सेना से चार साल की सेवा पूरी करके निकलने वाले पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास और सम्मानजनक रोजगार के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने राज्य सरकार के दो महत्वपूर्ण विभागों में होने वाली सीधी भर्तियों के दौरान पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) आरक्षण देने के प्रस्ताव को अपनी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के अमल में आने से दिल्ली फायर सर्विस और जेल विभाग में निकलने वाले रोजगार के अवसरों में पूर्व अग्निवीरों के लिए स्थायी सरकारी नौकरी पाने का मार्ग काफी आसान हो जाएगा। केंद्र सरकार की पूर्व अग्निवीर पुनर्वास नीति के तहत यह कदम उठाया गया है, जिसकी औपचारिक अधिसूचना दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी कर दी गई है।
किन पदों पर लागू होगा 20% आरक्षण और कैसे हुआ नियम संशोधन
दिल्ली सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 20 प्रतिशत का यह हॉरिजॉन्टल कोटा दो विशिष्ट विभागों के प्रमुख पदों पर लागू किया जाएगा। इसमें पहला विभाग दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) है, जहां फायर ऑपरेटर के पदों पर सीधी भर्ती में यह आरक्षण मिलेगा। वहीं दूसरा विभाग जेल विभाग है, जहां वॉर्डर और मैट्रन के पदों पर होने वाली सीधी नियुक्तियों में पूर्व अग्निवीरों को इस कोटे का लाभ प्राप्त होगा। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन दोनों विभागों के संबंधित भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किए हैं। इस फैसले के बाद भर्ती बोर्ड को इन पदों के विज्ञापनों में पूर्व अग्निवीरों के लिए पद आरक्षित रखने होंगे।
आयु सीमा में 3 से 5 वर्ष की विशेष छूट का प्रावधान
आरक्षित सीटों के अलावा, पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में भी महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है। सामान्य प्रावधानों के तहत, सभी पूर्व अग्निवीरों को सीधी भर्ती के नियमों में तय की गई ऊपरी आयु सीमा में 3 वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अग्निवीर योजना के शुरुआती यानी प्रथम बैच से बाहर आने वाले युवाओं के लिए यह राहत और भी अधिक होगी, जिन्हें अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष तक की छूट दी जाएगी। आयु सीमा में इस राहत से उन अभ्यर्थियों को बड़ा फायदा मिलेगा, जिनकी उम्र सामान्य वर्ग की तय सीमा को पार कर चुकी होगी।
शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) और खाली सीटों के नियम
फायर ब्रिगेड और कारागार सेवाओं की प्रकृति को देखते हुए शारीरिक योग्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, पूर्व अग्निवीरों के सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव को ध्यान में रखते हुए शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के मानकों में छूट देने की व्यवस्था की गई है। आदेश के अनुसार, पीईटी के मापदंडों में पूर्व अग्निवीरों को कितनी और किस प्रकार की ढील दी जाएगी, इसका अंतिम निर्णय संबंधित विभाग स्वयं अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तय करेंगे। इसके अलावा, यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उन रिक्तियों को भारत सरकार की हॉरिजॉन्टल आरक्षण संबंधी गाइडलाइंस के अनुरूप भरा जाएगा।
केंद्रीय सशस्त्र बलों के पैटर्न पर दिल्ली में मजबूत सुरक्षा कवच
दिल्ली प्रशासन का यह निर्णय केंद्र सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके माध्यम से पूर्व अग्निवीरों को देश के विभिन्न अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस बलों और आपातकालीन सेवाओं में समायोजित किया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 मार्च 2026 को एक आधिकारिक पत्र भेजकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास के निर्देश दिए थे। भारत सरकार पहले ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) तथा राइफलमैन के 50 प्रतिशत पदों को पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर चुकी है। अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में लागू किए गए इस 20 प्रतिशत कोटे से युवाओं को सैन्य सेवा के बाद एक सुरक्षित और सम्मानजनक करियर का विकल्प उपलब्ध होगा।





















