देश के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) से जुड़े एक प्रमुख लड़ाकू विमान कार्यक्रम में कार्यरत एक वरिष्ठ वैज्ञानिक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बेंगलुरु की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) में सेवारत 47 वर्षीय शरद कटियार का जीवन एक दुखद हादसे में समाप्त हो गया, जब वह सीगेहल्ली स्थित एक आवासीय इमारत से नीचे गिर गए। इस घटना के बाद से वैज्ञानिक समुदाय और मृतक के परिजनों में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है, क्योंकि परिवार ने सीधे तौर पर पेशेवर मोर्चे पर मिल रहे मानसिक दबाव को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
शाम के वक्त हुआ हादसा और अस्पताल में हुई पुष्टि
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना 21 अक्टूबर को शाम करीब 7:30 बजे से 8 बजे के बीच हुई। शरद कटियार बेंगलुरु के सीगेहल्ली इलाके में अपने परिवार के साथ निवास करते थे। घटना के दिन वह अपनी आवासीय इमारत की चौथी और पांचवीं मंजिल के बीच स्थित सीढ़ियों के पास पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि उन्होंने वहां बनी खिड़की से छलांग लगा दी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आईं। परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों के गंभीर आरोप और इलाज का दावा
मृतक के परिजनों ने पुलिस के समक्ष दिए गए बयानों में दावा किया है कि शरद कटियार पिछले एक महीने से अधिक समय से भारी कार्यभार के कारण गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। परिवार के अनुसार, वह इस समस्या के समाधान के लिए एक निजी अस्पताल में अपना इलाज भी करा रहे थे, जहां डॉक्टरों ने उनमें डिप्रेशन यानी अवसाद के लक्षण पहचाने थे। परिजनों का यह भी आरोप है कि लगातार उपचार और दवाओं के बावजूद उनके ऊपर काम का बोझ कम नहीं हो रहा था। घटना वाले दिन ही वह राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) भी गए थे, जहां से उन्हें चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयां दी गई थीं। हालांकि, इन पारिवारिक दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी में शरद कटियार की भूमिका बेहद अहम थी। वह बेंगलुरु स्थित एडीए के प्रोग्रामिंग विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर कार्य कर रहे थे। इसके अलावा, वह देश के बहुप्रचारित हल्के लड़ाकू विमान (LCA) MK2 कार्यक्रम से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। इस पूरे मामले पर एडीए के प्रशासन एवं मानव संसाधन निदेशक कृष्ण राजेंद्र ने प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि संस्थान को शरद कटियार की किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उनके सहकर्मियों ने भी ऐसी किसी भी समस्या के बारे में अनभिज्ञता जताई है। प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एजेंसी समय-समय पर जागरूकता और तनाव मुक्ति कार्यक्रम आयोजित करती रहती है।
पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया
परिवार की ओर से दिए गए बयानों और शिकायतों को आधार बनाते हुए स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु (UDR) की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने मृतक की पत्नी के साथ-साथ उनके माता-पिता के भी विस्तृत बयान दर्ज कर लिए हैं। जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात की पड़ताल करना है कि आखिर किन परिस्थितियों के चलते यह दर्दनाक कदम उठाया गया। पुलिस का यह भी कहना है कि फिलहाल काम के दबाव और मौत के बीच सीधे तौर पर कोई पुख्ता कानूनी या वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं हुआ है। मामले की संपूर्ण जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम के वास्तविक कारणों पर से पर्दा उठ सकेगा और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।



















