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छत्तीसगढ़ के सरगुजा में लकड़ी की मथनी से मच रही शुद्ध देसी माठे की धूम, रतन माझी की 10 से 20 साल पुरानी विरासतकल्चर
8 अग॰ 2026, 4:18 pm (81 दिन पहले)· 1

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में लकड़ी की मथनी से मच रही शुद्ध देसी माठे की धूम, रतन माझी की 10 से 20 साल पुरानी विरासत

सरगुजा जिले में आज भी लकड़ी की पारंपरिक मथनी और रस्सी से दही मथकर शुद्ध माठा और घी तैयार किया जाता है। पिछले 10 से 20 सालों से इस काम में जुटे रतन माझी का कहना है कि यह विधि सेहत और स्वाद दोनों में सर्वोत्तम है।

छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक तरीके से देसी माठा और घी तैयार करने का रिवाज पूरी तरह से बरकरार है। आधुनिक दौर की मशीनों के बजाय यहां लकड़ी और रस्सी से बनी मथनी की सहायता से दही को मथा जाता है। शुद्धता, पौष्टिकता और बेहतरीन स्वाद की तलाश करने वाले लोग आज भी इस पुरानी तकनीक से तैयार माठे और घी को ही पहली पसंद मानते हैं।

पुरखों की सिखाई मथनी बनाने की अनोखी कला

इस पारंपरिक कार्य से जुड़े रतन माझी का कहना है कि दही मथने वाली खास मथनी को लकड़ी के मजबूत डंडे को तराशकर तैयार किया जाता है, जिसके दोनों सिरों पर पैर जैसी बनावट होती है। वर्तमान समय में इस प्रकार की हस्तनिर्मित लकड़ी की मथनी बहुत ही कम स्थानों पर देखने को मिलती है। रतन माझी बताते हैं कि यह हुनर उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है, जिसे वे आज भी सहेज कर रखे हुए हैं।

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लोहे के बर्तनों के बजाय क्यों खास है लकड़ी की मथनी

देसी माठे के स्वाद और गुणवत्ता पर बात करते हुए रतन माझी स्पष्ट करते हैं कि लोहे या धातु के उपकरणों का इस्तेमाल करके हाथ से बनाया गया माठा स्वास्थ्य और स्वाद की दृष्टि से उत्तम नहीं होता। इसके विपरीत, लकड़ी की मथनी और रस्सी के घुमाव से तैयार किया गया माठा अत्यधिक स्वादिष्ट और सेहत के लिए फायदेमंद होता है। यही कारण है कि गांव तथा आसपास के क्षेत्रों में इस विधि से तैयार माठे की भारी मांग रहती है और लोग इसे बड़े चाव से पसंद करते हैं।

दशकों का अनुभव और मौसम का चक्र

रतन माझी पिछले 10 से 20 सालों से लगातार इसी प्राचीन पद्धति का पालन करते हुए माठा और घी तैयार कर रहे हैं। इस काम से उन्हें न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त होता है, बल्कि समाज और ग्रामीणों के बीच उनके काम की भरपूर सराहना भी की जाती है। हालांकि माठा बनाने का यह सिलसिला साल के सभी मौसमों में जारी रहता है, परंतु बरसात के मौसम में दूध की आवक अधिक होने से इसका उत्पादन बढ़ जाता है। जब रस्सी के सहारे मथनी से दही को तेजी से घुमाया जाता है, तो सुगठित घी तैरकर ऊपर आ जाता है और पौष्टिक माठा नीचे बर्तन में बच जाता है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में माठा बनाने के लिए किस पारंपरिक उपकरण का उपयोग किया जाता है?
सरगुजा में लकड़ी के डंडे से बनी विशेष मथनी और रस्सी का उपयोग करके दही को पारंपरिक तरीके से मथा जाता है।
रतन माझी कितने वर्षों से इस पारंपरिक पद्धति से माठा बना रहे हैं?
रतन माझी पिछले 10 से 20 सालों से लगातार इस पुरानी पारंपरिक पद्धति से माठा और घी तैयार कर रहे हैं।
लोहे के उपकरणों की तुलना में लकड़ी की मथनी से बना माठा क्यों बेहतर माना जाता है?
रतन माझी के अनुसार, लोहे के उपकरणों से बना माठा सेहत और स्वाद के लिए अच्छा नहीं होता, जबकि लकड़ी की मथनी से मथा गया माठा बेहद स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
किस मौसम में माठे का उत्पादन अधिक होता है और क्यों?
माठा सभी मौसमों में बनाया जाता है, लेकिन बरसात के मौसम में दूध की आवक अधिक होने के कारण इसका उत्पादन बढ़ जाता है।
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