उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र की परतावल पुलिस चौकी में उस वक्त सन्नाटा टूट गया जब एक युवती हाथ में लाइसेंसी दोनाली बंदूक थामे सीधे चौकी परिसर में दाखिल हो गई। रोते हुए और बेहद परेशान हालत में युवती अपने परिजनों पर मारपीट का इल्जाम लगाते हुए पुलिस से गुहार लगा रही थी। हथियार देखते ही चौकी में तैनात पुलिसकर्मी फौरन चौकन्ने हो गए।
चौकी में हड़कंप, संयम से संभाला पुलिस ने मोर्चा
मामले की नजाकत भांपते हुए पुलिस ने युवती को घेरकर डराने या दबाव बनाने की बजाय बेहद सूझबूझ से पेश आने का फैसला किया। पहले उसकी पूरी बात धैर्य से सुनी गई, इसके बाद धीरे-धीरे भरोसे में लेकर बंदूक अपने कब्जे में लेने की कोशिश शुरू हुई। काफी देर की समझाइश के बाद आखिरकार पुलिस युवती से लाइसेंसी असलहा लेने में कामयाब रही। एहतियातन डायल 112 की टीम को भी तुरंत घटनास्थल पर बुला लिया गया। इसके बावजूद कुछ देर तक चौकी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और कड़ी मशक्कत के बाद ही पुलिस युवती को शांत करा पाई।
जमीन की रजिस्ट्री पर ठनी बात, मारपीट तक पहुंचा मामला
शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि यह विवाद पारिवारिक है और सीधे जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा है। परिवार में काफी समय से इसी मुद्दे पर तनातनी चल रही थी। हाल ही में इसी बात पर घर में तीखी कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इससे आहत और गुस्से में आई युवती सीधे लाइसेंसी बंदूक उठाकर पुलिस चौकी जा पहुंची। बताया गया कि यह बंदूक मूल रूप से युवती के परदादा के नाम पर लाइसेंस्ड थी, जो बाद में विरासत में मिलने के बाद उसके दादा के नाम दर्ज हो गई। परिवार की बनावट के बारे में यह भी पता चला कि युवती के पिता दो भाइयों में से एक हैं, जबकि परिवार में कुल दो बेटियां हैं।
पुलिस का भरोसा, निष्पक्ष जांच के बाद होगी कार्रवाई
पुलिस ने युवती की शिकायत और उसकी सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तथ्यों के सामने आने पर जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल पुलिस पारिवारिक विवाद की असली वजह, जमीन से जुड़े कागजातों और लाइसेंसी बंदूक की मौजूदा मालिकाना हैसियत जैसे कई पहलुओं की पड़ताल में जुटी है। अभी स्थिति पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि पारिवारिक कलह में किसकी क्या भूमिका रही और आगे कानूनी तौर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।





















