पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है, जहां रामपुरहाट से तृणमूल कांग्रेस के पांच बार के विधायक और पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव उनके आवास पर फंदे से लटका हुआ पाया गया। बीरभूम के रामपुरहाट स्थित वार्ड नंबर 5 के हत्तलापारा क्षेत्र में मौजूद उनके घर के भूखंड पर बने पार्टी कार्यालय वाले कमरे में उनका शव मिला। ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पद संभाल चुके वरिष्ठ नेता की अचानक हुई इस मृत्यु से राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर, व्यक्तिगत जीवन, भ्रष्टाचार के आरोपों पर सफाई और परिवार के लिए अंतिम संदेश लिखा है।
सुसाइड नोट में राजनीतिक सफर और आरोपों पर विस्तृत सफाई
बरामद किए गए अंतिम खत में आशीष बनर्जी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए लिखा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति के जरिए की थी। खत में उन्होंने तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी में अपनी भूमिका के संदर्भ में विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि वे किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या लेन-देन में शामिल नहीं रहे हैं। नोट के अनुसार, डेवलपमेंट अथॉरिटी में उनके पास कोई वास्तविक प्रशासनिक या वित्तीय अधिकार नहीं थे। वे केवल सामान्य बैठकों में भाग लेते थे। उन्होंने न तो किसी योजना को हरी झंडी दी और न ही किसी वित्तीय चेक पर दस्तखत किए थे। ऐसे में उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
शिक्षा जगत से गहरा लगाव और निःशुल्क अध्यापन का उल्लेख
सक्रिय राजनीति में आने से पहले आशीष बनर्जी का एक लंबा और समर्पित करियर अध्यापन का रहा था। रामपुरहाट कॉलेज में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन भर पूरी ईमानदारी से पढ़ाया है। उन्होंने अपने पत्र में दर्ज किया, "मैंने जिंदगी भर पढ़ाया है। मैंने कभी कोई क्लास नहीं छोड़ी। मैंने स्पेशल क्लास भी लीं। मैंने कई छात्रों को मुफ्त में पढ़ाया। मुझे उनसे बहुत प्यार मिला।" उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे शैक्षणिक करियर के दौरान छात्रों के साथ उनका बेहद आत्मीय रिश्ता रहा, लेकिन उन्होंने कभी किसी छात्र से कोई वित्तीय लाभ या पैसा नहीं लिया। किसी भी अनुचित सुविधा या रिश्वत से उनका कोई सरोकार नहीं रहा।
राजनीति को बताया जीवन की भूल और परिवार के नाम संदेश
अपने परिवार के सदस्यों के लिए लिखे भावुक संदेश में पूर्व डिप्टी स्पीकर ने स्वीकार किया कि राजनीति के मैदान में उतरना उनके जीवन की एक बड़ी गलती थी। उन्होंने लिखा कि वे राजनीतिक बदले की भावना और प्रतिद्वंद्विता का शिकार हो गए। इसी कारण उन्होंने अपने पारिवारिक सदस्यों को सलाह दी कि वे भविष्य में कभी भी राजनीति का हिस्सा न बनें। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाइयों के बीच आपसी प्रेम और मजबूत रिश्तों को बनाए रखने पर जोर दिया, जिससे यह साफ होता है कि परिवार के भीतर कोई आपसी मतभेद या विवाद नहीं था। अपने पत्र के अंत में उन्होंने विशेष रूप से अनुरोध किया कि उनकी इस दुखद मृत्यु के लिए किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदार न ठहराया जाए।
घटना से पहले का माहौल और मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, घटना से पूर्व संध्या पर माहौल पूरी तरह सामान्य था। आशीष बनर्जी ने घर के सभी लोगों के साथ सामान्य रूप से बातचीत की और हमेशा की तरह हंसी-मजाक भी किया था। रात का खाना खाने के बाद वे अपने कमरे में सोने चले गए थे। सुबह जब घर के निचले हिस्से में स्थित पार्टी ऑफिस वाले कमरे का दरवाजा देखा गया, तब यह दुखद घटना सामने आई। यदि आप या आपके परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहे हैं, तो त्वरित सहायता और परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबर 9152987821 पर संपर्क किया जा सकता है।



















