राजधानी में लंबित यातायात दंड के त्वरित निस्तारण के लिए दिल्ली सरकार एक नई और सुगम प्रणाली लागू करने जा रही है। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद वाहन चालकों को वर्षों से लटके चालानों के भुगतान के लिए लोक अदालत के चक्कर काटने और लंबी कतारों में इंतजार करने से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। नए तंत्र के जरिए नागरिक अपने क्षेत्र में स्थित प्रशासनिक कार्यालयों में जाकर किसी भी कार्यदिवस पर आसानी से जुर्माना राशि जमा कर सकेंगे।
SDM और परिवहन दफ्तरों को दिए जाएंगे अधिकार
प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत रेखा गुप्ता सरकार 13 प्रशासनिक जिलों में तैनात 39 SDM अधिकारियों को लंबित चालान की राशि स्वीकार करने की कानूनी शक्तियां सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा और उन्हें दंड वसूलने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि वाहन मालिकों को अपने नजदीकी SDM कार्यालय या परिवहन विभाग के दफ्तर में जाकर भुगतान करने का अवसर मिलेगा। लोक अदालत की तिथियों पर निर्भर रहने के बजाय नागरिक अपनी सुविधा अनुसार किसी भी सामान्य दिन वहां पहुंचकर अपने बकाए का निस्तारण कर पाएंगे।
डिजिटल पोर्टल और ट्रैफिक पुलिस सिस्टम का एकीकरण
भुगतान की इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस नए पोर्टल को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मौजूदा केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जोड़ा जाएगा।
जैसे ही कोई वाहन मालिक अपने नजदीकी एसडीएम या परिवहन कार्यालय में चालान का भुगतान करेगा, उसकी सूचना तुरंत ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम में खुद-ब-खुद अपडेट हो जाएगी। इसके साथ ही चुकता किया गया चालान पोर्टल की एक्टिव पेंडिंग सूची से तुरंत हटा दिया जाएगा, जिससे वाहन चालकों को किसी तरह की कागजी परेशानी का सामना न करना पड़े।
लंबित मामलों का बड़ा बैकलॉग और विधायी प्रक्रिया
दिल्ली में हर साल जारी होने वाले कुल यातायात चालानों में से लगभग 80% चालान बिना भुगतान के पेंडिंग रह जाते हैं। इस वजह से समय के साथ लंबित मामलों का आंकड़ा बढ़कर लगभग दो करोड़ तक पहुंच गया है। इसी विशाल बैकलॉग को समाप्त करने और नागरिकों के लिए भुगतान को आसान बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है।
हालांकि इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने होंगे। इस संबंध में तैयार किए गए प्रस्ताव को दिल्ली विधानसभा से पारित कराना अनिवार्य होगा। विधानसभा की मंजूरी मिलने के पश्चात इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर लागू करने में लगभग छह महीने का समय निर्धारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान भी ऐसी व्यवस्था पर विचार-विमर्श हुआ था, परंतु उस समय यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी थी।





















