राजस्थान के विभिन्न जिलों में साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी क्रम में उदयपुर की सुखेर थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से अवैध ऑनलाइन लेनदेन करने वाले एक सक्रिय साइबर नेटवर्क का पूरी तरह से पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने शहर के कविता क्षेत्र में स्थित एक विला पर अचानक दबिश दी और गुजरात से ताल्लुक रखने वाले चार आरोपियों को मौके से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और जुए से जुड़े बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन को अंजाम देने के लिए अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों का अवैध रूप से इस्तेमाल कर रहे थे। इस गैरकानूनी धंधे को चलाने के लिए वे समाज के सीधे-साधे और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे।
कमीशन का लालच देकर फंसाते थे गरीब और भोले-भाले लोग
इस पूरे सिंडिकेट का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी उन लोगों को खास तौर पर अपना निशाना बनाते थे जिन्हें पैसों की तत्काल जरूरत होती थी। इन जरूरतमंद और गरीब लोगों को बैंक खाते इस्तेमाल करने के एवज में आकर्षक कमीशन का लालच दिया जाता था। खाताधारक इस बात से अनजान होते थे कि उनके खातों का इस्तेमाल देश भर में हो रहे साइबर अपराधों और अवैध धन के हेरफेर के लिए किया जा रहा है। इन खातों के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की भारी-भरकम रकम का फेरबदल किया जाता था, जिससे असली अपराधियों तक जांच एजेंसियों की पहुंच को घुमाया जा सके। साइबर अपराध की दुनिया में इस तरह के खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में जाना जाता है। इन खातों के माध्यम से जब करोड़ों का लेनदेन होता है, तो असली लाभार्थियों और इस पूरे षड्यंत्र में शामिल मास्टरमाइंड की पहचान करना जांच अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज बरामद
पुलिस टीम ने जब कविता क्षेत्र के उस विला पर छापा मारा, तो वहां से अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला भारी मात्रा में सामान बरामद हुआ। तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन अत्याधुनिक लैपटॉप, 19 एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 19 एटीएम कार्ड, 19 बैंक पासबुक और पांच चेकबुक अपने कब्जे में ले लीं। इन सभी उपकरणों और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि इन खातों के जरिए अब तक कुल कितनी धनराशि का अवैध लेनदेन किया जा चुका है। पकड़े गए सभी चारों आरोपियों की पहचान गुजरात के रहने वाले संगथा भाई, किरण कुमार, हितेश कुमार और पवन दर्जी के रूप में हुई है। पुलिस अब इन सभी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह जानकारी जुटाई जा सके कि इस नेटवर्क के तार गुजरात के अलावा देश के अन्य किन हिस्सों से जुड़े हुए हैं और वे अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं।
देश के कई राज्यों में दर्ज हैं साइबर ठगी से जुड़े मुकदमे
जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य यह भी लगा है कि जिन बैंक खातों को इस विला से जब्त किया गया है, उनसे जुड़े साइबर अपराधों की शिकायतें भारत के कई अन्य राज्यों में भी दर्ज हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि यह कोई छोटा-माोटा स्थानीय गिरोह नहीं बल्कि एक अंतरराज्यीय नेटवर्क है, जिसका जाल देश के कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है। पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित संगीन धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से शुरू कर दी है। अब पुलिस जब्द किए गए मोबाइल फोन्स, लैपटॉप्स और अन्य बैंकिंग दस्तावेजों का तकनीकी विश्लेषण करवा रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सहयोगियों को भी जल्द से जल्द बेनकाब किया जा सके और इस अवैध कारोबार के हर एक पहलू से पर्दा उठाया जा सके।



















