दिल्ली यूनिवर्सिटी के परिसरों में अनुशासनहीनता और शिक्षकों के साथ बदसलूकी का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। लॉ फैकल्टी के एक प्रोफेसर को थप्पड़ मारने की घटना के तूल पकड़ने के बाद अधिकारियों ने आरोपी पीएचडी रिसर्च स्कॉलर के खिलाफ तुरंत एक्शन लेते हुए उसे निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के दायरे में केवल उसकी पढ़ाई ही नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी के किसी भी हिस्से में उसका प्रवेश भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सोमवार सुबह उमंग भवन में हुई घटना
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर ऑफिस की ओर से सोमवार को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया गया, जिसमें इस पूरी घटना का विवरण दिया गया है। यह विवादित मारपीट की घटना सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे उमंग भवन के परिसर में पेश आई थी। आरोपी छात्र शुभम सिंह ने इसी शैक्षणिक सत्र यानी 2024-25 के दौरान फेज-II के तहत फैकल्टी ऑफ लॉ में पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था और वह वर्तमान में शोध कार्य से जुड़ा हुआ था।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई मारपीट
इस पूरे मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज लग गया। अधिकारियों के अनुसार इस वीडियो फुटेज में आरोपी रिसर्च स्कॉलर साफ तौर पर एक प्रोफेसर को थप्पड़ मारते हुए नजर आ रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर मनोज कुमार सिंह ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना सोमवार की सुबह हुई थी और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक छात्र को फैकल्टी ऑफ लॉ से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
कानून के तहत यूनिवर्सिटी कैंपस में एंट्री बंद
प्रशासन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट, 1922 के ऑर्डिनेंस XV-B के प्रावधानों का हवाला देते हुए आरोपी छात्र के खिलाफ कड़ा प्रतिबंध लगाया है। इसके तहत उसे तुरंत प्रभाव से विश्वविद्यालय के किसी भी परिसर में कदम रखने से रोक दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की हिंसा और अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, इसलिए यह कड़ा कदम उठाया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
तीन सदस्यीय स्वतंत्र जांच समिति गठित
इस पूरी घटना की तह तक जाने और निष्पक्ष सच्चाई का पता लगाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन सदस्यीय एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन कर दिया है। यह कमेटी इस अप्रिय घटना से जुड़े तमाम पहलुओं की बारीकी से जांच करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपेगी। इस समिति की कमान रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर राजीव गुप्ता को सौंपी गई है, जो इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा इतिहास विभाग के विपुल सिंह और हिंदी विभाग की सुधा सिंह को इस कमेटी का महत्वपूर्ण सदस्य बनाया गया है। कमेटी को पूरी घटना की जांच कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसी रिपोर्ट के आधार पर छात्र के खिलाफ आगे की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
DUTA ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद से शिक्षण समुदाय में भी भारी रोष देखने को मिल रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन यानी DUTA ने प्रोफेसर के साथ हुई इस कथित मारपीट की घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। DUTA की ओर से कुलपति योगेश सिंह को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस पूरे वाकये की कड़े शब्दों में निंदा की गई है और दोषी छात्र के खिलाफ अनुकरणीय व सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई है। शिक्षकों के इस संगठन का साफ कहना है कि शैक्षणिक परिसर के भीतर किसी भी शिक्षक के साथ इस प्रकार का आपत्तिजनक व्यवहार बेहद गंभीर विषय है और ऐसी घटनाओं पर सख्त रुख अपनाना बेहद जरूरी है ताकि एक कड़ा संदेश जाए।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी रिसर्च स्कॉलर को निलंबित करने के साथ ही उसके कैंपस में घुसने पर भी पाबंदी लगा दी है। अब सभी की निगाहें तीन सदस्यीय जांच समिति की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिसके आने के बाद ही इस पूरे मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।





















