किसी फिल्मी कहानी की तरह एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ नौकरी का झांसा देकर एक व्यक्ति को कतर बुलाया गया और वहां पहुंचते ही उससे करोड़ों की डकैती को अंजाम दिलवाया गया। यह सनसनीखेज वारदात दोहा के अल थुमामा इलाके में स्थित केरल मुस्लिम सांस्कृतिक केंद्र के दफ्तर में हुई थी। इस हाई-प्रोफाइल चोरी में इकतालीस लाख कतरी रियाल की रकम उड़ाई गई थी जो भारतीय मुद्रा में करीब आठ करोड़ रुपये बैठती है। घटना के ठीक एक साल बाद इस गिरोह के प्रमुख साजिशकर्ताओं में गिने जाने वाले परापिल बालकृष्णन ने कोयिलैंडी थाने पहुंचकर पुलिस के सामने खुद को सरेंडर कर दिया है।
गैस कटर से तिजोरी काटकर करोड़ों की लूट
यह पूरी घटना अठारह सितंबर दो हजार पच्चीस को अंजाम दी गई थी जिसके लिए पूरी तैयारी की गई थी। केरल से विशेष उड़ानों के जरिए चार लोगों को कतर बुलाया गया था और वहां उतरते ही उन्हें बड़े अपराध में झोंक दिया गया। आरोपियों ने सबसे पहले केएमसीसी दफ्तर के अंदर मौजूद रूम बॉय को बंधक बनाया और फिर गैस कटर की मदद से भारी-भरकम तिजोरी के ताले को काटकर पूरी नकदी समेट ली। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि लूटी गई यह भारी-भरकम रकम खाड़ी देशों में रहने वाले केरल के प्रवासियों के कल्याण कार्यों के लिए जमा की गई थी। इस बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी परापिल बालकृष्णन वापस केरल भाग आया था जबकि उसके अन्य साथी शाजी, असैनार और राशी पय्योली अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
नौकरी का छलावा और राजनीति की एंट्री
पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद सामने आए एक वीडियो में परापिल बालकृष्णन ने अजीबोगरीब दावा किया है। उसने सफाई दी है कि उसे विदेश में वेल्डिंग के काम का लालच देकर बुलाया गया था और उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसका इस्तेमाल गैस कटर से तिजोरी काटने के लिए किया जाएगा। इस मामले में राजनीतिक रंग जुड़ने के बाद यह विवाद और गहरा गया है क्योंकि आरोपी परापिल बालकृष्णन स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी रह चुका है। इस खुलासे के बाद से स्थानीय राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की जोरदार मांग उठाई है।
देरी से शिकायत और अंदरूनी मिलीभगत की आशंका
इस पूरे मामले का एक और रहस्य यह है कि इतनी बड़ी डकैती होने के बावजूद संगठन की तरफ से तुरंत कोई आधिकारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। जब इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठने लगे और मीडिया में किरकिरी होने लगी तब जाकर इस साल पंद्रह सितंबर को केएमसीसी के कतर उपाध्यक्ष पी. के. अब्दुल रहीम ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। अब जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी बारीकी से काम कर रही हैं कि क्या इस गुप्त ऑपरेशन के पीछे दफ्तर के ही किसी अंदरूनी व्यक्ति का हाथ था जिसने डकैतों को अंदरूनी जानकारियां मुहैया कराई थीं।



















