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उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच पर रखा ब्योरा, 88 दिनों में दायर हुआ था 500 पन्नों का आरोपपत्रअपराध
15 अक्तू॰ 2026, 8:10 pm (22 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच पर रखा ब्योरा, 88 दिनों में दायर हुआ था 500 पन्नों का आरोपपत्र

अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन ने अंकिता भंडारी मामले की न्यायिक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि विशेष जांच दल ने गहन सबूत जुटाकर तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलवाई है।

ऋषिकेश के समीप वनंतरा रिजॉर्ट में वर्ष 2022 के दौरान हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पुलिस प्रशासन ने संपूर्ण जांच और कानूनी प्रक्रिया की वस्तुस्थिति स्पष्ट की है। देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने पूरे मामले का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने रेखांकित किया कि वारदात उजागर होते ही पुलिस तंत्र ने त्वरित सक्रियता दिखाई और विभिन्न इकाइयों के तालमेल की बदौलत महकमे ने चौबीस घंटों के भीतर ही तीनों नामजद आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था।

जांच के लिए तुरंत बनी थी विशेष जांच टीम

मामले की अत्यंत गंभीर और संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद तुरंत एसआईटी यानी विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इस जांच दल की कमान डीआईजी स्तर की एक महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई, ताकि समूची पड़ताल को पूरी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और गहराई के साथ आगे बढ़ाया जा सके। इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसी भी पहलू को अनसुलझा न छोड़ना और कानूनी रूप से मजबूत साक्ष्य जुटाना था।

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डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ 500 पृष्ठों का आरोपपत्र

विशेष जांच दल ने अपनी पड़ताल के दौरान तकनीकी, डिजिटल, भौतिक और फॉरेंसिक सबूतों को बेहद बारीकी से एकत्र किया। आरोपियों से की गई सिलसिलेवार पूछताछ के अतिरिक्त विशेषज्ञों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों के बयानों का गहन कानूनी विश्लेषण किया गया। साक्ष्यों की इस पूरी कतार को व्यवस्थित करते हुए एसआईटी ने अट्ठासी दिनों के भीतर अपनी जांच प्रक्रिया पूरी कर ली और संबंधित अदालत में लगभग 500 पृष्ठों का एक विस्तृत और पुख्ता आरोपपत्र दाखिल किया।

अदालत का अंतिम फैसला और दोषियों को उम्रकैद

उत्तराखंड प्रशासन ने अदालत में त्वरित सुनवाई और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कानूनी पैरवी की। एसआईटी द्वारा पेश किए गए ठोस वैज्ञानिक व दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने तीनों आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या व संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। वर्तमान में ये तीनों दोषी जेल की सलाखों के पीछे अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

सवाल-जवाब

अंकिता भंडारी मामले में पुलिस ने आरोपियों को कितने समय में गिरफ्तार किया था?
मामला सामने आने के 24 घंटे के भीतर उत्तराखंड पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
एसआईटी का गठन किसके निर्देश पर किया गया था?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी।
अदालत में कितने पृष्ठों का आरोपपत्र और कितने दिनों में दाखिल किया गया?
विशेष जांच दल ने 88 दिनों में जांच पूरी कर अदालत में लगभग 500 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया था।
कोटद्वार अदालत ने आरोपियों को क्या सजा सुनाई है?
30 मई 2025 को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोटद्वार ने तीनों दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।
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