खगड़िया में किसानों के लिए सिंचाई को आसान बनाने की तैयारी, ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर पर सरकार दे रही है भारी सब्सिडीअपूर्वा मखीजा का लिप-लॉक वीडियो इंटरनेट पर वायरल, अमीन जैज के साथ रिश्ते को लेकर छिड़ी बहसऐप्पल ने पेश किया अपना पहला मुड़ने वाला फोन आईफोन डुओ, कीमत और फीचर्स की पूरी जानकारीघर के वाई-फाई नेटवर्क पर एआई एजेंट ने छोड़ी अपनी धमक, सुरक्षा खामियों का हुआ बड़ा खुलासाएप्पल वॉच सीरीज 12 और अल्ट्रा 4 में सिरेमिक वापसी के साथ दमदार फीचर्स, जानिए खासियतचिली में ब्याज दरों को लेकर विराम, कमजोर आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच फैसलामीनाक्षी शेषाद्रि ने कथक पर बिखेरा जादू, 'घर मोरे परदेसिया' पर डांस देख फैंस बोले- आज भी बरकरार है वही ग्रेसरूसी विमानों की भारत में होगी एंट्री, दिल्ली में एसजे-100, एमसी-21 और आईएल-114-300 एयरक्राफ्ट पेशएशियन गेम्स से पहले भारतीय कुश्ती को बड़ा झटका, डोप टेस्ट में फेल होने पर स्टार पहलवान दीपक टीम से बाहरफ्रीज से निकाली गई ठंडी दही बिगाड़ सकती है सेहत, जानिए क्या कहती है आयुर्वेद और विज्ञान की राय
राजस्थान के पाली में स्थित है बल्लालेश्वर गणपति, पांच नागों वाले मुकुट और रहस्यमयी प्रतिमा का है पौराणिक इतिहासराजस्थान
9 सित॰ 2026, 11:18 pm (1 घंटे पहले)· 3

राजस्थान के पाली में स्थित है बल्लालेश्वर गणपति, पांच नागों वाले मुकुट और रहस्यमयी प्रतिमा का है पौराणिक इतिहास

पाली के रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित बल्लालेश्वर गणपति मंदिर अपनी प्राचीनता और अनूठी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजनों के साथ भारी भीड़ उमड़ती है।

देशभर में भगवान गणेश के अनगिनत मंदिर और सिद्ध पीठ मौजूद हैं, लेकिन राजस्थान के पाली शहर में स्थापित बल्लालेश्वर गणपति मंदिर का इतिहास बेहद खास और पौराणिक रहस्यों से जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन मार्ग पर लोर्डिया तालाब के पास नागा बाबा की बगेची में स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर भगवान गणेश अपने परम भक्त बल्लाल की कठोर तपस्या से संतुष्ट होकर प्रकट हुए थे। भक्त की अटूट श्रद्धा और तप के कारण ही इस पावन धाम का नाम बल्लालेश्वर गणपति पड़ा, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है।

भक्त बल्लाल की तपस्या और प्राचीन इतिहास

महंत सुरेश गिरी महाराज के अनुसार, यह ऐतिहासिक सिद्ध पीठ सदियों पुराना है और इसका संबंध सीधे पौराणिक काल से है। प्राचीन समय में जब पाली से होकर सिंध प्रांत की व्यापारिक और तीर्थ यात्रा का मार्ग गुजरता था, तब यात्री और साधु-संत इस मंदिर में रुककर बप्पा का आशीर्वाद जरूर लेते थे। मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा को लेकर यह मान्यता है कि इसे किसी अन्य मूर्तिकार ने नहीं, बल्कि स्वयं भक्त बल्लाल ने अपने हाथों से गढ़ा था। कठोर परीक्षा के बाद जब बप्पा ने अपने इस अनन्य भक्त को दर्शन दिए, तब से यह स्थान उनकी भक्ति का अमर प्रतीक बन गया।

