अमेरिकी सियासत के तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने की आशंका के बीच जिन हजारों नागरिकों ने बेहतर जिंदगी की उम्मीद में अटलांटिक पार किया था, उनमें से कई लोगों का मोहभंग अब खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर यूरोप के शांत उपनगरों, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन की आकर्षक तस्वीरों ने कई परिवारों को देश छोड़ने के लिए प्रेरित किया था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद जब जमीनी सच्चाई से सामना हुआ, तो कई प्रवासियों को अहसास हुआ कि रोजमर्रा की जिंदगी उतनी आसान नहीं है जितनी इंटरनेट पर दिखाई देती थी। आज वही लोग सोशल मीडिया समूहों में चुपचाप अपनी वापसी की योजनाएं साझा कर रहे हैं और यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अपने पुराने घर को याद करना कोई गुनाह है।
सपनों का यूरोप और रोजमर्रा की जमीनी हकीकत
विदेश जाकर बसने वाली एनी नाम की एक महिला ने बताया कि उन्होंने टिकटॉक, इंस्टाग्राम और रेडिट जैसे मंचों पर ब्रिटेन के उपनगरीय जीवन की तारीफें सुनने के बाद वहां बसने का फैसला किया था। उन्हें लगा था कि लंदन जैसे बड़े महानगर के पास रहकर एक छोटे कस्बे का सुकून मिलेगा और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ भी प्राप्त होगा। लेकिन जब वह अपने पहले बच्चे के साथ गर्भवती थीं और ब्रिटेन पहुंचीं, तो वहां की नेशनल हेल्थ सर्विस में मातृत्व देखभाल की प्रक्रिया उनके अमेरिकी निजी बीमा के मुकाबले काफी पेचीदा साबित हुई। उनका कहना है कि ब्रिटेन में कई लोग यह मानकर चलते हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त हैं, जबकि असलियत में प्रवासियों को भारी टैक्स के साथ-साथ एक विशेष इमिग्रेशन सरचार्ज भी चुकाना पड़ता है।
इसके अलावा जीवनशैली और सुविधाओं में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। अमेरिका में जो वस्तुएं सामान्य जीवन का हिस्सा मानी जाती हैं, जैसे डिशवॉशर या कपड़े सुखाने वाला ड्रायर, वे ब्रिटेन के कई घरों में आज भी विलासिता समझी जाती हैं। कम वेतनमान के कारण लोगों के पास बचत या खर्च करने योग्य आय बहुत सीमित रह जाती है। एनी का कहना है कि उन्हें दफ्तर में अपने अमेरिकी लहजे और संस्कृति को लेकर लगातार उपहास का सामना करना पड़ा। उनका मानना है कि जहां अमेरिकी संस्कृति लगातार आगे बढ़ने और सुधार करने की सीख देती है, वहीं ब्रिटेन में लोग परिस्थितियों से समझौता कर लेने की प्रवृत्ति रखते हैं। अब वह और उनके पति अगले साल की गर्मियों में अपने मूल देश लौटने की योजना पर काम कर रहे हैं।
आंकड़ों में अमेरिका से पलायन की रफ्तार
पिछले कुछ वर्षों के दौरान राजनीतिक वजहों से अमेरिका छोड़ने वालों की तादाद में भारी उछाल दर्ज किया गया था। कोविड महामारी के बाद स्पेन, ग्रीस और पुर्तगाल जैसे देशों द्वारा शुरू किए गए डिजिटल नोमड वीजा ने भी इस रास्ते को आसान बनाया। 2025 की पहली तिमाही के दौरान अमेरिका से बाहर जाने वाले प्रवासियों की संख्या पिछले साल की समान अवधि की तुलना में दोगुनी हो गई थी। स्पेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान के अनुसार, 2026 में वहां रहने वाले अमेरिकी नागरिकों की संख्या एक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से मार्च 2025 के बीच अमेरिकी नागरिकों के निवास आवेदनों में रिकॉर्ड तोड़ इजाफा दर्ज किया गया, जो 2004 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा स्तर था। आयरलैंड के फॉरेन बर्थ रजिस्टर के आंकड़ों से जाहिर होता है कि 2024 और 2025 के बीच वहां नागरिकता के लिए आने वाले अमेरिकी आवेदनों में 63 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई। निजी संस्था एक्सपैट्स द्वारा 58,000 प्रवासियों पर किए गए एक सर्वेक्षण में 71 प्रतिशत प्रतिभागियों ने देश छोड़ने की मुख्य वजह के रूप में अमेरिकी राजनीतिक माहौल का हवाला दिया था। इसके अलावा एलेन डीजेनेरेस, पोर्टिया डी रोसी, रोजी ओ'डोनेल जैसी हस्तियों ने राजनीतिक वजहों से देश छोड़ा, जबकि कॉर्टनी लव ने 2025 की शुरुआत में अपने गृह देश के माहौल को भयावह बताते हुए ब्रिटेन की नागरिकता के लिए अर्जी दी थी।
धीमी कार्यशैली और नौकरशाही की भूलभुलैया
