दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी में 17 अगस्त को एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पीएचडी इंटरव्यू से जुड़ी पुरानी रंजिश के चलते एक रिसर्च स्कॉलर ने प्रोफेसर पर अचानक हमला कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे शैक्षणिक परिसर में भारी तनाव और हड़कंप का माहौल बना हुआ है। यह पूरी वारदात प्रोफेसर अनुपम झा के साथ उस वक्त हुई जब वे अपनी निर्धारित कक्षा को पढ़ाने के लिए जा रहे थे। इस घटना के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र समुदाय के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कैपिस में घात लगाकर किया गया हमला
सामने आए सीसीटीवी फुटेज से इस पूरी घटना की भयावहता का पता चलता है। फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि आरोपी छात्र बिल्डिंग के बाहर पहले से ही घात लगाकर खड़ा था और प्रोफेसर अनुपम झा का इंतजार कर रहा था। जैसे ही प्रोफेसर वहां पहुंचे, उस छात्र ने उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित और अचानक हुए हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और निलंबन
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रॉक्टर के आदेश पर आरोपी छात्र को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उसके खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में आधिकारिक रूप से एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने इस पूरी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और आरोपी छात्र के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। संगठन का साफ तौर पर कहना है कि इस मामले में केवल निलंबन की कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है।
शिक्षकों की सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल
संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि शिक्षकों के साथ बदसलूकी और मारपीट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है। हाल ही में लॉ फैकल्टी के कुछ अन्य प्रोफेसरों के साथ भी एक छात्र द्वारा कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया था। इसके अलावा संगठन ने पिछले साल की एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि तत्कालीन डीयूएसयू की संयुक्त सचिव दीपिका झा ने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर कॉलेज में एक प्रोफेसर को थप्पड़ मारा था। इन तमाम मिसालों का हवाला देते हुए संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और कैंपस में सभी शिक्षकों की सुरक्षा के लिए कड़े एवं प्रभावी कदम उठाने की जोरदार मांग की है।
पीड़ित प्रोफेसर और अन्य साथियों का पक्ष
पीड़ित प्रोफेसर अनुपम झा ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जब वे अपनी क्लास में पढ़ाने जा रहे थे, तब बिल्डिंग के बाहर रैंप के पास एक छात्र खड़ा था जिसने अचानक उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि छात्र ने उन्हें लात और घूंसे मारे। प्रोफेसर ने स्पष्ट किया कि वे उस छात्र को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे और न ही वह उनकी कक्षा में पढ़ता था। हालांकि, आरोपी छात्र का कहना था कि डेढ़ साल पहले प्रोफेसर ने उसके पीएचडी का इंटरव्यू लिया था और उसी समय से उसके मन में प्रोफेसर के प्रति नाराजगी चल रही थी। प्रोफेसर का कहना है कि उन्हें खुद याद नहीं है कि उन्होंने इंटरव्यू में उससे कौन सा सवाल पूछा था जिसके कारण उसने इस तरह की हिंसक हरकत को अंजाम दिया।
इस बीच, फैकल्टी के अन्य सदस्यों ने भी इस पूरी घटना को बेहद शर्मनाक करार दिया है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब कैंपस में शिक्षक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पिछले साल भी एक छात्र द्वारा प्रोफेसर की पिटाई की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद डीन से इसकी शिकायत की गई थी जिसके आधार पर लड़के को सस्पेंड कर दिया गया। शिक्षकों ने मांग की है कि परिसर का माहौल ऐसा बनाया जाए जहां हर कोई सुरक्षित महसूस कर सके। इस घटना ने एक बार फिर से यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाने की जरूरत को प्रमुखता से सामने ला दिया है।



















