त्योहारों, घरेलू कार्यक्रमों या मेहमानों के आने पर अक्सर रसोई में पूरी, पकौड़े, कचौरी और समोसे जैसे तले हुए पकवान तैयार किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों के बाद कड़ाही में अक्सर काफी मात्रा में खाद्य तेल शेष रह जाता है। कई घरों में जानकारी के अभाव में लोग इस बचे हुए तेल को पूरी तरह बेकार समझकर फेंक देते हैं, जिससे आर्थिक बर्बादी होती है। वहीं दूसरी तरफ, कई लोग उसी तेल को बार-बार तेज आंच पर खौलाकर इस्तेमाल करते रहते हैं। स्वास्थ्य के नजरिए से ऐसा बार-बार करना शरीर के लिए अत्यंत नुकसानदेह साबित हो सकता है। यदि तेल की मूल गुणवत्ता ठीक बनी हुई है, तो कुछ खास सावधानियों और वैज्ञानिक तरीकों का पालन करके इसका सीमित मात्रा में सुरक्षित उपयोग किया जा सकता है।
तेल को ठंडा करना और छानने की सही विधि
लाली देवी के अनुसार, तलने के काम के बाद बचे हुए तेल को सुरक्षित ढंग से दोबारा रसोई में काम में लेने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि कड़ाही में मौजूद गर्म तेल को पहले अपने आप पूरी तरह से ठंडा होने दिया जाए। जब तेल खौल रहा हो या अत्यधिक गर्म हो, तब उसे कभी भी छानने की जल्दबाजी न करें, क्योंकि इससे त्वचा जलने या गंभीर दुर्घटना होने का बड़ा जोखिम रहता है।
जब तेल सामान्य तापमान पर आ जाए, तब एक बहुत बारीक छलनी या किसी साफ, सूखे सूती कपड़े की मदद से उसे सावधानीपूर्वक छान लें। इस प्रक्रिया से तलने के दौरान तेल में छूटे हुए भोजन के छोटे-छोटे जले हुए टुकड़े, तलछट और मसालों के बारीक कण पूरी तरह अलग हो जाते हैं। अगर ये जले हुए कण तेल में रह जाएं, तो वे तेल को जल्दी सड़ा देते हैं। अच्छी तरह छानने के उपरांत इस तेल को नमी से दूर एक बिल्कुल साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में सुरक्षित भरकर रख लेना चाहिए।
रंग, गंध की परख और उपयोग के नियम
छानने के बाद तेल का इस्तेमाल करने से पहले उसके भौतिक रूप की जांच करना जरूरी है। यदि तेल का रंग और उसकी गंध सामान्य महसूस हो रही है और तलने के दौरान उसे अत्यधिक उच्च तापमान पर बहुत देर तक नहीं जलाया गया है, तो उसका सीमित उपयोग सुरक्षित माना जाता है। ऐसे तेल को रोजाना की साधारण सब्जियों में तड़का लगाने, दाल छौंकने या हल्का भूनने वाले सामान्य पकवान बनाने के काम में लिया जा सकता है।
इसके साथ ही कुछ विशेष खाद्य सामग्रियों का ध्यान रखना भी जरूरी है। जिस तेल में मछली या अत्यधिक तीखे व तेज महक वाले मसालेदार व्यंजन तले गए हों, उसे सामान्य दाल या सब्जियों में इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि उस तेल में मछली या तीखे मसालों का कड़वा स्वाद और तीखी महक रच-बस जाती है, जिससे दूसरे सामान्य पकवानों का मूल स्वाद और सुगंध पूरी तरह बिगड़ जाते हैं।
बार-बार गर्म करने के गंभीर खतरे
एक बार इस्तेमाल हो चुके तेल को बार-बार कड़ाही में डालकर तेज आंच पर गर्म करना सेहत के लिए सबसे अधिक खतरनाक माना गया है। जब तेल को उच्च तापमान पर बार-बार खौलाया जाता है, तो उसकी आणविक संरचना टूटने लगती है और उसमें कई तरह के जहरीले व हानिकारक रासायनिक तत्व बनने लगते हैं। ये तत्व पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कई गंभीर शारीरिक समस्याओं की वजह बन सकते हैं। इसलिए एक बार तलने में इस्तेमाल हुए तेल को फिर से गहरे तलने के लिए बार-बार गर्म करने की आदत से हर हाल में बचना चाहिए।
खराब तेल के लक्षण और सुरक्षित निस्तारण
यदि कड़ाही में बचे हुए तेल का रंग अत्यधिक गहरा या काला पड़ चुका हो, गर्म करने पर उसमें असामान्य झाग बन रहे हों, उसमें अत्यधिक चिपचिपापन आ गया हो या फिर उसमें से जलने जैसी तीखी और असहज दुर्गंध आ रही हो, तो ऐसे तेल का किसी भी रूप में दोबारा उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इस प्रकार का पूरी तरह खराब हो चुका तेल भोजन में इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर सीधा और जानलेवा दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, उपयोग के अयोग्य हो चुके खराब तेल को सीधे घरेलू नाली या सिंक में बहाने की गलती भी कभी नहीं करनी चाहिए। नाली में तेल डालने से वह पाइपों के भीतर जमकर कचरे को जकड़ लेता है, जिससे नालियां और सीवरेज लाइन पूरी तरह जाम हो जाती हैं। ऐसे अनुपयोगी तेल को किसी खाली बंद डिब्बे या बोतल में इकट्ठा कर लेना चाहिए और फिर कचरा प्रबंधन के नियमों के अनुसार उसका सुरक्षित निस्तारण किया जाना चाहिए।

















