पहली बार भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में वीरगति पाने वाले छह जांबाज सैनिकों के नाम सार्वजनिक किए हैं। ये वीर अब केवल इतिहास की एक याद नहीं बनेंगे, बल्कि दिल्ली के इंडिया गेट के पास स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की खास ग्रेनाइट ईंटों पर इनके नाम हमेशा के लिए उकेरे जाएंगे, ताकि हर भारतीय इनकी वीरगाथा को जान सके और इन्हें श्रद्धांजलि दे सके।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
6 और 7 मई 2025 की मध्य रात्रि को भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद 9 आतंकवादी शिविरों पर एक ऐतिहासिक और गुप्त सैन्य अभियान को अंजाम दिया। यह कार्रवाई अप्रैल-मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस बर्बर आतंकी हमले के जवाब में थी, जिसमें कई भारतीय नागरिकों की जान गई और अनेक महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। पीड़ित महिलाओं के भावनात्मक दर्द और पूरे देश के आक्रोश को आवाज देते हुए इस मिशन को 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम दिया गया। भारतीय सेनाओं ने असाधारण साहस के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और पूरे देश के आवेश का सफल बदला लिया।
थल सेना और वायुसेना, दोनों के जवान शामिल
सरकार ने बताया कि इन छह शहीदों में पांच भारतीय थल सेना के जवान हैं और एक भारतीय वायुसेना के सार्जेंट हैं। इनमें से अधिकांश ने ऑपरेशन के दौरान जम्मू-कश्मीर में शहादत पाई। इन वीरों में से दो को विशेष वीरता पुरस्कार दिए गए हैं: राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया है, जबकि सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु पदक से नवाजा गया है।
देश के इन छह वीरों के नाम
- सूबेदार मेजर पवन कुमार, मुख्यालय 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड
- राइफलमैन सुनील कुमार, जम्मू एवं कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की चौथी बटालियन
- लांस नायक दिनेश कुमार, 5 फील्ड रेजिमेंट
- अग्निवीर मूड मुरली नायक, 851 लाइट रेजिमेंट
- हवलदार सुनील कुमार सिंह, 237 फील्ड वर्कशॉप
- सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, 39 विंग, भारतीय वायुसेना
नेशनल वॉर मेमोरियल पर अमर होंगे ये नाम
दिल्ली के इंडिया गेट के करीब स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल देश के उन सैनिकों का राष्ट्रीय स्मारक है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर किए। इन छह शहीदों के नाम भी अब यहां विशेष ग्रेनाइट ईंटों पर अंकित किए जाएंगे। यहां आकर हर नागरिक इन वीरों को श्रद्धांजलि दे सकेगा, उनके बलिदान की गाथा पढ़ सकेगा और आने वाली पीढ़ियां इनकी कुर्बानी को कभी नहीं भूल सकेंगी।
सिंदूर, जो बना प्रतिशोध और दर्द का प्रतीक
सिंदूर सुहागिन महिलाओं की पहचान का प्रतीक है। पहलगाम के आतंकी हमले ने जिन महिलाओं को विधवा किया, उनके भावनात्मक दर्द को इस ऑपरेशन के नाम में समाया गया। यह नामकरण एक संदेश था कि राष्ट्र उन पीड़ित महिलाओं के साथ खड़ा है और उनके दुख का बदला लेगा। भारतीय सेनाओं ने इस मिशन में अपनी जांबाजी की अप्रतिम तस्वीर पेश की।













