उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित जिला अस्पताल में नियमों को दरकिनार कर की गई स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती के मामले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद अस्पताल में कार्यरत 15 स्टाफ नर्सों और 2 लैब टेक्नीशियनों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया गया है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच स्थानीय स्तर पर हुई इस भर्ती प्रक्रिया में धांधली की पुष्टि होने के बाद सभी 17 कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। ये सभी कर्मचारी पिछले लगभग तीन वर्षों से अस्पताल में मरीजों के इलाज और पैथोलॉजी जांच के काम में लगे हुए थे।
अवैध नियुक्ति और सरकारी नियमों की अनदेखी
प्राप्त विवरण के अनुसार जिला अस्पताल में इन नर्सों और लैब टेक्नीशियनों को वर्ष 2023 से 2025 के बीच कार्यभार सौंपा गया था। राज्य शासन के मौजूदा नियमों के तहत जिला अस्पताल स्तर पर स्थानीय रूप से स्टाफ नर्स या लैब टेक्नीशियन जैसे पदों पर सीधी या मनमाने ढंग से भर्ती करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद निर्धारित भर्ती प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर यह नियुक्तियां की गईं। इस पूरी प्रक्रिया को एक आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से अंजाम दिया गया, जिसमें प्रशासनिक स्वीकृतियों और तय मापदंडों का पूर्णतः उल्लंघन पाया गया है। मामला उजागर होने के बाद अब आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका और भर्ती में शामिल अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लखनऊ शासन के निर्देश पर वेतन भुगतान पर लगी रोक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में जब भर्ती प्रक्रिया की खामियां सामने आईं, तो इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट लखनऊ स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय को भेजी गई। शासन स्तर पर मामले की समीक्षा के बाद लखनऊ से एक आधिकारिक पत्र जारी कर संबंधित कर्मचारियों की वैधता और वेतन पर तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए। इस निर्देश के क्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर इन 17 स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया। आदेश मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने सभी प्रभावित नर्सों और टेक्नीशियनों के वेतन आहरण पर रोक लगा दी है।
अस्पताल प्रशासन का बयान और जांच समिति का गठन
इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार झा ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच रिपोर्ट में पाई गई अनियमितताओं के आधार पर शासन के आदेशानुसार वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि यह नियुक्तियां किस स्तर से हुईं, किन अधिकारियों ने इसकी सहमति दी और प्रक्रिया में किस तरह का उल्लंघन हुआ, इसकी गहन पड़ताल के लिए एक जांच टीम गठित की गई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जांच समिति द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषी अधिकारियों और संबंधित आउटसोर्स एजेंसी के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



















