नई दिल्ली: रूस की सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगे। मंगलवार को मॉस्को से भारतीय पत्रकारों के साथ एक वर्चुअल सत्र में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पुतिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शरीक होंगे, जो 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। पेस्कोव के मुताबिक यह दौरा दोनों देशों को आपसी रिश्तों से जुड़े मसलों पर बात करने का एक अच्छा अवसर देगा, और उन्होंने सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए भारत को शुभकामनाएं भी दीं।
11 सितंबर को मोदी से अकेले में बातचीत करेंगे पुतिन
पेस्कोव ने आगे खुलासा किया कि ब्रिक्स सम्मेलन से पहले, शुक्रवार यानी 11 सितंबर को पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अलग से द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे। मॉस्को से हुई इस ब्रीफिंग में पेस्कोव ने भारतीय और रूसी नेतृत्व के आपसी तालमेल पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हमारे नेता बहुत करीबी व्यक्तिगत संपर्क में हैं और इतने ईमानदार हैं कि सबसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर बात कर सकते हैं।" उनके मुताबिक इसी वजह से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलते रहते हैं।
क्रेमलिन प्रवक्ता ने सम्मेलन को लेकर रूस का भरोसा भी जताया। उन्होंने कहा, "हमें कोई संदेह नहीं है कि यह शिखर सम्मेलन सफल होगा।" पेस्कोव ने बताया कि रूस अपनी तरफ से ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य आधारों, यानी नीति व सुरक्षा, अर्थव्यवस्था व वित्त, और सांस्कृतिक व मानवीय सहयोग को और मजबूत बनाने में जुटा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रूस नए देशों को ब्रिक्स के अलग-अलग स्वरूपों से जोड़ने के प्रस्ताव का समर्थन करता है।
क्यों खास है भारत मंडपम में होने वाला यह सम्मेलन
भारत के लिए यह मौका इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल 1 जनवरी को उसने ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी, यह चौथी बार है जब भारत के हाथ में इस समूह की कमान आई है। इसके अलावा 2026 का साल ब्रिक्स की स्थापना के दो दशक पूरे होने का भी प्रतीक है, जिससे तेजी से उभर रहे बाजारों और विकासशील देशों के इस मंच के लिए यह सम्मेलन और भी अहम बन जाता है।
ब्रिक से ब्रिक्स तक का सफर
यह समूह शुरुआत में सिर्फ चार देशों, ब्राजील, रूस, भारत और चीन का 'ब्रिक' गठबंधन था। इन देशों के विदेश मंत्रियों की पहली मुलाकात 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी। इसके तीन साल बाद, 2009 में रूस के शहर येकातेरिनबर्ग में इस समूह का पहला विधिवत शिखर सम्मेलन हुआ। फिर 2011 में दक्षिण अफ्रीका के इसमें शामिल होने के बाद इस मंच का नाम बदलकर 'ब्रिक्स' कर दिया गया, जो आज तक कायम है।
बिश्केक में भी हुई थी दोनों नेताओं की मुलाकात
यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में मोदी और पुतिन आमने-सामने आए हों। इससे पहले 31 अगस्त को भी दोनों नेताओं ने किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर मुलाकात की थी। अब सिर्फ दो हफ्ते के भीतर दोनों नेता फिर से एक-दूसरे से रूबरू होंगे, इस बार भारत की धरती पर, जो दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते संपर्क को दिखाता है।



















