मेवाड़ के विख्यात धार्मिक केंद्र श्री सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की श्रद्धा के कई अनूठे रंग लगातार सामने आते रहते हैं। आम तौर पर रसोई में बनने वाली दाल, सब्जी अथवा चटनी के स्वाद और थाली की सजावट के लिए काम आने वाला हरा धनिया हर परिवार के दैनिक खान-पान का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है। इसी सामान्य सी दिखने वाली रसोई की वस्तु को एक श्रद्धालु ने बेहद विशेष स्वरूप देकर भगवान श्री सांवलिया सेठ के श्रीचरणों में समर्पित कर दिया। इस श्रद्धालु ने 150 ग्राम चांदी की सहायता से विशेष तौर पर धनिये की आकृति का निर्माण करवाया और उसे कृष्ण धाम में भेंट स्वरूप अर्पित किया। यह अनोखी भेंट सामने आते ही पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई।
भक्तों की अटूट आस्था और अनोखे चढ़ावे की परंपरा
चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित श्री सांवलिया सेठ के पावन धाम पर देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य, मनोकामना और निष्ठा के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के चढ़ावे लाते हैं। कई भक्त अपनी मन्नत पूरी होने के बाद सोने और चांदी के आभूषण अर्पित करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु अपनी आजीविका, व्यवसाय अथवा निजी जीवन से जुड़ी विशेष वस्तुओं की प्रतिकृतियां तैयार करवाकर भगवान के आगे नतमस्तक होते हैं। इस बार 150 ग्राम चांदी से गढ़ा गया यह धनिया अपनी मौलिक बनावट और कल्पनाशीलता के कारण हर आने-जाने वाले दर्शनार्थी के बीच कौतूहल जगा रहा है।
सीमेंट फैक्ट्री के मॉडल से लेकर चांदी के धनिये तक की भेंट
सांवलिया जी के पावन परिसर में दैनिक उपयोग की वस्तुओं और कार्यक्षेत्र के प्रतीकों को चांदी के सांचे में ढालकर भेंट करने की एक पुरानी और अनूठी परंपरा चली आ रही है। पूर्व में भी कई श्रद्धालुओं ने भगवान के दरबार में आश्चर्यचकित कर देने वाले शिल्प अर्पित किए हैं। इस 150 ग्राम चांदी के धनिये से कुछ ही समय पहले एक अन्य भक्त ने चांदी की धातु से निर्मित सीमेंट फैक्ट्री का एक संपूर्ण मॉडल तैयार करवाकर भगवान सांवलिया सेठ को भेंट किया था। ऐसे कई मॉडल, पारंपरिक धार्मिक प्रतीक और विशेष आकृतियां यहां आने वाले श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाती हैं।
मेवाड़ के कृष्ण धाम में रोज उमड़ता है श्रद्धालुओं का तांता
भगवान सांवलिया सेठ के प्रति लोगों का जुड़ाव केवल पारंपरिक पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी हर सफलता और दैनिक जीवन के हर हिस्से को वे प्रभु के साथ साझा करते हैं। इस प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिदिन हजारों की तादाद में श्रद्धालु शीश नवाने और नई मन्नतें मांगने के लिए पहुंचते हैं। अपनी हैसियत और भाव के अनुरूप भगवान को अनूठे उपहार सौंपना भक्तों के इसी असीम समर्पण का प्रतीक है, जिसमें 150 ग्राम चांदी का यह धनिया भी एक नई कड़ी के रूप में शामिल हो गया है।

