पत्रकार और सलाहकार सारा वुड गोंजालेज, जो तीन साल स्पेन और एडिनबर्ग में बिताने के बाद न्यूयॉर्क लौट आई हैं, बताती हैं कि उन्हें स्कॉटलैंड के लोगों की बौद्धिक जिज्ञासा बेहद पसंद आई थी। इसके बावजूद कामकाज के मामले में यूरोपीय गति धीमी महसूस हुई। उनके अनुसार, अमेरिकी कामकाजी माहौल में तेजी से निर्णय लेने और तुरंत हां या ना तक पहुंचने की आदत होती है, जो यूरोप की कार्यसंस्कृति में अक्सर गायब दिखती है।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में 2023 में बसने वाले जोश नाम के एक अन्य पेशेवर का अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा। 2024 के चुनाव के परिणामों की चिंता और जीवन में ठहराव महसूस होने के कारण उन्होंने बर्लिन का रुख किया था। वह पहले भी वहां रह चुके थे, भाषा जानते थे और उनके स्थानीय मित्र भी थे। इसके बावजूद उन्हें नौकरी तलाशने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और सरकारी दफ्तरों की जटिल कागजी कार्रवाई ने उनका हौसला तोड़ दिया। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति वहां पैदा नहीं हुआ है या उसका हुलिया स्थानीय लोगों जैसा नहीं है, तो उसे पूरी तरह अपनाए जाने में भारी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। जोश अब वापस अपने वतन लौट चुके हैं और उनका मानना है कि दूर जाने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि शायद उन्होंने अमेरिकी हालात पर जरूरत से ज्यादा जल्दबाजी में प्रतिक्रिया दे दी थी।
सोशल मीडिया पर लौटने की बात करने पर विरोध
विभिन्न ऑनलाइन मंचों जैसे आर/एक्सपैट्स, आर/गोइंगटूस्पेन, आर/अमेरिकनएक्सपैट्सयूके और आर/अमेरएग्जिट पर अपने पुराने जीवन को याद करने वाले अमेरिकियों को अक्सर तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। जब कोई व्यक्ति यह लिखता है कि उसे अपने पुराने शहर, दोस्तों या जीवनशैली की याद आ रही है, तो अन्य इंटरनेट यूजर्स उसे विशेषाधिकार प्राप्त या दक्षिणपंथी करार दे देते हैं। लोगों का तर्क होता है कि वे नए देश में घुलने-मिलने की पर्याप्त कोशिश नहीं कर रहे हैं।
वामपंथी राजनीति से जुड़े मुद्दों पर वीडियो बनाने वाली मशहूर इन्फ्लुएंसर केट ग्लैवन 2024 के अंत में न्यूयॉर्क से लंदन आई थीं। लेकिन यहां आते ही उन्हें ब्रांड्स के साथ काम मिलना बंद हो गया, क्योंकि उनके ज्यादातर प्रायोजक एक ऐसे क्रिएटर पर खर्च नहीं करना चाहते थे जो ब्रिटिश दर्शकों को संबोधित कर रहा हो। जब उन्होंने न्यूयॉर्क लौटने की घोषणा की, तो ऑनलाइन यूजर्स ने उन पर अमेरिका की राजनीतिक मुश्किलों से भागने और फिर वापस लौटने का आरोप लगाकर जमकर तंज कसे। इसी तरह, स्पेन में अपने छोटे बच्चे के साथ संघर्ष कर रही एक मां को यूजर्स ने यहां तक कह दिया कि वापस अमेरिका लौटने से उनके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
यूरोप भी नहीं है दक्षिणपंथी राजनीति से अछूता
पलायन करने वाले कई लिबरल अमेरिकियों को उम्मीद थी कि यूरोप उन्हें एक आदर्श राजनीतिक पनाहगाह देगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि यूरोप के कई देशों में भी दक्षिणपंथी राजनीति का उभार तेजी से हुआ है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी गर्भपात, समलैंगिक विवाह और प्रवासन की खुली विरोधी रही हैं और उन्हें ट्रंप का सहयोगी माना जाता है। ब्रिटेन में धुर-दक्षिणपंथी संगठन पैर पसार रहे हैं, जबकि ग्रीस, जर्मनी और पुर्तगाल में भी रूढ़िवादी और आव्रजन विरोधी एजेंडे वाली सरकारों का प्रभाव बढ़ रहा है।
पोलैंड के क्राको शहर में अपनी पोलिश पत्नी और छोटे बच्चे के साथ बसने वाले न्यूयॉर्क के आर्ट डायरेक्टर निक का कहना है कि जो राजनीतिक रुझान अमेरिका में दिख रहे हैं, वे अब पूरी दुनिया में पैर पसार चुके हैं। उन्होंने पाया कि पोलैंड में भी दक्षिणपंथी विचारधारा को व्यापक जनसमर्थन हासिल है और वहां की सख्त नौकरशाही तथा सांस्कृतिक बंदिशों के कारण वह खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। एक्सपैट्सी गो की सह-संस्थापक जेन बार्नेट का कहना है कि विदेश जाने वाले उनके ग्राहक कोई अवास्तविक स्वर्ग की उम्मीद लेकर नहीं जा रहे हैं, बल्कि वे ऐसे नागरिक हैं जो अपने आसपास टूटते सामाजिक ताने-बाने के बीच एक सामान्य और सार्थक जीवन जीना चाहते हैं। लेकिन उचित तैयारी और संतुलित अपेक्षाओं के बिना यह सफर कई लोगों के लिए एक नई उलझन बन जाता है।



















