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चुमुकेदिमा में बड़े कचरा उत्पादकों को चेतावनी: नियम मानें या भरें जुर्मानानागालैंड
8 सित॰ 2026, 8:45 pm (46 मिनट पहले)· 2

चुमुकेदिमा में बड़े कचरा उत्पादकों को चेतावनी: नियम मानें या भरें जुर्माना

चुमुकेदिमा के उपायुक्त ने सभी बल्क वेस्ट जेनरेटर्स से कहा है कि वे पंजीकरण कराएं, परिसर में कचरा प्रबंधन का ढांचा लगाएं और गीले कचरे की कंपोस्टिंग शुरू करें, वरना नागालैंड के नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत जुर्माना और बिजली-पानी कनेक्शन कटने का खतरा है।

चुमुकेदिमा में बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों को अब अपनी जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कचरा प्रबंधन सिर्फ सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में हुई एक दिवसीय कार्यशाला में चुमुकेदिमा के उपायुक्त पोलन जॉन ने कहा कि हर पक्षकार, खासकर बल्क वेस्ट जेनरेटर्स (BWG) के तहत आने वाले संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट के समयबद्ध आदेशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का पूरी तरह पालन करना होगा।

बड़े कचरा उत्पादकों के लिए खास कार्यशाला

इस कार्यशाला की अध्यक्षता चुमुकेदिमा की एसडीओ श्रेयंसी जैन ने की। कार्यशाला में उन संस्थानों और प्रतिष्ठानों को बुलाया गया जो रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करते हैं, ताकि टिकाऊ कचरा प्रबंधन के तरीकों पर चर्चा हो सके। उपायुक्त ने इस मौके पर साफ किया कि कचरा उठाना और उसका निपटान करना अकेले सफाई कर्मचारियों का काम नहीं है, बल्कि हर घर, हर संस्था और हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।

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संविधान और सुप्रीम कोर्ट का हवाला

पोलन जॉन ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए बताया कि संविधान का अनुच्छेद 51A(g) हर नागरिक को पर्यावरण की रक्षा करने का मौलिक कर्तव्य सौंपता है, और साफ-सुथरे व स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से ही जुड़ा है। उन्होंने बताया कि संशोधित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों पर लागू होते हैं और हर व्यक्ति व संस्था को तय मानकों के मुताबिक कचरे को अलग करना, स्टोर करना और तय अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य है।

कौन गिना जाएगा बल्क वेस्ट जेनरेटर

उपायुक्त ने बताया कि किसी प्रतिष्ठान का निर्मित क्षेत्रफल करीब 20,000 वर्ग मीटर हो, रोजाना पानी की खपत करीब 40,000 लीटर हो, या रोजाना करीब 100 किलो कचरा निकलता हो, तो इनमें से कोई भी एक शर्त पूरी होने पर वह संस्थान BWG की श्रेणी में आ जाएगा।

पालन के लिए क्या करना होगा

BWG की श्रेणी में आने वाले संस्थानों को अपने परिसर में ही कचरा प्रबंधन का पूरा ढांचा खड़ा करना होगा, कचरे का सही तरीके से निपटान करना होगा, ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा और नियमित रूप से पालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके अलावा उनके परिसर का निरीक्षण भी किया जाएगा ताकि जमीनी हकीकत परखी जा सके।

गीले कचरे की खाद बनाना जरूरी

पोलन जॉन ने खास तौर पर गीले कचरे पर जोर दिया और कहा कि इसका निपटान संस्थानों को अपने ही परिसर में करना होगा, जिसके लिए उपयुक्त कंपोस्टिंग यानी खाद बनाने की सुविधा लगानी होगी। उन्होंने बताया कि इसमें तकनीकी मदद संबंधित विभागों और नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ली जा सकती है।

नियम न मानने पर जुर्माना और कनेक्शन कटने का खतरा

उपायुक्त ने चेतावनी दी कि नियमों का पालन न करने पर "पॉल्यूटर पेज़" यानी प्रदूषक भुगतान करे सिद्धांत के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है, और लगातार नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों की बिजली व पानी की आपूर्ति भी काटी जा सकती है। इस पहल को "पूरी सरकार, पूरे समाज" के दृष्टिकोण वाला बताते हुए पोलन जॉन ने सभी चिन्हित BWG और पक्षकारों से समयबद्ध आदेशों का जल्द से जल्द पालन करने की अपील की।

सवाल-जवाब

यह अपील किसने की?
चुमुकेदिमा के उपायुक्त पोलन जॉन ने बल्क वेस्ट जेनरेटर्स पर हुई कार्यशाला में यह अपील की।
कार्यशाला कब और कहां हुई?
यह मंगलवार को चुमुकेदिमा स्थित उपायुक्त कार्यालय में आयोजित हुई।
कार्यशाला की अध्यक्षता किसने की?
चुमुकेदिमा की एसडीओ श्रेयंसी जैन ने कार्यशाला की अध्यक्षता की।
कौन सा प्रतिष्ठान BWG की श्रेणी में आता है?
जिस प्रतिष्ठान का निर्मित क्षेत्रफल करीब 20,000 वर्ग मीटर, रोजाना पानी की खपत करीब 40,000 लीटर या रोजाना कचरा करीब 100 किलो हो, वह इनमें से किसी एक शर्त के पूरा होने पर भी BWG माना जाएगा।
BWG को क्या करना होगा?
उन्हें अपने परिसर में कचरा प्रबंधन का ढांचा लगाना, कचरे का सही निपटान करना, ऑनलाइन पंजीकरण कराना, पालन रिपोर्ट जमा करना और गीले कचरे के लिए कंपोस्टिंग की सुविधा बनानी होगी, साथ ही निरीक्षण भी होगा।
नियम न मानने पर क्या होगा?
नियम न मानने वाले प्रतिष्ठानों पर 'पॉल्यूटर पेज़' सिद्धांत के तहत जुर्माना लग सकता है, और लगातार नियम तोड़ने पर बिजली-पानी की आपूर्ति भी काटी जा सकती है।
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