देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा देश के सुरक्षा बलों के विरुद्ध सोशल मीडिया मंचों पर अभद्र शब्दावली का प्रयोग करने और आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने वालों पर कानून का शिकंजा कस गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधीन काम करने वाली इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स (IFSO) यूनिट ने इस गंभीर मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3), 353(2) और 356(2) के तहत एफआईआर संख्या 173/26 पंजीकृत की गई है। इस कार्रवाई के अंतर्गत उन सभी डिजिटल खातों और मंचों की पहचान की जा रही है जहाँ से यह आपत्तिजनक सामग्रियाँ इंटरनेट पर साझा की गई थीं।
सोशल मीडिया खातों तथा न्यूज पोर्टल्स को जारी किए गए विधिक नोटिस
प्राथमिकी पंजीकृत करने के तुरंत पश्चात दिल्ली पुलिस ने जांच प्रक्रिया को तेज़ करते हुए कई प्रमुख एक्स और इंस्टाग्राम खातों को विधिक नोटिस प्रेषित किए हैं। इन नोटिसों के माध्यम से संबंधित खाताधारकों को अपने मंचों से विवादित वीडियो तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस प्रशासन ने यह भी जानकारी मांगी है कि ये आपत्तिजनक वीडियो मूल रूप से कहां से उत्पन्न हुए, इन्हें सबसे पहले किस व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड किया गया और वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्तियों की वास्तविक पहचान क्या है। इस जांच के दायरे में केवल आम सोशल मीडिया प्रयोक्ता ही नहीं, बल्कि कुछ डिजिटल न्यूज पोर्टल और प्रमुख ऑनलाइन हैंडल्स भी शामिल हैं जिनसे यह सामग्री प्रसारित हुई थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, एक्स और अन्य सोशल नेटवर्क पर साझा की गई क्लिपों में कुछ लोग प्रधानमंत्री और सशस्त्र बलों के विरुद्ध अत्यंत अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते देखे गए। इनमें एक युवती का वीडियो भी विशेष रूप से शामिल है जो प्रधानमंत्री के खिलाफ अत्यधिक अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही थी। दिल्ली पुलिस इस मामले में डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए कटिबद्ध है। इससे पूर्व भी संवैधानिक पदों पर आसीन शीर्ष हस्तियों के विरुद्ध अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट किए जाने के संदर्भ में दिल्ली पुलिस ने एक्स मंच के प्रबंधन को पत्र लिखकर विस्तृत विवरण तथा प्रयोक्ताओं की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की थी।
जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन से जुड़ा है पूरा मामला
यह संपूर्ण प्रकरण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित है। जंतर-मंतर पर छात्रों का यह आंदोलन हाल ही में 25 जुलाई को समाप्त हुआ था। प्रदर्शन के दौरान ही कुछ ऐसे वीडियो रिकॉर्ड किए गए थे जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ भड़काऊ व अमर्यादित टिप्पणियां की गई थीं। इसके बाद इन क्लिपों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैलाया गया। पुलिस अब इन सभी वीडियो के स्रोत, उन्हें रिकॉर्ड करने वाले कैमरामैन और उनमें मौजूद चेहर चेहरों का विवरण एकत्र कर रही है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि की बात करें तो प्रदर्शन के दौरान हिंसा की आशंकाएं भी जताई गई थीं। जंतर-मंतर पर तैनात और झड़प में घायल हुए पुलिस इंस्पेक्टर नंदकिशोर ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि छात्र प्रदर्शन में कुछ उपद्रवी तत्व नुकीले हथियारों के साथ शामिल हुए थे और आंदोलन में चाकूबाजों की घुसपैठ हो चुकी थी।
केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे और मांगें मंजूर होने के बाद खत्म हुआ था प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर जारी छात्रों का यह लंबा विरोध प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दिए जाने के बाद 25 जुलाई को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया गया था। प्रदर्शनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया था। सरकार ने संगठन की तीनों मुख्य शर्तों को स्वीकार कर लिया था।
स्वीकृत की गई इन मांगों में पहली शर्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री का तत्काल इस्तीफा थी। दूसरी प्रमुख मांग के तहत आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा प्रदान करने पर सहमति बनी थी। वहीं तीसरी शर्त के अनुसार, आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और कार्यक्रम के आयोजकों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमों तथा कानूनी मामलों को पूरी तरह से वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, जिसके पश्चात छात्रों ने अपना धरना समाप्त किया था।



















