स्वास्थ्य और खान-पान में शुद्धता को प्राथमिकता देने वाले लोगों के लिए बहराइच शहर में एक खास ठिकाना लोकप्रिय हो रहा है. मेडिकल कॉलेज के निकट स्थित कृषि भवन परिसर में उत्तर प्रदेश सरकार तथा कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से मिलेट्स कैंटीन श्री अन्न गैलरी की शुरुआत की गई है. पारंपरिक मोटे अनाजों और जैविक खेती से उपजे खाद्यान्नों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित यह केंद्र स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जिले में बाहर से आकर नौकरीपेशा जीवन बिताने वालों को भी अपनी ओर खींच रहा है.
सस्ती दर पर घरेलू स्वाद और संतुलित पोषण
महंगाई के मौजूदा दौर में पौष्टिक आहार को किफायती रखना आम परिवारों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. इस समस्या को देखते हुए कैंटीन में भोजन की संपूर्ण थाली की दर मात्र ₹75 निर्धारित की गई है. कैंटीन के संचालक शिवांग जायसवाल के अनुसार, यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को घर जैसा सादा और गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराने का निरंतर प्रयास किया जाता है. इस विशेष थाली में देसी छिलके वाली अरहर की दाल, जैविक खेती से तैयार चावल, शुद्ध गेहूं के आटे की ताजा रोटियां और मौसम के अनुरूप ताजी हरी सब्जियां शामिल की जाती हैं. इसके अलावा थाली में बूंदी रायता और ताजा सलाद भी परोसा जाता है, जिससे भोजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पाचन के अनुकूल भी बना रहता है.
कैंटीन में दोपहर का भोजन करने पहुंचे स्थानीय नागरिक विनोद कुमार शुक्ला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहां का खाना बिल्कुल घर जैसा है. उन्होंने बताया कि भोजन के साथ मेज पर पीने के लिए मिट्टी की बोतलों में शीतल पानी रखा जाता है, जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत लाभकारी रहता है. विनोद कुमार शुक्ला के अनुसार, समूचे बहराइच शहर में मात्र ₹75 में इस स्तर का शुद्ध, पौष्टिक भोजन और मिट्टी की बोतल का ठंडा पानी मिलना बेहद दुर्लभ है.
सुबह से रात तक मिलेट्स नाश्ते और जैविक चाय का प्रबंध
कृषि भवन स्थित यह कैंटीन प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक लगातार खुली रहती है, जिससे कार्यालयीन कर्मचारियों और आम राहगीरों को समय पर नाश्ता व भोजन मिल सके. सुबह के समय यहां मोटे अनाजों से बना मिलेट्स पोहा, मिलेट्स बिस्किट तथा कुकीज ग्राहकों को परोसी जाती हैं. इसके साथ ही नाश्ते में ₹30 में 2 पराठे, ₹20 प्रति प्लेट पकौड़ी और ₹12 में विशेष ऑर्गेनिक चाय दी जाती है. जो ग्राहक अत्यधिक मसालेदार भोजन से परहेज करते हैं या केवल सादा खान-पान पसंद करते हैं, उनके लिए भी यहां अलग से विशेष व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है. नाश्ता हो या रात का भोजन, हर ग्राहक की मेज पर केवल मिट्टी की बोतल में ही जल परोसा जाता है.
स्थानीय किसानों से सीधी खरीद और प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध
कैंटीन संचालन में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. संचालक ने स्पष्ट किया कि रसोई में उपयोग होने वाली संपूर्ण खाद्य सामग्रियां, दालें, अनाज और मसाले सीधे स्थानीय किसानों से खरीदे जाते हैं. परिसर में किसी भी रूप में केमिकल, कीटनाशक अवशेष या बाहर से आने वाले मिलावटी उत्पादों का प्रवेश वर्जित है. प्लास्टिक की बोतलों व बर्तनों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. ग्राहकों को जल मिट्टी की बोतलों में दिया जाता है, जिससे पानी में मिट्टी की सौंधी सुगंध बनी रहती है और मिट्टी के प्राकृतिक खनिज शरीर को प्राप्त होते हैं.
भोजन के अतिरिक्त परिसर में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) द्वारा निर्मित जैविक उत्पादों की बिक्री भी की जाती है. यहां आने वाले लोग पारंपरिक कोल्ड प्रेस्ड घानी सरसों का तेल, बहराइच का स्थानीय शुद्ध शहद, ज्वार और बाजरे का पौष्टिक आटा, तथा मिलेट्स आधारित बिस्किट व कुकीज सीधे खरीदकर अपने घर ले जा सकते हैं.
बाहर से आए कर्मचारियों के लिए वातानुकूलित और सुरक्षित माहौल
जिले में विभिन्न विभागों और निजी संस्थानों में काम करने वाले सैकड़ों युवा व कर्मचारी रोजाना बाहर के अस्वास्थ्यकर भोजन पर निर्भर रहते थे, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था. मेडिकल कॉलेज के निकट कृषि भवन परिसर में स्थित यह मिलेट्स कैंटीन ऐसे सभी लोगों के लिए एक सुरक्षित, स्वास्थ्यवर्धक और स्वच्छ विकल्प साबित हो रही है. ग्राहकों के आराम को ध्यान में रखते हुए यहां पूरी तरह निःशुल्क वातानुकूलित बैठने की सुविधा तैयार की गई है. स्वच्छ वातावरण में बैठकर मिट्टी की बोतल से ठंडा पानी पीते हुए पारंपरिक भोजन करने की यह सुविधा सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक प्राप्त की जा सकती है.















