सनी देओल और अमृता सिंह की डेब्यू फिल्म बेताब के 43 साल, जानिए 1.5 करोड़ के बजट वाली फिल्म की ऐतिहासिक कमाई30 साल बाद राजकुमार संतोषी के साथ फिर पर्दे पर लौट रहे सनी देओल, बंटवारा 1947 पर खोला राज़जिला जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर सख्त रुख, शीर्ष अदालत ने राज्यों को दी 14 दिनों की मोहलतससुराल सिमर का फेम अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ ने शादी के लिए नहीं बदला था धर्म, जयति भाटिया ने बताया अजमेर शरीफ से जुड़ा सचअमेरिका और ईरान में शांति वार्ता की उम्मीदों और भारी ईटीएफ निवेश से बिटकॉइन 64,000 डॉलर के पार पहुंचाडिजिटल युग में इंटरनेट पर वायरल गिरफ्तारी की तस्वीरें कैसे महिलाओं की जिंदगी कर रही हैं बर्बादइजरायल ने खारिज किया अमेरिकी शांति प्रस्ताव, बेंजामिन नेतन्याहू बोले हमास के निरस्त्रीकरण तक गाजा से नहीं हटेगी सेनापारिवारिक कलह में खूनी खेल: राजस्थान के बांसवाड़ा में तलवार से हमले के बाद उदयपुर ले जाते वक्त युवक अनिल की मौतराज खोसला और मिलन लुथरिया की जोड़ी ने बनाए दो अलग दौर में कच्चे धागे नाम के दो बड़े सिनेमाई हिटथलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने लखनऊ में मध्य कमान की युद्धक तैयारियों और बुनियादी ढांचे का जायजा लिया
ऑपरेशन सिंदूर में आधी कार्रवाई के बीच पाकिस्तान ने DGMO हॉटलाइन पर मांगी थी शांति, पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान का सनसनीखेज खुलासाभारत
5 अग॰ 2026, 2:41 pm (4 घंटे पहले)· 0

ऑपरेशन सिंदूर में आधी कार्रवाई के बीच पाकिस्तान ने DGMO हॉटलाइन पर मांगी थी शांति, पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान का सनसनीखेज खुलासा

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया कि 10 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर की गुहार लगाई थी, जबकि उस समय भारतीय सेना का आधा सैन्य अभियान भी पूरा नहीं हुआ था।

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तीखे सैन्य टकराव के दौरान एक ऐसा मोड़ आया था जब पाकिस्तानी नेतृत्व पूरी तरह बैकफुट पर आ गया था। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने एक सार्वजनिक संवाद कार्यक्रम में उस दौर की सैन्य रणनीतियों और पाकिस्तानी पक्ष की घबराहट को लेकर बेहद अहम जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, 10 मई 2025 की सुबह इस्लामाबाद की तरफ से हॉटलाइन पर संपर्क साधकर तत्काल युद्धविराम की इच्छा जताई गई थी। उस वक्त भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा तय किए गए सैन्य लक्ष्यों में से आधा हिस्सा भी निष्पादित नहीं किया गया था। भारत ने इस अचानक आए फोन पर तुरंत सहमति देने के बजाय पाकिस्तानी अधिकारियों को दोपहर तक इंतजार कराया, क्योंकि भारतीय सेना अपने पूर्व-निर्धारित अभियानों को पूरा करने में व्यस्त थी।

48 घंटे की गीदड़भभकी के 8 घंटे भीतर बदला पाकिस्तान का रुख

जनरल अनिल चौहान ने साक्षात्कार कार्यक्रम 'ऑफ द कफ' के दौरान इस बात को स्वीकार किया कि 10 मई की सुबह इस्लामाबाद से आया बुलावा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक सरप्राइज था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि ठीक एक दिन पहले, यानी 9 मई को पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक गलियारों से भारी बयानबाजी की जा रही थी। पाकिस्तानी पक्ष लगातार यह दावे कर रहा था कि वे भारतीय सेना को अगले 48 घंटों के भीतर सबक सिखा देंगे। हालांकि, इस तरह के आक्रामक बयानों के बमुश्किल आठ घंटे बीतते-बीतते इस्लामाबाद ने हथियार डालने जैसी मुद्रा अपना ली और दोनों देशों के बीच स्थापित डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) की हॉटलाइन पर संदेश भेजना शुरू कर दिया।

ये भी पढ़ें

भारतीय वायुसेना द्वारा 9 मई की रात और 10 मई की अलसुबह किए गए सटीक और तीखे हवाई हमलों ने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की रीढ़ तोड़ दी थी। हालांकि शुरुआत में पाकिस्तानी रणनीतिकारों ने अपने शुरुआती प्रतिघात को सफल मान लिया था, लेकिन जब भारतीय हवाई हमलों का असली प्रभाव उनके रक्षा ढांचों पर दिखाई पड़ा, तो इस्लामाबाद में हड़कंप मच गया। उन्हें यह स्पष्ट आभास हो गया था कि भारतीय वायुसेना के हमले यहीं रुकने वाले नहीं हैं। आगे होने वाली भारी तबाही और व्यापक नुकसान के डर से पाकिस्तान ने जल्द से जल्द संघर्ष को विराम देने की कोशिश की।

