भारत की राजधानी में ऐतिहासिक लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए आतंकी हमले के पीछे अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट का हाथ होने की पुष्टि हुई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी एक विस्तृत सुरक्षा आकलन रिपोर्ट में इस बात का आधिकारिक खुलासा किया गया है। 10 नवंबर 2025 को हुए इस धमाके ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था, जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी जांच के तार जोड़े गए।
छोटे विकेंद्रीकृत सेल और नया नेटवर्क मॉडल
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि आतंकी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट अब अपने पुराने ढांचे में बड़ा बदलाव कर चुका है। यह समूह अब किसी एक विशाल संगठित कमांड के तहत काम करने के बजाय छोटे-छोटे विकेंद्रीकृत सेल, स्वतंत्र लॉजिस्टिक्स और गुप्त वित्तीय तंत्र के माध्यम से गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इस रणनीति से आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचना आसान लगता है। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय तंत्र ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई है कि यह आतंकी संगठन अपने ढांचे को मजबूत करने के लिए बांग्लादेश की सीमावर्ती भू-भाग का उपयोग कर सकता है।
हमले में AI का इस्तेमाल और 'ऑपरेशन हेवनली हिंद'
सुरक्षा एजेंसियों की गहन जांच और चार्जशीट से यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि दिल्ली में लाल किले के पास किए गए इस हमले में आधुनिक तकनीक यानी AI का भी सहारा लिया गया था। आतंकियों ने संचार, मैपिंग और डिजिटल सुरक्षा की दीवारों को भेदने के लिए AI उपकरणों का उपयोग किया। जांच एजेंसी NIA द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' नामक एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तहत देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी। 9/11 और 26/11 जैसी पिछली दर्दनाक घटनाओं की तर्ज पर 10/11 का यह हमला भी एक रणनीतिक साजिश का हिस्सा था।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त और संदिग्धों की तलाश
इस हमले के सामने आने के बाद राजधानी दिल्ली में सुरक्षा घेरे को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस समारोह और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों से पूर्व दिल्ली पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर मोस्ट वांटेड आतंकियों के पोस्टर और तस्वीरें चस्पा की गई हैं। खुफिया एजेंसियां अब सीमा पार से संचालित होने वाले डिजिटल और वित्तीय नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही हैं ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।



















