नशीले पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ चल रही कार्रवाई में सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्कर सलीम इस्माइल डोला को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। सलीम डोला अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से जुड़ा रहा है और उस पर वर्ष 2022 में गुजरात के वडोदरा जिले में पकड़ी गई 438.64 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन ड्रग्स की अवैध फैक्ट्री के संचालन में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। उसे तुर्किये से भारत डिपोर्ट किए जाने के बाद अब गुजरात एटीएस ने 31 अक्टूबर को अपनी हिरासत में लेकर यह गिरफ्तारी दर्ज की है।
वडोदरा की अवैध फैक्ट्री और 438 करोड़ का नशीला कारोबार
इस पूरे मामले की शुरुआत 1 दिसंबर 2022 को हुई थी, जब गुजरात एटीएस की टीम ने वडोदरा जिले के सिंधरोत गांव के नजदीक स्थित एक सुनसान फैक्ट्री परिसर पर छापा मारा था। उस तलाशी अभियान के दौरान जांच दल ने 87.728 किलोग्राम तैयार मेफेड्रोन जब्त की थी। अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इस प्रतिबंधित खेप का कुल मूल्य लगभग 438.64 करोड़ रुपये आंका गया था। इस मामले की शुरुआती जांच के बाद एटीएस अब तक 10 अन्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ा, इस पूरे कारखाने और सप्लाई चेन के पीछे सलीम डोला का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया।
सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल से साफ हुआ कि सलीम डोला भारत की सीमा से बाहर बैठकर विदेश से इस पूरे रैकेट की कमान संभाल रहा था। उसका काम सिर्फ तैयार ड्रग्स का सौदा करना या उसे बेचना भर नहीं था। वह इस अवैध लैब में मेफेड्रोन तैयार करने के लिए जरूरी केमिकल की खेप का इंतजाम भी कराता था। कच्चा माल जुटाने, सिंथेटिक नशीला पदार्थ तैयार कराने और फिर बाजार में उसकी थोक बिक्री की योजना बनाने तक, पूरी कड़ी में उसकी सीधी दखलअंदाजी रहती थी।
वैध शिपिंग कंटेनरों और शेल कंपनियों का नेटवर्क
पूछताछ और तकनीकी पड़ताल के दौरान तस्कर गिरोह की कार्यप्रणाली का भी खुलासा हुआ है। यह सिंडिकेट पकड़े जाने से बचने के लिए वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक शिपमेंट्स का सहारा लेता था। सामान्य व्यापार के तहत विदेश भेजे जाने वाले भारी मालवाहक कंटेनरों में गुप्त जगह बनाकर नशीली दवाइयों की खेप छिपाई जाती थी। जिन देशों में यह माल भेजा जाना होता था, वहां कागजों पर फर्जी कंपनियां खड़ी की जाती थीं। इन छद्म कंपनियों के जरिए ही आयात का कानूनी आवरण तैयार कर अंतरराष्ट्रीय तस्करी के पूरे संजाल को चलाया जाता था।
सिंधरोत गांव की प्रयोगशाला में जो मेफेड्रोन तैयार होती थी, उसे सबसे पहले सड़क मार्ग से मुंबई पहुंचाया जाता था। मुंबई में सलीम डोला के स्थानीय गुर्गे और सहयोगी इस खेप को अपने कब्जे में लेते थे। इसके बाद समुद्री या हवाई कंटेनरों के माध्यम से इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सप्लाई कर दिया जाता था। अब जांच दल उससे केमिकल हासिल करने के असल स्रोतों, हवाला या बैंकिंग चैनलों से हुए वित्तीय लेन-देन, समुद्री मार्गों और सिंडिकेट में शामिल दूसरे अज्ञात लोगों के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रहा है।
फरारी का सफर: मुंबई, दुबई, केन्या से तुर्किये तक
सलिम डोला कई वर्षों से भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की रडार पर था। कानूनी शिकंजा कसने के बाद वह मुंबई छोड़कर भाग गया था। शुरुआत में वह दुबई में छिपा रहा और उसके बाद केन्या सहित कई अन्य देशों में अपने ठिकाने बदलता रहा। लगातार ठिकाना बदलने के कारण भारतीय एजेंसियों ने वैश्विक स्तर पर उसका पीछा शुरू किया। भारत के आधिकारिक अनुरोध पर अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने मार्च 2024 में उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था।
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर तुर्किये की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद अप्रैल 2026 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की विशेष टीम उसे प्रत्यर्पित करवाकर तुर्किये से सुरक्षित भारत लेकर आई। कई महीनों की कागजी और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद आखिरकार 31 अक्टूबर को गुजरात एटीएस ने उसे अपनी जांच में शामिल करते हुए औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया।
इकबाल मिर्ची का दौर और दशकों पुराना आपराधिक इतिहास
नारकोटिक्स की दुनिया में सलीम डोला का रिकॉर्ड दशकों पुराना है। 1990 के दशक में उसने कुख्यात तस्कर इकबाल मिर्ची के गिरोह के साथ मिलकर काम करना शुरू किया था। मिर्ची के संपर्क में रहकर उसने इस काले कारोबार के तमाम गुर सीखे और बाद में अपने निजी सहयोगियों को जोड़कर एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा कर लिया। देश के अलग-अलग राज्यों में उसके खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े करीब एक दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1998 में मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसे करीब 40 किलोग्राम मैंड्रेक्स की खेप के साथ पहली बार पकड़ा गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में भी सुरक्षा बलों ने उसे लगभग 79 किलोग्राम चरस की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। साल 2018 में लगभग 1,000 करोड़ रुपये मूल्य की फेंटानिल ड्रग्स की बरामदगी के सनसनीखेज मामले में भी उसकी भूमिका जांच के दायरे में आई थी। लंबे समय से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और मुंबई पुलिस की टीमें अलग-अलग मुकदमों में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करती रही हैं।



















