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सत्य निकेतन हादसा: 50 छात्रों की जान का सवाल, हाईकोर्ट ने एमसीडी और सरकार को लगाई फटकारदिल्ली
7 सित॰ 2026, 5:57 pm (1 घंटे पहले)· 2

सत्य निकेतन हादसा: 50 छात्रों की जान का सवाल, हाईकोर्ट ने एमसीडी और सरकार को लगाई फटकार

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर कहा कि प्रशासन जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कोर्ट ने रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए, इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।

दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए बिल्डिंग हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए साफ कहा कि प्रशासन इस हादसे की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि मलबे में दबे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि इस हादसे में करीब 50 छात्रों की जान दांव पर लगी है और कुछ छात्र अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि इससे ज्यादा दुखद स्थिति और कुछ नहीं हो सकती। अदालत ने प्रशासन से सीधा सवाल किया कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या तैयारी की जा रही है।

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सॉलिसिटर जनरल का भरोसा

सुनवाई में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया।

लोगों की जान बचाने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके बाद अदालत ने अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज करने और हर मुमकिन तरीके से जिंदगियां बचाने पर जोर दिया।

कैसे हुआ हादसा

दरअसल, रविवार को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला एक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि जिस समय यह इमारत ढही, उसके बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। इमारत के ऊपरी हिस्से में एक पीजी संचालित होता था, जहां कई छात्र रहकर पढ़ाई करते थे। रविवार का दिन होने के कारण ज्यादातर छात्र उस वक्त छुट्टी मनाने के बजाय अपने कमरों में ही मौजूद थे, जिससे हादसे का असर और भी बड़ा हो गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी

घटनास्थल पर बचाव दल का रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी चल रहा है। टीमें मलबे में अब भी जिंदा लोगों की तलाश में जुटी हैं, ताकि फंसे हुए और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि राहत और बचाव कार्य में और तेजी आएगी और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।

सवाल-जवाब

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
यह हादसा कब और कहां हुआ?
यह हादसा रविवार को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ, जहां एक पांच मंजिला इमारत गिर गई।
हाईकोर्ट ने किसे नोटिस जारी किया है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।
हादसे के वक्त इमारत में क्या काम चल रहा था?
बताया जाता है कि इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को क्या भरोसा दिलाया?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
इमारत में कौन रहता था?
इमारत के ऊपरी हिस्से में एक पीजी चलता था, जिसमें कई छात्र रहते थे।
हाईकोर्ट के मुताबिक कितने छात्रों की जान खतरे में है?
हाईकोर्ट ने कहा कि इस हादसे में करीब 50 छात्रों की जान दांव पर लगी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

सत्य निकेतन हादसे पर उच्च न्यायालय की यह सख्त टिप्पणी प्रशासनिक लापरवाही और बेसमेंट में चल रहे अनधिकृत निर्माण पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। सात लोगों की जान जाने के बाद अब जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत भविष्य के लिए ऐसे पीजी और व्यावसायिक निर्माणों पर क्या कड़े नीतिगत निर्देश जारी करती है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·35 मिनट पहले

सत्य निकेतन की इस घटना ने दिल्ली के शैक्षिक हब में चल रहे अवैध पीजी और बेसमेंट निर्माण की खतरनाक हकीकत को उजागर कर दिया है। जब तक स्थानीय निकाय नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराएंगे और निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक छात्रों की सुरक्षा कागजों तक ही सीमित रहेगी। अदालत के इस हस्तक्षेप से उम्मीद है कि प्रशासन अब नींद से जागेगा और इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर लगाम कसी जाएगी।

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