दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया गया है। बुधवार को अदालत के समक्ष इस संवेदनशील मामले का जिक्र किया गया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने अपने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए इस पर तुरंत विचार करने में असमर्थता जताई है। यह मामला छात्रों पर पुलिस के एक्शन से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर प्रदर्शनकारी न्याय की मांग कर रहे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने उठी मांग
इस महत्वपूर्ण मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एडवोकेट नरेंद्र मिश्रा द्वारा उठाया गया। उन्होंने अदालत से विशेष अनुरोध किया कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की जाए। वकील ने अदालत से आग्रह किया कि हालात की गंभीरता और छात्रों की स्थिति को देखते हुए इस मामले को बिना किसी देरी के गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
पुलिस की कथित बर्बरता के वीडियो का जिक्र
तत्काल सुनवाई की मांग पर जोर देते हुए एडवोकेट नरेंद्र मिश्रा ने अदालत को यह भी बताया कि उनके पास सीजेपी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कथित बर्बरता को दर्शाने वाले कई वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि छात्र अभी भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं और उनका विरोध जारी है। वकील का मुख्य उद्देश्य यह था कि अदालत इन वीडियो क्लिप्स को देखे और मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सुनवाई का आदेश दे।
अदालत का स्पष्ट इनकार
वकील की इन तमाम दलीलों और वीडियो साक्ष्य पेश करने की पेशकश के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तत्काल विचार करने से साफ मना कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने वकील की दलीलों पर स्पष्ट रूप से कहा कि फिलहाल उनके पास इस मामले को सुनने के लिए बिल्कुल भी वक्त नहीं है। अदालत ने वीडियो देखने से भी इनकार कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने दोटूक कहा, "नहीं-नहीं, हमारे पास कल समय नहीं है। हमारे पास समय नहीं है। हम वीडियो नहीं देखना चाहते।" इस कड़ी टिप्पणी के साथ ही अदालत ने याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया।



