ये भी पढ़ें

अद्भुत प्रतिमा और पांच नागों का मुकुट

इस मंदिर में विराजमान गणेश जी की प्रतिमा बेहद अलौकिक और दुर्लभ स्वरूप में है। प्रतिमा पर लाल सिंदूर का लेप सुशोभित है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है। इस मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान गणेश की कमर के चारों ओर एक नाग लिपटा हुआ है और उनके मस्तक पर पांच नागों से सुसज्जित एक अद्भुत मुकुट विराजमान है, जो इसे देश के अन्य गणेश मंदिरों से बिल्कुल अलग बनाता है। साल 2017 में इस प्राचीन मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण करवाया गया था। खास बात यह है कि निर्माण कार्य के दौरान मूल प्राचीन प्रतिमा को बिना जरा भी नुकसान पहुँचाए या अपनी जगह से हटाए नए मंदिर का ढांचा तैयार किया गया, जहाँ आज भगवान शिव का पूरा परिवार और माँ अंबे की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

गणेश चतुर्थी पर विशेष उत्सव और आयोजन

पाली शहर का पूरा माहौल गणेश चतुर्थी के पावन पर्व को लेकर पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका है। वैसे तो इस सिद्ध पीठ पर हर बुधवार को श्रद्धालुओं का मेला जैसा तांता लगा रहता है, लेकिन 14 सितंबर को आने वाले गणेश चतुर्थी पर्व के अवसर पर यहाँ का नजारा देखने लायक होता है। इस महापर्व के बाद प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुँचते हैं। पर्व के मौके पर महिला सत्संग मंडल पाली द्वारा विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार की गई है। इस दौरान मंदिर परिसर में प्रसाद और विशाल महाप्रसादी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें शिरकत करने के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँचेंगे।

सवाल-जवाब

बल्लालेश्वर गणपति मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के पाली शहर में रेलवे स्टेशन मार्ग पर लोर्डिया तालाब के पास नागा बाबा की बगेची में स्थित है।
इस मंदिर का नाम बल्लालेश्वर क्यों पड़ा?
भगवान गणेश अपने परम भक्त बल्लाल की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर यहाँ प्रकट हुए थे, इसलिए उनके नाम पर इस पीठ का नाम बल्लालेश्वर पड़ा।
इस मंदिर की प्रतिमा की क्या मुख्य विशेषता है?
इस प्राचीन प्रतिमा पर लाल सिंदूर का लेप है, कमर में नाग लिपटा हुआ है और मस्तक पर पांच नागों का मुकुट सुशोभित है।
मंदिर का पुनर्निर्माण कब किया गया था?
वर्ष 2017 में इस प्राचीन मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण किया गया था, जिसमें मूल प्रतिमा को बिना हटाए नए मंदिर का निर्माण हुआ।
गणेश चतुर्थी पर मंदिर में क्या विशेष होता है?
गणेश चतुर्थी और उसके बाद प्रतिदिन यहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं तथा महिला सत्संग मंडल द्वारा विशेष आयोजन व महाप्रसादी होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

पाली के इस ऐतिहासिक मंदिर की वास्तुकला और पांच नागों वाले मुकुट की विशेषता धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। 2017 में बिना मूल प्रतिमा को हटाए हुए हुए पुनर्निर्माण का यह अनूठा उदाहरण यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों के सहयोग से विरासत का संरक्षण किया जा सकता है। आगामी गणेश चतुर्थी पर जुटने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से क्षेत्र के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को भी एक नई गति मिलेगी, जिससे धार्मिक पर्यटन के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता रेखांकित होती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·46 मिनट पहले

बल्लालेश्वर गणपति मंदिर में गणेश चतुर्थी पर जुटने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और 2017 के अनूठे पुनर्निर्माण कार्य से स्पष्ट है कि धार्मिक स्थलों पर भारी जनसमूह के प्रबंधन के लिए भीड़ नियंत्रण, मजबूत सुरक्षा तंत्र और आपदा प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल के लिए एक बड़ी चुनौती होता है, जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR