देशभर में अवैध तस्करी और उससे जुड़े काले धन के नेटवर्क पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की नजर लगातार बनी हुई है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल से जुड़े चर्चित अवैध वसूली और तस्करी के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। इस पूरेक्रम में अब कुछ जीएसटी और सीजीएसटी अधिकारियों की संलिप्तता भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी का गुवाहाटी जोनल कार्यालय इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर एक तार को बारीकी से खंगालने में जुटा हुआ है।
पंद्रह सौ करोड़ रुपये से अधिक का तस्करी नेटवर्क
जांच से जुड़े शुरुआती ब्यौरे के अनुसार, कुछ समय पहले प्रवर्तन निदेशालय ने धीरज घोष, बिनॉय बर्मन, संदीप बैद और कारोबारी नवरतन बैद समेत कई अन्य नामजद लोगों से जुड़े लगभग सोलह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया था। इन छापों के दौरान हाथ लगे महत्वपूर्ण डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर ही एजेंसी ने अपनी जांच की गति को और तेज कर दिया है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध रूप से अर्जित यह भारी-भरकम राशि किन-किन खातों से होकर गुजरी और इसका अंतिम इस्तेमाल कहां किया गया।
म्यांमार से देश के कई राज्यों तक फैलता था कारोबार
यह पूरा मामला मुख्य रूप से विदेशी सुपारी की अवैध तस्करी के एक बड़े गिरोह से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय एजेंसी द्वारा हाल ही में किए गए खुलासे के मुताबिक, म्यांमार के रास्ते विदेशी सुपारी की बड़ी खेप अवैध रूप से मिजोरम लाई जाती थी। इसके बाद इस खेप को पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और देश के अन्य बड़े राज्यों में सुनियोजित तरीके से खपाया जाता था। इस अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय तस्करी के सिलसिले में अब तक ग्यारह से ज्यादा आधिकारिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच के दौरान इंडोनेशिया, थाईलैंड और म्यांमार से जुड़े कई गुप्त सप्लाई रूटों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे चलता था पूरा कारोबार
अवैध रूप से देश में लाई गई विदेशी सुपारी को बाजार में वैध दिखाने के लिए तस्करों का यह सिंडिकेट पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। इस खेल को अंजाम देने के लिए नकली इनवॉइस, जाली ई-वे बिल और फर्जी ट्रांजिट दस्तावेजों का धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता था। शुरुआती जांच में सीमा शुल्क विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता के संकेत मिलने के बाद, अब जांच का दायरा केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर यानी सीजीएसटी और राज्य जीएसटी के अधिकारियों तक भी पहुंच गया है।
राजनीतिक गलियारों में भी गूंजा था वसूली का मामला
पश्चिम बंगाल में अवैध वसूली को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी समय-समय पर काफी गर्मागर्म बहस देखने को मिली है। इससे पहले पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुकांत मजूमदार ने इस प्रकार की अवैध वसूली और प्रशासनिक संरक्षण को लेकर पिछली राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब केंद्रीय एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तस्करों से वसूली गई इस बेहिसाब रकम और सुपारी तस्करी के काले कारोबार के बीच क्या कोई सीधा वित्तीय संबंध था या नहीं।


















