तमिलनाडु के थेनी जिला जेल से हाल ही में हुई कैदियों की बड़ी फरारी के बाद राज्य के जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चाक-चौबंद करने का निर्णय लिया है। इस गंभीर घटना के मद्देनजर राज्य की सभी सेंट्रल और जिला जेलों में आगामी 28 अक्टूबर से हथियारबंद गार्डों की तैनाती की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी चूक को सख्ती से रोका जा सके। जेल और सुधार सेवा के पुलिस महानिदेशक संदीप राय राठौर ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दी है। यह सुरक्षा संबंधी बड़ा फेरबदल 26 अक्टूबर की रात को हुए सनसनीखेज जेल ब्रेक के ठीक बाद सामने आया है, जिसने राज्य की जेलों के सुरक्षा ढांचे पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
इस सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति से निपटने के दौरान नियमों का पालन करने में भारी चूक हुई थी। इसी चूक का फायदा उठाकर कैदी फरार होने में कामयाब रहे। अब जेल अधिकारी पूरे सुरक्षा तंत्र की नए सिरे से गहन समीक्षा कर रहे हैं और इसके आधार पर एक बिल्कुल नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार की जा रही है। अधिकारियों का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि आपातकालीन स्थितियों में भी जेल की अंदरूनी सुरक्षा किसी भी कीमत पर कमजोर न पड़े और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से कड़ाई से पालन किया जाए।
पुलिस महानिदेशक संदीप राय राठौर ने मीडिया को जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि अब जेलों के वॉचटावर पर पूरी तरह से हथियारबंद जवानों की तैनाती की जाएगी। इन जवानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भी कैदी जेल परिसर से भागने की कोशिश करता है, तो उसे देखते ही गोली मार दी जाए। गौरतलब है कि इससे पहले राज्य की अधिकांश जेलों में वॉचटावर पर तैनात रहने वाले गार्डों के पास हथियार नहीं होते थे। इसके अलावा, विभाग इस बात की भी बारीकी से जांच कर रहा है कि सभी जेलों में लगे अलार्म सिस्टम पूरी तरह से ठीक हालत में काम कर रहे हैं या नहीं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत चेतावनी दी जा सके।
घटना के पीछे की वजहों पर रोशनी डालते हुए संदीप राय राठौर ने स्वीकार किया कि थेनी जेल के कर्मचारियों ने जब एक कैदी की तबीयत अचानक बिगड़ने की सूचना पाई, तो उन्होंने पूरी तरह से नेक नीयत के साथ काम किया था। हालांकि, समस्या यह रही कि उस दौरान मुख्य गेट को सुरक्षित रखने के लिए तय किए गए नियमों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया। जेल के कर्मचारियों ने एक साथ तीन मुख्य गेट खोल दिए और स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल की जानकारी मिलने पर वे तुरंत अंदर की तरफ भागे। इस आपाधापी में उन्होंने अंदर की तरफ से गेटों को लॉक करना जरूरी नहीं समझा, जिसके कारण जेल का पूरा रास्ता पूरी तरह से असुरक्षित हो गया और कैदियों को भागने का खुला मौका मिल गया।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि गेटों को समय पर सुरक्षित न करना प्रोटोकॉल का एक बहुत बड़ा और अक्षम्य उल्लंघन था। हालांकि जेल स्टाफ का इरादा केवल एक वास्तविक स्वास्थ्य समस्या से तुरंत निपटने का था, लेकिन उनकी इस जल्दबाजी और लापरवाही के कारण सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से बेपटरी हो गया। कैदियों ने इसी नाज़ुक मौके का पूरा फायदा उठाया, ड्यूटी पर तैनात गार्डों पर अचानक हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया कि आपातकालीन अलर्ट को किस तरह से हैंडल किया जाना चाहिए और संकट के समय भी सुरक्षा चक्र को कैसे बरकरार रखा जाना चाहिए।
भविष्य की रणनीतियों के बारे में बताते हुए विभाग ने घोषणा की है कि सभी सेंट्रल और जिला जेलों में अब हथियारबंद निगरानी और आधुनिक अलार्म सिस्टम की पुख्ता तैयारी की जाएगी। वॉचटावर पर हथियारबंद जवानों की यह तैनाती मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग होगी, क्योंकि अब तक ज्यादातर जेलों में सुरक्षाकर्मी बिना बंदूकों के ही अपनी ड्यूटी निभाते आए हैं। यह महत्वपूर्ण बदलाव 28 अक्टूबर से धरातल पर उतरना शुरू हो जाएगा, जबकि अन्य तकनीकी और ढांचागत बदलाव सुरक्षा ऑडिट और संशोधित प्रक्रियाओं के अंतिम नतीजों पर पूरी तरह से निर्भर करेंगे। पुलिस महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही समीक्षा के दोनों चरण सफलतापूर्वक पूरे हो जाएंगे, वैसे ही अन्य अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को भी कड़ाई से लागू कर दिया जाएगा।





















