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दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में बड़ा हादसा: मरीज के ऊपर गिरा सीलिंग फैन, कुछ घंटों बाद मौतदिल्ली
21 घंटे पहले· 1

दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में बड़ा हादसा: मरीज के ऊपर गिरा सीलिंग फैन, कुछ घंटों बाद मौत

राजधानी दिल्ली के एक बड़े सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में छत का पंखा गिरने से 42 वर्षीय मरीज की जान चली गई, जिसके बाद परिजनों ने चिकित्सा सुविधाओं और प्रशासन की भारी लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राजधानी दिल्ली के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद घटना सामने आई है। शहर के प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्रों में से एक गुरु तेग बहादुर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक बड़ा हादसा हो गया, जिसने मरीजों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती एक मरीज के ठीक ऊपर छत का भारी पंखा अचानक टूट कर गिर गया। इस भयानक दुर्घटना के महज कुछ ही घंटों के भीतर उस मरीज ने दम तोड़ दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना ने जहां एक तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को उजागर किया है, वहीं दूसरी तरफ मृतक के परिजनों और मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर भारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

इमरजेंसी वार्ड में हुआ दर्दनाक हादसा

मृतक व्यक्ति की पहचान 42 वर्षीय मोहम्मद अकबर के रूप में की गई है। मोहम्मद अकबर को अपनी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 18 जुलाई को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वह अस्पताल पहुंचने से पहले ही कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और एस्पिरेशन निमोनिया जैसी जटिल बीमारियां थीं। उनका इलाज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड नंबर 27 में चल रहा था।

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घटना शनिवार रात की है, जब वार्ड में आम दिनों की तरह ही मरीजों का इलाज चल रहा था। रात लगभग नौ बजकर तीस मिनट पर अचानक एक तेज आवाज हुई। किसी को कुछ समझ आता, उससे पहले ही मोहम्मद अकबर के बेड के ठीक ऊपर लगा छत का पंखा पूरी तरह टूट कर सीधे उनके ऊपर आ गिरा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार यह भारी पंखा सीधे मरीज के पेट पर आकर गिरा था। हादसे के तुरंत बाद अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों ने मोहम्मद अकबर को तत्काल प्राथमिक उपचार और सहायता उपलब्ध कराई। तमाम कोशिशों के बावजूद, रात करीब बारह बजकर सोलह मिनट पर मोहम्मद अकबर ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। यह खबर फैलते ही पूरे वार्ड में अफरा तफरी मच गई और मरीजों के परिजन आक्रोशित हो गए।

मौत के कारणों पर अस्पताल और परिजनों में विवाद

मोहम्मद अकबर की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन और परिजनों के बीच मौत की असल वजह को लेकर गहरा विवाद पैदा हो गया है। अस्पताल के अधिकारियों का स्पष्ट रूप से यह दावा है कि मरीज की जान छत का पंखा गिरने से नहीं, बल्कि उनकी पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण गई है। अस्पताल की तरफ से यह बताया गया है कि मृत्यु प्रमाण पत्र में भी मौत का मुख्य कारण मरीज की पहले से मौजूद जटिल स्वास्थ्य समस्याओं को ही दर्ज किया गया है।

अस्पताल प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि दुर्घटना के तुरंत बाद लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त पंखे को ठीक कर दिया था। अस्पताल की तरफ से एक दावा यह भी किया गया कि इस हादसे में वहां काम करने वाला एक पुरुष कर्मचारी भी घायल हुआ था और उसे भी तुरंत चिकित्सा सुविधा दी गई। लेकिन, वार्ड में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। लोगों का कहना है कि नर्स के घायल होने की बात बिल्कुल अलग और पुरानी है, और उसका मोहम्मद अकबर वाले हादसे से दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है। लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के लिए इस तरह के झूठे दावे कर रहा है।

चश्मदीद का बयान और बदहाल बुनियादी ढांचा

इस पूरी घटना के दौरान वार्ड में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पेशे से वकील मोहम्मद असलम कुरैशी शनिवार रात अपने बीमार भाई से मिलने के लिए वार्ड में आए हुए थे। उन्होंने अपनी आंखों के सामने इस पूरे खौफनाक हादसे को होते हुए देखा। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि पंखा सीधे मरीज के ऊपर गिरा था और उन्होंने इस पूरी घटना का अपने मोबाइल फोन से वीडियो भी रिकॉर्ड किया है।

मोहम्मद असलम कुरैशी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि इतना बड़ा हादसा हो जाने के बाद भी वरिष्ठ डॉक्टरों को वार्ड में पहुंचने में काफी ज्यादा समय लग गया। उन्होंने वार्ड की दयनीय स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि इमरजेंसी वार्ड होने के बावजूद वहां लगे कई एयर कंडीशनर लंबे समय से खराब पड़े हुए हैं। गर्मी और उमस के इस मौसम में एयर कंडीशनर खराब होने के कारण सभी मरीज पूरी तरह से केवल छत के पंखों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में पंखों का इस तरह टूट कर गिरना मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।

परिजनों का हंगामा और जांच की मांग

घटना के अगले दिन रविवार सुबह मोहम्मद अकबर के कई रिश्तेदार और परिवार वाले भारी संख्या में गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल परिसर में भारी रोष व्यक्त किया और पूरे मामले की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की। परिजनों का साफ तौर पर यह कहना है कि अगर अस्पताल प्रशासन ने समय रहते वार्ड की मशीनों, एयर कंडीशनर और पंखों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया होता, तो आज यह दर्दनाक हादसा आसानी से टाला जा सकता था।

अस्पताल की लापरवाही के आरोप यहीं खत्म नहीं हुए। वहां मौजूद एक अन्य मरीज के तीमारदार ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाया। उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसके भाई को शुरुआत में कोई गलत इंजेक्शन लगा दिया गया था, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो बाद में उसे बदला गया। एक के बाद एक सामने आ रहे इन गंभीर आरोपों के कारण अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की कार्यशैली संदेह के घेरे में आ गई है। फिलहाल इस बढ़ते दबाव को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह आश्वासन दिया है कि इस पूरी घटना की एक विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, और जांच पूरी होने के बाद ही सभी वास्तविक तथ्य जनता के सामने रखे जाएंगे。

सवाल-जवाब

मोहम्मद अकबर को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया था?
मोहम्मद अकबर को हाई ब्लड प्रेशर, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और एस्पिरेशन निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों के कारण 18 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
छत का पंखा गिरने की घटना कब और कहां हुई?
यह भयानक घटना शनिवार रात करीब 9:30 बजे गुरु तेग बहादुर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड नंबर 27 में हुई।
अस्पताल प्रशासन ने अकबर की मौत का क्या कारण बताया है?
अस्पताल का दावा है कि मरीज की मौत पंखा गिरने से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद उनकी गंभीर चिकित्सीय समस्याओं के कारण हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल की व्यवस्था के बारे में क्या आरोप लगाए?
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि वार्ड के कई एयर कंडीशनर खराब थे, घटना के बाद डॉक्टरों के पहुंचने में देरी हुई और अस्पताल प्रशासन मरीजों की सुरक्षा की अनदेखी कर रहा है।
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