मुंबई के बीकेसी इलाके में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब सुरक्षा जांच के दौरान एक 24 साल का युवक खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ का अधिकारी बताकर कार्यक्रम स्थल में दाखिल होने की कोशिश करता पकड़ा गया. यह वही जगह है जहां ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना था, इसलिए पूरे इलाके में चाक-चौबंद सुरक्षा तैनात थी. जांच में युवक का पहचान पत्र फर्जी निकला और पुलिस ने उसे उसके बंदूकधारी साथी समेत हिरासत में ले लिया.
मेटल डिटेक्टर की घंटी से खुला राज
पुलिस के मुताबिक सबसे पहले पकड़ में दिलीप कुंडे नाम का शख्स आया था. वह गेट पर लगे डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर से गुजरते हुए सुरक्षा जांच के घेरे में आ गया, क्योंकि मशीन का अलार्म बज उठा. तलाशी में उसके पास से बंदूक बरामद हुई, जिसके बाद गार्ड्स ने उसे तुरंत रोक लिया. इसी दौरान कुंडे ने फोन कर रोहन पारेख को बुलाया, और जब रोहन मौके पर पहुंचा, तो उसने सुरक्षाकर्मियों के सामने अपना पहचान पत्र निकालकर दिखा दिया. यही वह पल था जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया और सुरक्षा एजेंसियों की नजर रोहन के कार्ड पर टिक गई.
कौन है 24 साल का रोहन पारेख
पुलिस जांच में सामने आया कि रोहन पारेख उम्र में 24 साल है और एक बड़े व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखता है. उसने विज्ञान विषय से स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर रखी है. उसके पास जो पहचान पत्र था, उसमें उसे पीएमओ में ग्रेड-सी स्तर का अधिकारी दर्शाया गया था. हालांकि गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की पैनी नजर से यह कार्ड ज्यादा देर तक असली साबित नहीं हो सका, और चंद मिनटों में ही उसकी परतें उधड़नी शुरू हो गईं.
कार्ड में कौन सी गड़बड़ियां पकड़ में आईं
जांच अधिकारियों ने बताया कि कार्ड पर जारी होने की तारीख तो दर्ज थी, मगर उसकी वैधता कब तक है, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं था. साथ ही कार्ड पर एक हस्ताक्षर तो मौजूद था, लेकिन हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी का पद कहीं नहीं लिखा गया था. इतनी सामान्य दिखने वाली, मगर गंभीर चूक ने सुरक्षा टीम का शक और गहरा कर दिया, जिसके बाद उन्होंने बिना देर किए इसकी सूचना पुलिस को दी. फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि आखिर यह कार्ड तैयार किसने किया और यह घूमते-घूमते रोहन तक कैसे पहुंचा.
वीवीआईपी सुरक्षा के बीच क्यों नहीं बची चूक
चूंकि उस दिन प्रधानमंत्री खुद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहने वाले थे, इसलिए हर आने-जाने वाले शख्स की कई स्तर पर जांच हो रही थी. यही वजह रही कि एक साधारण सी लगने वाली खामी, जैसे कार्ड पर वैधता तारीख का न होना, भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर से नहीं बच सकी. वीवीआईपी कार्यक्रमों में इस तरह के दस्तावेज कई परतों में परखे जाते हैं, और इसी सख्त प्रक्रिया की बदौलत रोहन का फर्जीवाड़ा वक्त रहते सामने आ गया.
कोर्ट में वकील ने सुनाई बिल्कुल अलग कहानी
गिरफ्तारी के बाद जब रोहन पारेख को अदालत में पेश किया गया, तो उसके वकील ने पूरी घटना को नए नजरिए से पेश किया. बचाव पक्ष का कहना था कि रोहन ने जानबूझकर किसी को धोखा देने के इरादे से खुद को अधिकारी नहीं बताया, बल्कि उसे खुद यकीन था कि उसे प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी कोई जिम्मेदारी मिली है. वकील के अनुसार तरुण कपूर नाम के किसी शख्स ने रोहन को यह मौका देने की बात कही थी, और महक गुप्ता के हवाले से एक सलाहकार वाली भूमिका देने का प्रस्ताव भी रखा गया था. पुलिस अब इन दोनों नामों की भी पड़ताल कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि असल में इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन है.
बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि रोहन को एक नियुक्ति पत्र, एक पहचान पत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भेजा गया था. इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री के किसी अतिरिक्त सचिव के नाम से एक ईमेल आने का दावा भी वकील ने कोर्ट के सामने रखा.
स्क्रीनशॉट पर भरोसा करना पड़ा भारी
वकील ने कोर्ट को समझाया कि उनके मुवक्किल के हाथ में असली, छपा हुआ आईडी कार्ड कभी आया ही नहीं. उसे बस एक स्क्रीनशॉट भेजा गया था, जिसे उसने सच मान लिया. लगातार आते ऐसे सरकारी दिखने वाले कागजात और मैसेज देखकर रोहन को धीरे-धीरे यह भरोसा हो गया कि वह वाकई पीएमओ से जुड़ चुका है. जांच में सहयोग करते हुए रोहन ने अपने पास मौजूद सारे दस्तावेज और बातचीत के मैसेज पुलिस को सौंप दिए हैं, साथ ही अपने कुछ संपर्कों की जानकारी सत्यापन के लिए पीएमओ को भेजने का दावा भी किया है.
'मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने गया था'
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है. वकील के मुताबिक रोहन उस दिन किसी सरकारी काम से कार्यक्रम स्थल नहीं गया था, बल्कि वह अपनी मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने वहां पहुंचा था. वकील ने यह भी कहा कि रोहन को कमर में तकलीफ रहती है, इसी वजह से वह कुछ देर के लिए परिसर के भीतर रुका था. जब पुलिस ने उससे पूछताछ के लिए संपर्क किया, तो उसने पूरा सहयोग दिया.
11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में रोहन
मुंबई की अदालत ने रोहन पारेख को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह फर्जी पहचान पत्र आखिर किसने तैयार किया और रोहन तक कैसे पहुंचा. साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या रोहन खुद किसी बड़े ठगी रैकेट का शिकार बना है, या फिर वह किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा है. दिलीप कुंडे से भी पूछताछ जारी है ताकि हथियार और उसकी भूमिका को लेकर पूरी तस्वीर साफ हो सके.



















