उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करने के तुरंत बाद अयोध्या का रुख किया और रामलला के दरबार में पहुंचकर दंडवत प्रणाम किया। दक्षिण भारत से सीधे अवध पहुंचने का यह क्रम महज एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दक्षिण से अवध तक की यात्रा का सियासी संदेश
राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकजुटता के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है। तिरुपति के दर्शन के बाद अयोध्या पहुंचना और वहां रामलला की चौखट पर माथा टेकना, भाजपा के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को फिर से मजबूती से सामने रखने की कोशिश बताया जा रहा है। इस मौके पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट यानी राम मंदिर ट्रस्ट के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र मिश्र भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। सामने आए एक वीडियो में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त) को ट्रस्ट के पहले सीईओ के तौर पर मुख्यमंत्री के साथ मंदिर परिसर में मौजूद दिखाया गया है।
मंदिर परिसर में मौजूद रहते हुए मुख्यमंत्री योगी ने राम मंदिर निर्माण समिति और नए सीईओ जितेंद्र मिश्र के साथ बैठकर मंदिर परिसर में चल रहे विकास कार्यों और श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने अफसरों से साफ कहा कि अयोध्या को दुनिया की सबसे भव्य सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रामलला के दरबार से विपक्ष पर निशाना, आंगनबाड़ी सहायिकाओं को तोहफा
भगवान राम के सामने आशीर्वाद लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी ने सीधे विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा, "अयोध्या और प्रदेश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान को रोकने की साजिश करने वाले ताकतों को यूपी की जनता 2027 में करारा जवाब देगी." इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक अहम घोषणा भी की। उन्होंने नई नियुक्त आंगनबाड़ी सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र और साड़ियां बांटीं और साथ ही उनका मासिक मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने का ऐलान कर दिया, जिससे राज्यभर की हजारों महिला कार्यकर्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
अखिलेश यादव का तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री योगी के इस दौरे और बयान पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तुरंत जवाबी हमला बोला। उन्होंने लिखा, "जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं, तब-तब भाजपा को भगवान की याद आने लगती है." अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि पिछले 10 साल की नाकामियों, बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और बिगड़ती कानून-व्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए ही भक्ति का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी विकास, रोजगार और पिछड़ों-दलितों-अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है, जबकि सत्ताधारी पार्टी धर्म के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण करने में जुटी है।
गौरतलब है कि अखिलेश यादव अक्सर जिस PDA शब्द का इस्तेमाल करते हैं, उसका मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक होता है, और यही समाजवादी पार्टी का मौजूदा मुख्य चुनावी फॉर्मूला बन चुका है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि अगर अखिलेश यादव भाजपा के दलित नेता कौशल किशोर को अपने पाले में खींचने में कामयाब हो जाते हैं, तो इसे भाजपा के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जाएगा।
2027 का मुकाबला: हिंदुत्व बनाम PDA
राजनीति के जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी की तिरुपति और अयोध्या यात्रा ने 2027 के चुनावी नैरेटिव की दिशा साफ कर दी है। भाजपा की रणनीति सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, भव्य राम मंदिर, सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था और सनातन वोट बैंक को मजबूत करने के इर्द-गिर्द बुनी जा रही है। दूसरी तरफ, विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी PDA फॉर्मूले, जातीय जनगणना की मांग, महंगाई-बेरोजगारी और सरकार की प्रशासनिक नाकामियों को मुद्दा बनाकर अति-पिछड़ा और दलित वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश में है।
चुनाव आयोग की ओर से अभी तारीखों का औपचारिक ऐलान भी नहीं हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी का आक्रामक रुख और अखिलेश यादव का करारा जवाब इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश 2027 में देश की सबसे बड़ी और दिलचस्प सियासी जंग देखने जा रहा है।


