भारत ने तुरंत क्यों नहीं माना युद्धविराम का प्रस्ताव

जब पाकिस्तान की ओर से हॉटलाइन पर लगातार बातचीत शुरू करने और गोलीबारी रोकने का आग्रह किया जा रहा था, तब भारतीय सैन्य कमान ने त्वरित प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, भारत का एकमात्र ध्येय केवल एक अस्थायी युद्धविराम हासिल करना नहीं था, बल्कि सीमा पार मौजूद आतंकी तंत्र और सैन्य समर्थन ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त करना था। भारतीय सेना की मूल योजना के तहत हमलों की कई अतिरिक्त लहरें पहले से तैयार थीं और उन्हें अंजाम दिया जाना बाकी था।

भारतीय रक्षा नेतृत्व इस्लामाबाद को यह स्पष्ट और कड़ा रणनीतिक संदेश देना चाहता था कि पाकिस्तान के भीतर स्थित कोई भी सैन्य अड्डा, वायुसेना स्टेशन या ठिकाना भारतीय सशस्त्र बलों की पहुंच से बाहर नहीं है। जब तक भारतीय बलों ने अपनी योजनाबद्ध कार्रवाई के आवश्यक चरणों को पूरा नहीं कर लिया और अपने प्राथमिक सामरिक उद्देश्यों को हासिल नहीं कर लिया, तब तक पाकिस्तान के सीजफायर प्रस्ताव को होल्ड पर रखा गया। दोपहर बाद ही, जब भारत ने अपने तय लक्ष्यों को हासिल कर लिया, तब जाकर DGMO स्तर की वार्ता में आगे के कदमों पर सहमति बनी।

बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी और त्वरित निर्णय क्षमता में भारत की बढ़त

सैन्य अभियानों की सफलता का विश्लेषण करते हुए जनरल अनिल चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पूरे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को दुश्मन के मुकाबले काफी बेहतर युद्धक्षेत्र पारदर्शिता (बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी) हासिल थी। आधुनिक निगरानी प्रणालियों, सेटेलाइट इनपुट और रियल-टाइम टोही आंकड़ों की बदौलत भारतीय सैन्य कमांडरों को युद्धक्षेत्र के हर घटनाक्रम की स्पष्ट और सटीक तस्वीर मिल रही थी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में अद्भुत तेजी आई।

जनरल चौहान के अनुसार, भारतीय कमांडरों को यह बिल्कुल स्पष्ट मालूम था कि भारत द्वारा चलाए गए अभियानों ने क्या परिणाम दिए हैं और पाकिस्तान के जवाब से क्या असर पड़ा है। चूंकि पूरा शीर्ष सैन्य नेतृत्व एक ही एकीकृत डेटा और वास्तविक स्थिति को देख रहा था, इसलिए हर मोर्चे पर त्वरित और सटीक कदम उठाए जा सके। युद्ध की स्थिति में निर्णय लेने की यह गति दुश्मन पर निरंतर रणनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए अनिवार्य होती है, और भारतीय सशस्त्र बल इस मोर्चे पर पाकिस्तान से काफी आगे साबित हुए।

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बेहद कायराना आतंकवादी हमले से जुड़ी हुई है। उस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस भीषण नरसंहार के बाद भारत सरकार और सैन्य नेतृत्व ने सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई करने का फैसला किया। 7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान और उसके अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) क्षेत्र में सक्रिय आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख ठिकानों, प्रशिक्षण शिविरों और लॉन्च पैड्स को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर का आगाज किया।

इस सर्जिकल कार्रवाई के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया था और चार दिनों तक दोनों ओर से थल और नभ में भारी गोलाबारी तथा हवाई झड़पें हुईं। भारतीय सेना ने अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखते हुए पाकिस्तान के रक्षा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। आखिरकार, 10 मई की दोपहर को DGMO स्तर पर हुए संवाद के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों को रोकने और सीजफायर बनाए रखने पर सहमति बनी। जनरल अनिल चौहान के हालिया खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि उस संघर्ष में भारत ने केवल सैन्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक स्तर पर भी पूर्ण प्रभुत्व स्थापित किया था।

सवाल-जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने सीजफायर की मांग कब की थी?
पाकिस्तान ने 10 मई 2025 की सुबह DGMO हॉटलाइन के जरिए भारत से संपर्क करके युद्धविराम की मांग की थी।
सीजफायर की मांग के वक्त भारतीय सेना की क्या स्थिति थी?
पाकिस्तान के फोन करने के समय भारतीय सेना ने अपने योजनाबद्ध सैन्य अभियानों का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था।
भारत ने पाकिस्तान के सीजफायर प्रस्ताव पर तुरंत अमल क्यों नहीं किया?
भारत का उद्देश्य अपने तय सैन्य लक्ष्यों को पूरा करना था और यह संदेश देना था कि पाकिस्तान का कोई भी सैन्य ठिकाना भारतीय सेना की पहुंच से बाहर नहीं है, इसलिए भारत ने पाकिस्तान को दोपहर तक इंतजार कराया।
ऑपरेशन सिंदूर किस घटना के जवाब में शुरू किया गया था?
यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई 2025 को शुरू किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR