जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आज भले ही आपकी फ्लाइट अपने तय समय पर बिना किसी बाधा के रवाना हो गई हो, लेकिन नीचे टर्मिनल से लेकर एयरसाइड तक भारी अफरा-तफरी का माहौल था। इस खलबली की वजह एक ऐसा संकट था, जिसने तमाम सुरक्षा एजेंसियों को पसीना ला दिया था। इस दौरान सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि इस स्थिति की भनक किसी भी यात्री को न लगे और विमानों की आवाजाही पर कोई असर न पड़े।
इसी वजह से जयपुर एयरपोर्ट की सभी एजेंसियों को दो अलग-अलग टीमों में विभाजित किया गया था। पहली टीम का मुख्य दायित्व फ्लाइट ऑपरेशन को पूरी तरह सुचारू बनाए रखना था, जबकि दूसरी टीम को अचानक पैदा हुए इस खतरे से निपटने का जिम्मा सौंपा गया था। इस संकट से निपटने के लिए तैनात की गई इकाइयों में सीआईएसएफ, इंटेलिजेंस ब्यूरो, राजस्थान पुलिस, एटीएस, इमिग्रेशन ब्यूरो, घरेलू फायर टेंडर और तमाम एयरलाइंस की सुरक्षा टीमें शामिल थीं। इसके अलावा इस आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष रूप से डॉग स्क्वॉड और थ्रेट कंटेनमेंट व्हीकल को भी मौके पर तैनात किया गया था।
टर्मिनल के बाथरूम में बम मिलने का था संदेश
एयरपोर्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर की दोपहर करीब 2:30 बजे एयरपोर्ट कंट्रोल रूम को एक संदेश मिला कि टर्मिनल वन के एक टॉयलेट में बम रखा हुआ है। सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पर तत्काल बम थ्रेट असेसमेंट कमेटी के सभी हितधारकों की एक आपात बैठक बुलाई गई। इसके तुरंत बाद, जिस शौचालय में बम होने की खबर थी, उसे पूरी तरह से घेर लिया गया। सभी यात्रियों को उस क्षेत्र से दूर कर दिया गया और उनके आने-जाने के मार्ग में भी मामूली बदलाव किए गए ताकि कोई भी उस बाथरूम के नजदीक न पहुंच सके।
इस बीच सभी सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी तय भूमिका के अनुसार मोर्चा संभाल लिया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब 4:30 बजे इस कथित बम को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया और स्थिति पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था परखने के लिए किया गया था वास्तविक अभ्यास
जयपुर एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टर्मिनल वन में मची यह हलचल असल में एक मॉक ड्रिल का हिस्सा थी। इस बार इस अभ्यास के दौरान बिल्कुल वास्तविक खतरे जैसी परिस्थितियां जानबूझकर पैदा की गई थीं। इसका मुख्य उद्देश्य सभी सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तैयारियों का बारीकी से जायजा लेना था। इसके साथ ही यह भी परखना था कि किसी असली खतरे की स्थिति में सुरक्षा बल अन्य विभागों और विमानन कंपनियों के साथ कितना बेहतर तालमेल बिठा पाते हैं और किसी चुनौती का कितनी तेजी से सामना कर सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि इस मॉक ड्रिल के दौरान सभी एजेंसियों का रिस्पॉन्स टाइम और उनकी मुस्तैदी पूरी तरह संतोषजनक पाई गई।



















