दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत ढहने से जिस 19 साल के छात्र अर्पित की जान गई थी, उसके परिवार ने बेटे की यादों को जिंदा रखने के लिए एक भावुक फैसला लिया है। परिवार ने तय किया है कि अर्पित की कॉर्निया दान की जाएगी, ताकि कोई और व्यक्ति उसकी आंखों से इस दुनिया को देख सके।
हादसे में गई सात जिंदगियां
सत्य निकेतन में हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। इमारत गिरने से कुल सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें अर्पित भी शामिल था। हादसे के बाद से इलाके में मातम पसरा हुआ है और अर्पित के परिवार के लिए यह सदमा बर्दाश्त से बाहर है।
रक्षाबंधन के लिए गया था मध्य प्रदेश, लौटते ही हुआ हादसा
अर्पित रक्षाबंधन का त्योहार परिवार के साथ मनाने के लिए मध्य प्रदेश गया था। वहां से वह रविवार सुबह ही दिल्ली वापस लौटा था। जाते वक्त उसकी मां ने उसे रोकने की कोशिश की थी और कहा था कि अभी दिल्ली मत जाओ। लेकिन उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर अर्पित के लिए आखिरी साबित होगा और वह कभी जिंदा घर नहीं लौटेगा।
बेटे का शव देखकर बेहोश हुईं मां, एम्स में भर्ती
जब अर्पित की मां ने बेटे का शव देखा तो वह वहीं बेहोश हो गईं। उन्हें तुरंत एम्स ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। घर में मातम का माहौल है और परिवार के लोग लगातार रो रहे हैं। 19 साल की उम्र, जिसमें ज्यादातर युवा अपने भविष्य के सपने बुनना शुरू करते हैं, उसी उम्र में अर्पित हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया।
गम के बीच समाजसेवा का फैसला
इतने बड़े सदमे के बावजूद अर्पित के परिवार ने हौसला दिखाते हुए एक नेक फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि अर्पित की कॉर्निया दान की जाएगी। इससे कोई ऐसा मरीज जो देख नहीं पा रहा है, उसे अर्पित की आंखों से रोशनी मिल सकेगी। परिवार का यह कदम बताता है कि गहरे दुख के बावजूद भी इंसानियत और दूसरों की भलाई के बारे में सोचा जा सकता है। अर्पित भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी कॉर्निया के जरिए वह किसी और की जिंदगी में उजाला भर सकेगा।



















