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जयपुर के चांदपोल बाजार की वो दुकान, जहां 50 साल से हाथों से गढ़ी जा रही कैंची — कीमत 400 से 1000 रुपयेकल्चर
13 जून 2026, 3:21 pm (137 दिन पहले)· 2

जयपुर के चांदपोल बाजार की वो दुकान, जहां 50 साल से हाथों से गढ़ी जा रही कैंची — कीमत 400 से 1000 रुपये

जयपुर के चांदपोल बाजार में राजेश कुमार तीन पीढ़ियों से चली आ रही कैंची बनाने की कला को आज भी हाथों से जिंदा रखे हुए हैं, जहां एक कैंची की कीमत 400 से 1000 रुपये तक है।

जयपुर की असली पहचान सिर्फ उसके किले और महल नहीं, बल्कि चारदीवारी के बाजारों की उन छोटी-छोटी दुकानों में भी छिपी है, जहां हुनरमंद कारीगर पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपना पुश्तैनी काम संभाले हुए हैं। शहर का हर बाजार किसी न किसी खास चीज के माहिर कारीगरों के लिए जाना जाता है और इन हाथों के हुनर की मांग आज भी बनी हुई है। ऐसी ही एक कहानी चांदपोल बाजार की दुकान नंबर 112, छीतरमल मिस्र की है, जो पीढ़ियों से कैंची गढ़ने के काम के लिए मशहूर रही है।

दादा से पिता और अब बेटे तक — तीन पीढ़ियों का सफर

इस दुकान को चला रहे कारीगर राजेश कुमार बताते हैं कि कैंची बनाने का यह हुनर उन्हें खानदान से मिला है। उनके पूर्वज जयपुर के बसने के समय से ही इस काम से जुड़े रहे। उनके दादा छीतरमल अपने जमाने में कैंची बनाने और उस पर धार लगाने के मशहूर कारीगर माने जाते थे। यही परंपरा आगे उनके पिता रामजी लाल ने संभाली और अब बीते 50 वर्षों से खुद राजेश कुमार इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं।

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मशीनों के दौर में भी हाथ का काम कायम

राजेश कुमार के मुताबिक कैंची और कपड़ों का रिश्ता चोली-दामन जैसा है। उनका कहना है कि अगर कैंची न होती तो न कपड़े सही ढंग से कटते और न ही सुंदर डिजाइन तैयार हो पाते। मगर यह सिर्फ दर्जियों तक सीमित चीज नहीं है — यह घर-घर के रोजमर्रा के काम का हिस्सा है, जो लगभग हर इंसान की दिनचर्या में शामिल रहती है। वे चिंता जताते हैं कि अब जयपुर ही नहीं, पूरे देश में हाथों से कैंची बनाने और उस पर धार चढ़ाने वाले कारीगर बेहद कम रह गए हैं। मशीनों ने इस पारंपरिक कारीगरी की जगह काफी हद तक ले ली है, फिर भी वे आज तक हाथों से ही कैंची तैयार करते हैं। उनकी बनाई कैंचियों की लोगों में अच्छी-खासी मांग है। छोटे आकार से लेकर बड़े आकार तक की तरह-तरह की कैंचियां वे बनाते हैं, जिनकी कीमत 400 रुपये से शुरू होकर 1000 रुपये तक जाती है।

जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक साथ निभाती कैंची

राजेश कुमार एक दिलचस्प बात की ओर ध्यान दिलाते हैं — कैंची हर इंसान के जीवन से किसी न किसी मोड़ पर जुड़ी रहती है। उनका कहना है कि बच्चे के जन्म के वक्त गर्भनाल काटने से लेकर किसी के निधन के बाद अंतिम संस्कार तक, इसका इस्तेमाल होता है। उनके मुताबिक जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तब भी अंतिम संस्कार के कई कामों में कैंची की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से वे मानते हैं कि कैंची का महत्व इंसान के जन्म से मृत्यु तक बना रहता है। कपड़ों की दुकानें हों, हेयर सैलून, पैकिंग शॉप या फिर आम घर — इसके बिना कई काम अधूरे रह जाते हैं। यही कारण है कि कैंची एक धागे की तरह हर व्यक्ति के जीवन से बंधी हुई है।

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