राजस्थान की राजधानी जयपुर के 25 वर्षीय निशानेबाज आकाश भारद्वाज ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर भारतीय खेल जगत में एक अनूठी मिसाल कायम की है। आकाश का चयन जापान के आइची-नागोया शहर में आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए भारतीय निशानेबाजी टीम में हुआ है। वह पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। 21 साल की उम्र तक पिस्टल न छूने वाले आकाश ने महज 4 साल के कड़े अभ्यास से यह मुकाम हासिल किया है। राष्ट्रीय स्तर पर चयन ट्रायल में हासिल रैंकिंग अंकों के आधार पर नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने उनका चयन राष्ट्रीय टीम में किया है।
कमर्शियल ड्राइवर के बेटे का संघर्ष और परिवार का अटूट सहयोग
आकाश भारद्वाज का एशियन गेम्स तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। उनके पिता पेशे से कमर्शियल ड्राइवर हैं और महीने में करीब 10 से 15 हजार रुपये की सीमित आय में पूरे परिवार का भरण पोषण करते हैं। इसके बावजूद पिता ने बेटे की खेल प्रतिभा को पहचानकर अपने क्रेडिट कार्ड से आकाश के लिए पहली पिस्टल खरीदी थी। इसके अलावा उनके बड़े भाई शुभम भारद्वाज ने अपनी निजी कमाई से आकाश की शूटिंग एकेडमी की फीस का भुगतान किया। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार के इस अटूट सहयोग ने आकाश के हौसले को कभी डगमगाने नहीं दिया। वर्तमान में आकाश का परिवार जयपुर के निवारू रोड इलाके में निवास करता है।
14 किलोमीटर साइकिल और लिफ्ट लेकर मरुधरा स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी की राह
सफलता के इस शिखर तक पहुंचने के लिए आकाश को संसाधनों के भारी अभाव से जूझना पड़ा। जयपुर स्थित मरुधरा स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी पहुंचने के लिए उनके पास अक्सर वाहन के साधन नहीं होते थे। कई बार वह पैदल चलकर तो कई बार राहगीरों से लिफ्ट लेकर एकेडमी पहुंचते थे। अनेक मौकों पर वह 14 किलोमीटर साइकिल चलाकर अपनी ट्रेनिंग के लिए समय पर पहुंचते थे। सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच भी वह रोजाना 6 से 7 घंटे शूटिंग रेंज पर बिताते थे और पसीना बहाते थे।
बिना व्यक्तिगत कोच के खुद तैयार की अपनी ट्रेनिंग प्रणाली
शुरुआती दौर में आकाश के पास कोई निजी कोच या विशेष गाइडेंस उपलब्ध नहीं थी। 2021 में एक सोमवार को एकेडमी के विज्ञापन को देखकर उन्होंने शूटिंग में दाखिला लिया था। खेल की बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने खुद ही अध्ययन शुरू किया। वह रोजाना 6 से 7 घंटे ड्रिल्स का अभ्यास करते थे और अपनी गलतियों का बारीकी से विश्लेषण करके उन्हें डायरी में नोट करते थे। उन्होंने अपनी फिजिकल कंडीशनिंग और ड्राई फायर प्रैक्टिस का खाका खुद तैयार किया। इस आत्मनिर्भर अभ्यास ने उनके अंदर आत्म-विश्वास और अपनी मेहनत पर अटूट भरोसा पैदा किया।
रग्बी के राष्ट्रीय पदक से निशानेबाजी तक का अनोखा मोड़
शूटिंग में आने से पहले आकाश एथलेटिक्स और रग्बी के खिलाड़ी थे। रग्बी खेल में वह राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक भी जीत चुके हैं। हालांकि, संपर्क वाले खेलों में शारीरिक चोट लगने के जोखिम को देखते हुए उन्होंने व्यक्तिगत खेल की ओर रुख करने का फैसला किया। 21 साल की उम्र में उन्होंने रग्बी छोड़कर 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी को अपना मुख्य खेल चुना। मात्र चार वर्षों के भीतर उन्होंने इस खेल की तकनीकी बारीकियों पर महारत हासिल कर ली।
घरेलू स्पर्धाओं से पेरू वर्ल्ड कप तक लहराया परचम
मरुधरा स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी से जुड़े रहते हुए आकाश ने इंटर-कॉलेज टूर्नामेंट, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी और खेलो इंडिया गेम्स में कई पदक अपने नाम किए। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें राष्ट्रीय चयन ट्रायल में स्थान मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वह भारत की चमक बिखेर चुके हैं। पेरू की राजधानी लीमा में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में उन्होंने ओवरऑल टॉप 8 में जगह बनाई थी और भारतीय दल में पहला स्थान हासिल किया था। अब वह एशियन गेम्स में तिरंगा लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।



















