कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक पुराने कानूनी मामले में बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश की एक विशेष अदालत ने उन्हें साल 2018 के मानहानि मुकदमे में पूरी तरह से बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद से ही न्यायिक हलकों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी इस बात की काफी चर्चा हो रही है कि आखिर यह फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है।
कौन हैं न्यायाधीश शुभम वर्मा?
यह फैसला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिला न्यायालय में तैनात अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने सुनाया है। वे विशेष सांसद-विधायक अदालत की अध्यक्षता भी करते हैं। न्यायिक सेवा में उनका सफर 27 फरवरी 2015 को शुरू हुआ था जब उनकी पहली नियुक्ति हुई थी। इसके बाद अपनी सेवाओं के दौरान पदोन्नति पाकर वह 7 जनवरी 2019 को सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) और श्रेणी-एक के अधिकारी बने। उनके सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने की तारीख 31 जुलाई 2048 तय है, यानी उनके पास अभी सेवा के लिए लंबा वक्त बचा है।
शिक्षा और करियर का सफर
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले शुभम वर्मा के पिता का नाम रविंद्र वर्मा है। अपनी शैक्षणिक योग्यता के तहत उन्होंने साल 2007 में स्नातक की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने साल 2010 में कानून की पढ़ाई पूरी करते हुए एलएलबी की डिग्री हासिल की। जज बनने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साल 2021 में एलएलएम की डिग्री भी प्राप्त की। उन्होंने एलएलबी की डिग्री पूरी करने के तुरंत बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी और न्यायिक सेवा में चयनित हो गए थे। अपने अब तक के कार्यकाल में वह बस्ती, मऊ और गाजियाबाद जैसे कई जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
क्या था पूरा मानहानि का मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2018 का है जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेंगलुरु में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने एक भाषण दिया था। उस भाषण में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी की थी और उनका नाम एक पुराने मामले से जोड़ा था। इस बयान के खिलाफ सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष और स्थानीय नेता विजय मिश्रा ने चार अगस्त 2018 को अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत कार्रवाई की मांग की थी। कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत ने पिछले साल 27 नवंबर को समन जारी किया था जिसके बाद राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपनी जमानत कराई थी। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि यह शिकायत केवल राजनीतिक बदले की भावना से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से की गई थी।
फैसले से पहले काफिले के साथ हुई दुर्घटना
इस मामले की सुनवाई के दौरान एक अन्य घटना भी सामने आई। जब राहुल गांधी सुल्तानपुर की अदालत में पेश होने के लिए यात्रा कर रहे थे, तब उनके काफिले में शामिल कुछ वाहन सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। हालांकि इस अप्रत्याशित बाधा के बावजूद वह समय पर अदालत पहुंचे और कानूनी कार्यवाही पूरी हुई, जिसके बाद अदालत ने उनके बयानों को मानहानिकारक प्रकृति का न मानते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी।














