झारखंड की राजधानी रांची स्थित होटल चाणक्य बीएनआर में कुछ दिन पूर्व डिजिटल हेल्थ कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना था। इस कॉन्क्लेव के दौरान कई अत्याधुनिक मेडिकल मशीनें प्रदर्शित की गईं, जिन्होंने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
बंदूक जैसी दिखने वाली अनोखी पोर्टेबल तकनीक
इन तमाम उपकरणों के बीच एक ऐसी मशीन विशेष चर्चा का विषय बनी, जिसका बाहरी आकार किसी बड़ी बंदूक जैसा प्रतीत होता है। हालांकि, इस अनूठे उपकरण का वास्तविक कार्य मानव आंख के रेटिना की स्पष्ट तस्वीरें खींचना है। रेडिमो कंपनी के प्रतिनिधि दिलीप ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें इस विशेष मशीन के प्रदर्शन के लिए विशेष आमंत्रण मिला था। यह उपकरण आकार में बेहद छोटा और पोर्टेबल है, जिससे इसे किसी भी स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।
महज 30 सेकंड में स्कैनिंग और गंभीर बीमारियों का खुलासा
यह उन्नत मशीन आंखों के रेटिना की तस्वीर लेने के लिए एक विशेष फंगस लेंस और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करती है। इसके माध्यम से यह उपकरण पूरी आंख के रेटिना को बारीकी से स्कैन कर लेता है और यह संकेत देता है कि भविष्य में व्यक्ति को कौन सी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। स्कैन किए जाने वाले संभावित जोखिमों में क्रॉनिक किडनी फेलियर, क्रॉनिक हार्ट फेलियर और अन्य गंभीर हृदय रोग शामिल हैं।
दिलीप ने स्पष्ट किया कि यह उपकरण केवल 30 सेकंड के भीतर तस्वीर कैप्चर करके सारी रिपोर्ट सीधे उपयोगकर्ता के मोबाइल फोन पर भेज देता है। इसके बाद मरीज अपने फोन पर ही अपनी आंखों से जुड़ी समस्याओं को आसानी से देख सकता है। इसके पीछे का मुख्य वैज्ञानिक आधार यह है कि आंखें पूरे शरीर का मुख्य स्क्रीनिंग हिस्सा होती हैं, और आंखों की नसें शरीर के भीतर पनप रही अंदरूनी परेशानियों की सटीक जानकारी दे देती हैं।
समय रहते इलाज और बचाव की उम्मीद
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके जरिए समय रहते बीमारियों की पहचान करके उनका उपचार संभव हो सकेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को यह शुरुआती चेतावनी मिल जाए कि उसे भविष्य में क्रॉनिक किडनी डिजीज होने का जोखिम है, तो वह अपने ब्लड प्रेशर और शुगर के स्तर की नियमित जांच करवा सकता है। डॉक्टर की निरंतर निगरानी में रहने से इस तरह की गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को टाला भी जा सकता है। वर्तमान में यह मशीन रांची में उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसे बहुत जल्द यहां लॉन्च किए जाने की तैयारी चल रही है।



















