राजधानी के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली युवती के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपना रुख साफ कर दिया है। सोशल मीडिया पर लगातार उठ रही कानूनी कार्रवाई की मांग के बावजूद दिल्ली पुलिस ने इस प्रकरण में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया है। पुलिस महकमे की ओर से मिली हालिया जानकारी के मुताबिक राजधानी में इस घटनाक्रम पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही फिलहाल ऐसा कोई कदम उठाने की योजना है।
दिल्ली पुलिस का रुख और कानूनी स्थिति
सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि राजधानी की पुलिस युवती के खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है। हालांकि, दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में फिलहाल कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और आगे भी कोई मामला दर्ज करने की प्रक्रिया चालू नहीं है। इस फैसले से यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि दिल्ली पुलिस इस घटना को लेकर फिलहाल किसी भी प्रकार की दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई के मूड में नहीं है।
नोएडा पुलिस की जीरो एफआईआर की भूमिका
इस पूरे प्रकरण ने उस समय तूल पकड़ा था जब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने मामले में एक जीरो एफआईआर दर्ज की थी। जीरो एफआईआर की कानूनी व्यवस्था के तहत पीड़ित या शिकायतकर्ता घटना स्थल के अधिकार क्षेत्र से बाहर किसी भी पुलिस थाने में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकता है। इसके बाद संबंधित पुलिस थाना उस एफआईआर को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए उस थाने में स्थानांतरित कर देता है जिसके अंतर्गत वह इलाका आता है। नोएडा में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद ही यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था और अधिकार क्षेत्र के तहत इसे दिल्ली स्थानांतरित करने की बात की जा रही थी।
प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद, माफी और प्रधानमंत्री की सीख
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जंतर-मंतर पर आयोजित CJP के विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ। उस वीडियो में संबंधित युवती देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करती दिखी थी। वीडियो के सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक हलकों और आम लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और सोशल मीडिया पर युवती की गिरफ्तारी तथा कानूनी शिकंजे की मांग तेज हो गई।
विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी एक बयान सार्वजनिक हुआ था, जिसमें उन्होंने भटक चुके युवाओं के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर कुछ युवा भटक गए हैं और उन्होंने गलत शब्द कहे हैं, तो उन्हें सजा देने के बजाय माफ कर सही दिशा दिखाई जानी चाहिए। इस बयान को कई विशेषज्ञों ने माहौल को शांत करने और विवाद को समाप्त करने के आह्वान के रूप में देखा।
इसके तुरंत बाद युवती का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें उसने अपने पूर्व बयानों पर गहरा खेद प्रकट किया। उसने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए कहा कि यदि उसकी बातों से किसी भी व्यक्ति या समूह की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह उसके लिए क्षमाप्रार्थी है। इस क्षमायाचना और प्रधानमंत्री के रुख के बाद अब दिल्ली पुलिस के फैसले से इस विवाद पर विराम लगता नजर आ रहा है।


















