होने का दावा किया गया है। जांच टीम के पूर्व सदस्य और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अली अकबर के अनुसार, भगोड़ा सुकुमार कुरुप मरा नहीं है बल्कि वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देश ब्रुनेई में एक फर्जी पहचान बनाकर आराम से जिंदगी बिता रहा है। इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद केरल क्राइम ब्रांच ने नए सिरे से पड़ताल शुरू करने का फैसला लिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानकारी जुटाने के लिए इंटरपोल की मदद ली जा रही है।
ब्रुनेई कनेक्शन और राजनीतिक संरक्षण का दावा
रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अली अकबर ने मीडिया के सामने कई गंभीर खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक, 42 वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहा सुकुमार कुरुप ब्रुनेई में इंडो-मलेशियाई मूल के नागरिक की नकली पहचान के साथ रह रहा है। अकबर का कहना है कि इतने दशकों तक कानून की पकड़ से दूर रहने में कुरुप को कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं का संरक्षण मिलता रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि विदेश में रह रहे अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के साथ कुरुप लगातार संपर्क में बना हुआ है। अपने दावों को पुख्ता करने के लिए अली अकबर ने एक तस्वीर भी जारी की है और इसे सुकुमार कुरुप का हालिया फोटो बताया है। हालांकि, केरल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तस्वीर और नए दावों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानी बाकी है।
1984 का चाको हत्याकांड और 8 लाख का बीमा षड़यंत्र
इस पूरे मामले की शुरुआत 22 जनवरी 1984 को हुई थी, जब अलाप्पुझा जिले के कुट्टीचिरा निवासी चाको नाम के व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में यह सामने आया था कि यह कोई साधारण अपराध नहीं था बल्कि 8 लाख रुपये की भारी-भरकम बीमा राशि का अनुचित लाभ उठाने के लिए रची गई एक खौफनाक साजिश थी। आरोपी सुकुमार कुरुप और उसके साथियों ने चाको की हत्या करने के बाद उसके शव को एक कार में रखा और वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस साजिश का मकसद यह साबित करना था कि कार दुर्घटना में मारे जाने वाला व्यक्ति स्वयं सुकुमार कुरुप है, ताकि उसके परिवार को बीमा क्लेम मिल सके। हालांकि, बाद में फारेंसिक और पुलिस जांच में कार से मिला शव चाको का निकला, जिसके बाद फर्जी मौत और धोखाधड़ी के इस बड़े षड़यंत्र का पर्दाफाश हुआ। साजिश का भंडाफोड़ होते ही सुकुमार कुरुप फरार हो गया और तब से देश की विभिन्न पुलिस एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं।
इंटरपोल और क्राइम ब्रांच की नई जांच कार्रवाई
हालिया दावों को गंभीरता से लेते हुए केरल क्राइम ब्रांच के प्रमुख एडीजीपी एच. वेंकटेश ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि नई जानकारी की सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध के फर्जी पासपोर्ट, हालिया तस्वीर और मोबाइल फोन कनेक्शन से जुड़े डेटा को जुटाने के लिए जल्द ही इंटरपोल से संपर्क साधा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यदि इस जांच से कोई विश्वसनीय या ठोस सुराग मिलता है, तो मामले में पूर्ण स्तर पर विस्तृत जांच आगे बढ़ाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, केरल के गृह मंत्री रमेश चन्निथला ने भी 28 अगस्त को एडीजीपी एच. वेंकटेश को अली अकबर के दावों की गहन जांच करने के निर्देश दिए। गृह मंत्री ने कहा कि चूंकि यह मामला कई दशकों से क्राइम ब्रांच की प्राथमिकता सूची में शामिल रहा है, इसलिए विदेश में आरोपी के छिपे होने की हर संभावना की जांच करना आवश्यक है।
बोकारो अस्पताल का बयान और मौत की पुरानी आशंकाएं
इस मामले में मोड़ तब आया जब लगभग तीन महीने पहले लंबे समय से लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान क्राइम ब्रांच ने इस केस की फाइलें फिर से खोली थीं। उस दौरान जांच अधिकारियों का मुख्य अनुमान यह था कि कुरुप शायद अब जीवित नहीं बचा है। इस आशंका के पीछे उसकी दिल की पुरानी बीमारी को एक मुख्य कारण माना गया था। पुरानी पड़ताल में चेंगन्नूर की रहने वाली रत्नम्मा नाम की महिला का बयान भी शामिल था। रत्नम्मा ने दावा किया था कि उन्होंने वर्ष 1989 में झारखंड के बोकारो स्थित एक अस्पताल में सुकुमार कुरुप को देखा था। उनके अनुसार, कुरुप को सीने में तेज दर्द के कारण अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उस समय रत्नम्मा वहां नर्सिंग की छात्रा थीं और उन्होंने कुरुप से बात भी की थी।
42 साल लंबे रहस्य पर बनी हुई है असमंजस की स्थिति
रत्नम्मा के 1989 के बोकारो वाले बयान के आधार पर पुलिस और जांच एजेंसियों ने लंबे समय तक यह मान लिया था कि गंभीर बीमारी के कारण 1989 के बाद किसी समय उसकी मौत हो गई होगी। अगर सुकुमार कुरुप आज जीवित है, तो उसकी वर्तमान आयु लगभग 83 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा, हालिया दावों से पहले तक क्राइम ब्रांच के पास ऐसा कोई ठोस या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि वह अपनी पत्नी या रिश्तेदारों के संपर्क में रहा था। देश के अलग-अलग राज्यों में समय-समय पर कुरुप के देखे जाने की अफवाहें उड़ती रहीं, लेकिन पुलिस कभी उसके वास्तविक ठिकाने तक नहीं पहुंच सकी। अब अली अकबर के ताजा बयानों और तस्वीर ने 42 साल पुराने इस अपराध कथा को एक बार फिर देश की मुख्यधारा की चर्चाओं में ला खड़ा किया है।



















